लोक कलाकार डॉ. जोगेंद्र हाब्बी को संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार

राजगढ़। अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त लोक कलाकार डॉ. जोगेंद्र हाब्बी को लोक नृत्य के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से अलंकृत किया गया है। यह पुरस्कार महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के करकमलों से दिया गया। पद्मश्री से सम्मानित वरिष्ठ साहित्यकार एवं लोक संस्कृति के मर्मज्ञ विद्यानंद सरैक तथा उस्ताद बिस्मिल्लाह खां पुरस्कार से सम्मानित लोक कलाकार डागोपाल हाब्बी ने जारी संयुक्त बयान में कहा कि संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार की संगीत नाटक अकादमी द्वारा विभिन्न कला क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली देश की विभूतियों को महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के करकमलों से संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

विज्ञान भवन नई दिल्ली में आयोजित भव्य अलंकरण समारोह का शुभारंभ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। गौरतलब है कि डॉ. हाब्बी के नेतृत्व में लोक कलाकारों ने सिरमौरी नाटी सहित अनेक पारंपरिक विलुप्त प्राय: लोक विधाओं को पिछले तीस 35 वर्षों से रीमिक्स गीतों और इलेक्ट्रॉनिक साजों से दूर रहकर तथा लोकवाद्यों, लोक परिधानों, लोकगीतों और लोकनृत्यों की शुद्धता को बरकरार रखते हुए देश-विदेश में हज़ारों मंचों पर सिरमौरी हाटी संस्कृति की विशिष्ट पहचान बनाई है। सिरमौरी नाटी को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में इनके सफल प्रयासों को विभिन्न अंतरराष्ट्रीय रिकॉड्र्स में दर्ज उपलब्धियों के रूप में भी मान्यता मिली है। इनकी इसी दीर्घकालीन सांस्कृतिक साधना के परिणाम स्वरूप इन्हें विदेश के एक विश्वविद्यालय द्वारा डॉक्टरेट की मानद उपाधि से भी सम्मानित किया जा चुका है। पद्मश्री विद्यानंद सरैक एवं गोपाल हाब्बी तथा हिमाचल प्रदेश और बाहरी राज्यों के सैंकड़ों लोक कलाकारों ने इस गौरवपूर्ण ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए डॉ. हाब्बी को बधाई देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि यह सम्मान हिमाचल की लोक कलाओं के संरक्षण और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोडऩे के प्रयासों को नई ऊर्जा प्रदान करेगा।