मोहब्बत सच्ची हो, तो सरहदें भी आड़े नहीं आती, वियतनाम की मेम को भाया अमलेला का गबरू

दोनों ने हिंदू रीति-रिवाज से फतेहपुर में रचाई शादी

सुनील दत्त—जवाली

प्यार भाषा, सरहदें और दूरियां नहीं देखता…इसका उदाहरण उपमंडल जवाली की ग्राम पंचायत अमलेला में देखने को मिला। अमलेला निवासी रजत के प्यार में पडक़र वियतनाम की युवती हजारों किलोमीटर का सफर तय कर हिमाचल पहुंच गई और दोनों ने श्री नृसिंह मंदिर ठाकरां (फतेहपुर) में हिंदू रीति-रिवाज और वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच सात फेरे लेकर हमेशा के लिए एक-दूसरे का हाथ थाम लिया।

दूल्हे रजत ने बताया कि दोनों की पहचान सोशल मीडिया के माध्यम से हुई थी। बातचीत का सिलसिला धीरे-धीरे दोस्ती और फिर गहरे प्रेम में बदल गया। जब दोनों ने साथ जीवन बिताने का फैसला किया, तो परिवारों ने भी खुशी-खुशी उनकी इच्छा को स्वीकार कर लिया। रजत ने बताया कि वह अपनी होने वाली दुल्हन को लेने दिल्ली गया था, जहां से दोनों फतेहपुर पहुंचे और मंदिर में पूरे विधि-विधान के साथ विवाह संपन्न किया। उन्होंने कहा कि फिलहाल भाषा अलग है, लेकिन प्यार सबसे बड़ी भाषा है और समय के साथ दोनों एक-दूसरे की भाषा भी सीख जाएंगे। नवविवाहिता ने भी हिंदू परंपरा के अनुसार हुई शादी पर खुशी जताते हुए कहा कि यह अनुभव उनके लिए बेहद खास और यादगार रहेगा। दूल्हे के पिता सरताज सिंह और परिवार के अन्य सदस्यों ने जोड़े को आशीर्वाद देते हुए उनके सुखद और सफल वैवाहिक जीवन की कामना की। विवाह समारोह में पंडित योगराज शर्मा ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ विवाह संस्कार संपन्न करवाया।

सरहदें हार गईं… प्यार जीत गया

एक ओर हिमाचल का छोटा-सा गांव अमलेला, दूसरी ओर हजारों किलोमीटर दूर वियतनाम। न भाषा एक, न संस्कृति, न खान-पान लेकिन सोशल मीडिया पर शुरू हुई एक साधारण-सी बातचीत ने ऐसा रिश्ता बनाया कि सात समंदर की दूरियां भी छोटी पड़ गईं। वियतनाम की युवती ने अपना देश छोडक़र भारतीय संस्कृति को अपनाया और फतेहपुर के मंदिर में हिंदू रीति-रिवाज से सात फेरे लेकर हमेशा के लिए हिमाचल की बहू बन गई। यह शादी सिर्फ दो दिलों का मिलन नहीं, बल्कि दो देशों, दो संस्कृतियों और दो परिवारों के खूबसूरत संगम की मिसाल बन गई। सच ही कहा गया है—जब प्यार सच्चा हो, तो दूरियां और सरहदें भी रास्ता नहीं रोक पातीं।