मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने मानसून सत्र के तीसरे दिन सदन में किया ऐलान
वरिष्ठ संवाददाता — शिमला
हिमाचल प्रदेश के दो लाख परिवारों की महिलाओं को दो अक्तूबर से अपना परिवार सुखी परिवार योजना के तहत 1500 रुपए मिलेंगे। साथ ही इन परिवारों को 300 यूनिट प्रतिमाह मुफ्त बिजली भी मिलेगी। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन सोमवार को सदन नियम 130 के तहत चल रही चर्चा के दौरान यह ऐलान किया है। सीएम सुक्खू ने कहा कि इन दो लाख परिवारों में 90 हजार ऐसे है, जो कभी बीपीएल में शामिल ही नहीं थे। प्रदेश के इन जरूरतमंद परिवारों के लिए सरकार इनके अलावा और भी कुछ करने जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में दिसंबर से मार्च माह तक प्रदेश के सभी मेडिकल कालेजों में स्टाफ नर्स की नियुक्तियां कर दी जाएंगी। प्रदेश में स्वास्थ्य संस्थानों में चिकित्सकों की कमी को दूर करने के लिए 300 डाक्टरों की भर्ती लोक सेवा आयोग के माध्यम से करने की रेकमंडेशन भी दे दी गई है। मुख्यमंत्री ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि सरकार ने पूरी पारदर्शिता और ईमानदारी के साथ काम किया है।
आगे भी जिंदगी में ऐसा ही होगा। प्रदेश के लिए रोबोटिक मशीनें दिल्ली एम्स के मुकाबले एक करोड़ कम रेट पर खरीदी गई हैं। उन्होंने विपक्ष को घेरते हुए कहा कि पूर्व सरकार के समय में प्रदेश के पीएचसी, सीएचसी, जोनल अस्पताल और मेडिकल कालेज 35 फीसदी आक्युपेंसी के साथ चल रहे थे। वहीं कांग्रेस सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की दिशा में लगातार कदम उठाए और यह दर 65 प्रतिशत तक पहुंच गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि टांडा मेडिकल कालेज में पिछले चालीस वर्षों से 270 पीजी की सीटें चल रही थी। उन्होंने कहा कि पीजी और एसआर के बिना मेडिकल कालेज नहीं चल सकते। कालेज में नाइट ड्यूटी के दौरान एसआर और पीजी वाले सेवाएं देते है। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार पीजी की सीटों को बढ़ाकर 320 करने की दिशा में सरकार आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार पांच लाख में भी डाक्टर रखने को तैयार है, लेकिन एसआर नहीं मिलते। उन्होंने कहा कि प्रदेश के आईजीएमसी और टांडा मेडिकल कालेज को प्रदेश के बेहतर संस्थान बनाने जा रहे है, जबकि अन्य मेडिकल कालेजों को इस तरह का बनाने में अभी वक्त लगेगा।
वंदे मातरम् विवाद पर फिर वाकआउट
शिमला। हिमाचल विधानसभा के मानसून सत्र में वंदे मातरम् को लेकर चल रहा विवाद सोमवार को एक बार फिर उठा और बात प्रश्नकाल में विपक्ष के वाकआउट तक चली गई। कार्यवाही शुरू होते ही इस मुद्द पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई। विधानसभा अध्यक्ष की ओर से इस मुद्दे पर चर्चा के लिए समय और स्पष्ट व्यवस्था नहीं मिलने से नाराज भाजपा विधायक दल ने सदन में नारेबाजी की और बाद में वाकआउट कर दिया।