स्टाफ रिपोर्टर-शिमला
शिमला पुलिस ने नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत तीन अलग-अलग मामलों में अंतरराज्यीय चिट्टा सप्लाई नेटवर्क से जुड़े आरोपियों को गिरफ्तार कर बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने केवल नशे की बरामदगी और आरोपियों की गिरफ्तारी तक कार्रवाई सीमित नहीं रखी, बल्कि आरोपियों के बैकवर्ड लिंक, सप्लाई चैन और वित्तीय लेन-देन की भी जांच की है। तीनों मामलों की जांच में हिमाचल के साथ पंजाब, हरियाणा और अन्य राज्यों तक फैले नेटवर्क का खुलासा हुआ है।
एसएसपी शिमला गौरव सिंह ने बताया कि पहले मामले में स्पेशल सेल, जिला शिमला ने 3 अगस्त को शोघी के पास 1.120 किलोग्राम हाई ग्रेड हेरोइन के साथ विजय कुमार को गिरफ्तार किया था। पूछताछ और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस को पता चला कि यह खेप पंजाब के तरनतारन निवासी शुभकरमन सिंह उर्फ सुल्तान ने उपलब्ध करवाई थी। शुभकरमन सिंह को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। इसके बाद जांच आगे बढ़ी तो नेटवर्क में नारायणगढ़, जिला अंबाला निवासी आजाद सिंह की भूमिका सामने आई।
पुलिस ने आजाद सिंह के संभावित ठिकानों पर दबिश दी, लेकिन कार्रवाई की भनक लगने पर वह फरार हो गया। जांच में पता चला कि वह पासपोर्ट और टूरिस्ट वीजा बनवाकर देश छोड़कर अबू धाबी जाने की तैयारी में था। तकनीकी निगरानी से उसकी लोकेशन अहमदाबाद में मिली। इसके बाद शिमला पुलिस की स्पेशल सेल ने गुजरात पुलिस के साथ संयुक्त कार्रवाई करते हुए उसे अहमदाबाद एयरपोर्ट से आबू धाबी जाते समय गिरफ्तार कर लिया। अहमदाबाद कोर्ट से ट्रांजिट रिमांड लेने के बाद उसे शिमला लाया गया, जहां अदालत ने उसे तीन दिन के पुलिस रिमांड पर भेजा है।
जांच में सामने आया कि विजय, शुभकरमन और आजाद आपस में संपर्क के लिए सिग्नल एप्प का इस्तेमाल करते थे। पुलिस के अनुसार शुभकरमन से आजाद और फिर आजाद के माध्यम से 1.120 किलो हेरोइन की खेप विजय तक पहुंची थी। विजय यह खेप लेकर शिमला पहुंचा था, जिसे स्पेशल सेल ने शोघी के पास बरामद किया। आजाद की गिरफ्तारी के बाद इस मामले में अब तक तीन आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं। पुलिस जांच में विजय कुमार और आजाद सिंह का पूर्व आपराधिक इतिहास भी सामने आया है। विजय के खिलाफ हरियाणा के नारायणगढ़ महिला थाना में वर्ष 2025 में मामला दर्ज है, जबकि आजाद के खिलाफ वर्ष 2023 में धारा 376 आईपीसी के तहत मामला दर्ज पाया गया है।
दूसरे मामले में पुलिस थाना जुब्बल ने अंतरराज्यीय चिट्टा सप्लाई नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। यह मामला 15 जुलाई 2026 को दर्ज अभियोग संख्या 29/2026 से शुरू हुआ था। इसमें घुमारवीं, जिला बिलासपुर निवासी रविन्द्र कुमार के कब्जे से 9.57 ग्राम चिट्टा बरामद हुआ था। पुलिस रिमांड के दौरान पूछताछ में रविन्द्र ने बताया कि उसने यह चिट्टा अंबाला निवासी सन्नी सिंह से जीरकपुर में लिया था। पूछताछ में यह भी सामने आया कि आरोपी चिट्टे की डिलीवरी के लिए एक अलग तरह का लोकेशन आधारित तरीका इस्तेमाल कर रहे थे। NH-705 पर सनाभा, खड़ा पत्थर से लेकर सरस्वती नगर तक अलग-अलग जगहों पर चिट्टे की छोटी-छोटी खेप छिपाई जाती थी और इन जगहों की जानकारी मुख्य सप्लायर को व्हाट्सप्प के माध्यम से भेजी जाती थी।
रविन्द्र की निशानदेही पर पुलिस ने कुल 13 स्थानों की पहचान की। इनमें से तीन स्थानों से 4.85 ग्राम, 4.79 ग्राम और 4.89 ग्राम चिट्टा बरामद हुआ। इस तरह इस मामले में अब तक कुल 24.10 ग्राम चिट्टा बरामद किया जा चुका है। पुलिस के अनुसार छोटी-छोटी मात्रा में नशा छिपाकर रखने का मकसद स्थानीय स्तर पर चिट्टा बेचने और एनडीपीएस एक्ट के तहत गिरफ्तारी से बचने का प्रयास था।
बैकवर्ड लिंकज की जांच के बाद पुलिस ने नेटवर्क के मुख्य सप्लायर और ऑपरेटर सन्नी सिंह को अंबाला से गिरफ्तार किया। जांच में उसके खिलाफ हरियाणा, पंजाब और हिमाचल प्रदेश में चिट्टे से जुड़े कुल सात मामले सामने आए हैं। इनमें पंचकूला का एक, अबोहर और फाजिल्का के दो, फाजिल्का सिटी का एक तथा ठियोग के दो और जुब्बल का एक मामला शामिल है। पंचकूला के सेक्टर-20 थाना में दर्ज एक एनडीपीएस मामले में उसके कब्जे से 304 ग्राम चिट्टा बरामद होने की बात भी सामने आई है।
इसी मामले से जुड़े एक अन्य अभियोग में रविन्द्र कुमार की ओर से मोहित कुमार को चिट्टा सप्लाई किए जाने की बात सामने आई है। पुलिस मामले की आगे जांच कर रही है। तीसरे मामले में पुलिस थाना सदर शिमला ने लंबे समय से फरार चल रहे अमृतसर, पंजाब निवासी करण को गिरफ्तार किया है। यह मामला 25 दिसंबर 2025 को दर्ज अभियोग संख्या 110/2025 से संबंधित है। इस मामले में अंकुश उर्फ सुदामा के कब्जे से 6.360 ग्राम चिट्टा बरामद हुआ था। पूछताछ में उसने चिट्टा सागर से लेने की बात बताई थी। इसके बाद अंकुश, प्रवीण चौहान उर्फ बाबी और सागर को गिरफ्तार किया गया था।
मामले की वित्तीय जांच के दौरान पुलिस ने सागर के बैंक खातों की जांच की। बैंक लेन-देन के विश्लेषण में सामने आया कि सागर ने करण के एचडीएफसी बैंक खाते सहित अन्य खातों में करीब तीन लाख रुपये भेजे थे। इस वित्तीय लिंक के आधार पर पुलिस को करण की भूमिका चिट्टा तस्करी नेटवर्क के मुख्य सरगना के रूप में सामने आई। करण लगातार गिरफ्तारी से बच रहा था। पुलिस के लगातार प्रयासों के बाद उसे 25 अगस्त 2026 को गिरफ्तार कर लिया गया।
एसएसपी शिमला गौरव सिंह का कहना है कि नशा तस्करी के खिलाफ कार्रवाई अब केवल नशे की बरामदगी और आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है। पुलिस सप्लाई नेटवर्क, बैकवर्ड लिंक और पैसों के लेन-देन की भी जांच कर रही है, ताकि नशे के पूरे नेटवर्क की पहचान कर उसे जड़ से खत्म किया जा सके।