आज हिमाचल समेत कई राज्यों के किसान परेशान है, और इनकी परेशानी की वजह है एक ऐसा कीट जो देखते ही देखते पूरी फसल को चट कर रहा है, यह कोई हवा में किया हुआ दावा नहीं, बल्कि फॉल आर्मीवर्म की हकीकत है। पिछले कुछ वर्षों में इस खतरनाक कीट ने भारत के लाखों किसानों को खूब नुक्सान पहुंचाया है। हिमाचल में खरीफ सीजन में इन दिनों फॉल आर्मीवर्म ने मक्की की फसल को बुरी तरह से प्रभावित कर दिया है। इसका वैज्ञानिक नाम Spodoptera frugiperda है, इसकी मादा एक बार में 100 से 200 अंडे देती है और गर्म मौसम में इसका जीवन चक्र केवल 30 से 35 दिनों में पूरा हो जाता है। मक्की की एक फसल के दौरान यह तीन बार अपनी संख्या बढ़ा सकता है।
उन्होंने बताया कि अंडों से निकलने वाली सुंडियां पहले पत्तियों और तनों को नुकसान पहुंचाती हैं, फिर भुट्टों के अंदर घुसकर फसल को भीतर से नष्ट कर देती हैं। यही नहीं इनका अधिक हमला होने पर पूरी फसल सूख सकती है, जानकारी के अनुसार इसकी पतंगा अवस्था एक रात में लगभग 100 किलोमीटर तक उड़ सकती है। यही वजह है कि यह बहुत कम समय में बड़े इलाके में फैल जाता है। ये कितना खतरनाका है इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि फॉल आर्मीवर्म की मादा एक बार में सैकड़ों अंडे देती है और अपने जीवनकाल में हजारों अंडे दे सकती है।
हालांकि आज से कुछ साल पहले तक भारत में इस किट का नामोनिशान नहीं था। इसकी उत्पत्ति अमेरिका के उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में हुई थी। बाद में यह अफ्रीका और एशिया के कई देशों में फैल गया। भारत में इस कीट को सबसे पहले 2018 में कर्नाटक के में देखा गया था। फिर धीरे धीरे ये हर राज्य में तेजी से फैल गया, ये मुख्य रूप से मक्का और 80 से अधिक अन्य फसलों को नुकसान पहुंचाता है, जिनमें गेहूं, ज्वार, बाजरा, गन्ना, सब्जी की फसलें और कपास शामिल हैं। फॉल आर्मीवर्म खाद्य सुरक्षा के लिए एक वैश्विक खतरा है, एक रिपोर्ट के अनुसार फॉल आर्मीवर्म के कारण प्रतिवर्ष 17.7 मिलियन टन तक मक्का नष्ट हो सकता है, जो 2.5 से 6.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर के बराबर है और लाखों लोगों को खिलाने के लिए पर्याप्त है।
अब बात हिमाचल की करें तो हिमाचल में इस कीट ने सबसे ज्यादा मक्की को नुकसान पहुंचाया है। प्रदेशभर में मक्की लगभग 2.85 लाख हेक्टेयर भूमि पर उगाई जाती है। लेकिन पिछले तीन-चार वर्षों से फॉल आर्मीवॉर्म मक्की के किसानों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। यही नहीं इस वर्ष मौसम की अनुकूल परिस्थितियों के कारण इसका प्रकोप और अधिक बढ़ गया है, जिससे उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका है।
इस बार हिमाचल का मंडी जिला जहां करीब 48 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में मक्की की खेती की जाती है इस कीट के हमले से बुरी तरह प्रभावित हो चुका है, हालांकि हालात बाकी जिलों में भी बेहतर नहीं हैं। ऐसे में विशेषज्ञ समय समय पर किसानों के लिए एडवाइजरी जारी कर रहे हैं। कृषि विज्ञान केंद्र मंडी के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. पंकज सूद का कहना है कि इस हमले से बचने का सबसे बड़ा तरीका है कि समय रहते फसल की निगरानी करना। डॉ. सूद ने किसानों से खेतों का नियमित निरीक्षण करने और कीट के शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर तुरंत कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि विभाग से संपर्क करने की सलाह दी है। नियंत्रण के लिए क्लोरेंट्रानिलिप्रोल (कोराजन) 0.4 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी या इमामेक्टिन बेंजोएट के छिड़काव की सलाह दी गई है। और अगर फिर भी खतरा न टले तो 15 दिन बाद दोबारा स्प्रे करने की आवश्यकता हो सकती है..।
इसके अलावा खेतों में उड़ने वाले पतंगों की निगरानी और उनकी संख्या कम करने के लिए फनल ट्रैप लगाने की भी सलाह दी गई है, जिससे कीट के प्रजनन पर रोक लगाकर फसल को भारी नुकसान से बचाया जा सके। कुल मिलाकर कहा जाए तो इन दिनों फॉल आर्मीवर्म केवल एक कीट नहीं, बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा और किसानों की आय के लिए बड़ी चुनौती बन चुका है। बदलते मौसम और तेजी से फैलने की इसकी क्षमता इसे और भी खतरनाक बनाती है। इसलिए समय पर पहचान, वैज्ञानिक सलाह और सामूहिक प्रयास ही फसलों को बचाने का सबसे प्रभावी तरीका है।