हरियाली की पहली परीक्षा में हिमाचल पास, पिछले वर्ष रोपे 95 फीसदी पौधे जीवित

प्रदेश में पिछले वर्ष रोपे कए 38 लाख से अधिक पौधों का सर्वाइवल रेट 55 से 95 फीसदी, कांगड़ा में पौधारोपण की दर सबसे अधिक

वरिष्ठ संवाददाता — शिमला

हरियाली की पहली परीक्षा में हिमाचल में पौधारोपण के नतीजे बेहतर रहे है। पिछले वर्ष राज्यभर में रोपे गए पौधों की जीवित प्रतिशतता 55 से 95 प्रतिशत दर्ज की गई है। वन विभाग की ओर से जारी किए गए आंकड़ों में यह खुलासा हुआ है। लिहाजा प्रदेश में पौधारोपण के साथ इनकी रखवाली की मुहिम के पहले वर्ष के नतीजे बेहतरीन रहे हंै और इससे प्रदेश के हरित आवरण को बढ़ाने की कवायद को भी बढ़ा सहारा मिलेगा। जानकारी के अनुसार पिछले वर्ष वन विभाग ने राज्य भर में 4625.09 हेक्टेयर क्षेत्र में पौधा रोपण किया था। इस दौरान विभिन्न प्रजातियों के 38 लाख, 58 हजार, 223 पौधे रोपित किए गए थे। इनमें सबसे अधिक आठ लाख से अधिक पौधे मंडी जिला में ही वन विभाग ने लगाए थे। प्रदेश भर में हुए पौधारोपण के एक वर्ष के बाद इनके जीवित प्रतिशतता को लेकर उत्साहित करने वाले आंकड़े सामने आए है।

इसके तहत राज्य भर में रोपित किए गए 38 लाख से अधिक पौधों की जीवित प्रतिशतता 55 से 90 फीसदी तक दर्ज की गई है। वन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2025-26 में बिलासपुर जिला में 139.5 हेक्टेयर क्षेत्र में 81972 पौधे रोपित किए गए थे और आकलन के बाद इनकी जीवित प्रतिशतता 80 से 85 फीसदी के बीच रही है। जिला चंबा में 580.96 हेक्टेयर में लगाए गए 497756 पौधों का एक वर्ष के बाद स्वाईवल रेट 60 से 95 प्रतिशत आंका गया है। हमीरपुर में 79.5 हेक्टेयर पर वन विभाग ने 57970 पौधे रोपित किए और यहां पर एक वर्ष के बाद सफलता दर 75 से 90 प्रतिशत रही है। इसी तरह कांगड़ा जिला में 740.75 हेक्टेयर भूमि पर लगाए गए 566181 पौधों की जीवित प्रतिशतता 80 से 90 फीसदी रही है। विभाग के आंकड़ों के अनुसार कुल्लू जिला में रोपित किए 503705 पौधों का स्र्वाइवल रेट 60 से 90 और मंडी जिला में 855.68 हेक्टेयर क्षेत्र में हुए पौधा रोपण की सफलता दर 70 से 95 प्रतिशत तक दर्ज की गई है। सिरमौर में रोपित किए गए पौधों का सर्वाइवल रेट 75 से 95, शिमला में 60 से 80, सोलन 70 से 95 और लाहौल-स्पीति में 65 से 80 प्रतिशत आंकी गई है। इसके अलावा किन्नौर जिला में 38 हेक्टेयर भूमि पर लगाए गए 65500 पौधों की सफलता दर 55 से 90, जबकि ऊना में 69.6 हेक्टेयर पर रोपित किए 38120 विभिन्न प्रजातियों का सर्वाइवल रेट 70 से 80 प्रतिशत दर्ज किया गया है।

पौधों की देखभाल बहुत जरूरी

वन विभाग का कहना है कि पौधा रोपण के साथ-साथ लगाए गए पौधों की देखभाल और संरक्षण का पांच वर्ष तक पूरी देखभाल की जाती है। पौधों को आग से बचाने के लिए विभाग फायर वाचरों की तैनाती भी की जाती हैं, ताकि उनकी जीवित रहने की दर अधिकतम सुनिश्चित की जा सकें।