मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू बोले; निगम को आत्मनिर्भर बनाना लक्ष्य, बसों की संख्या पर तैनाती करने पर विचार
दिव्य हिमाचल टीम-शिमला, मंडी
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने हिमाचल प्रदेश में स्वच्छ, हरित एवं पर्यावरण-अनुकूल सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण पहल के तहत सोमवार को वर्चुअल माध्यम से मंडी जिला के लिए हिमाचल पथ परिवहन निगम की 25 नई टाइप-1 इलेक्ट्रिक बस सेवाओं का मंडी के पड्डल मैदान से शुभारंभ किया। इस दौरान मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने एचआरटीसी के इलेक्ट्रिक बस बेड़े के विस्तार के लिए नई 297 टाइप-1 इलेक्ट्रिक बसों की खरीद की है। नई इलेक्ट्रिक बसें वर्तमान में शिमला, नाहन, नालागढ़, ऊना, हरोली, बिलासपुर, देहरा, हमीरपुर, पालमपुर, धर्मशाला तथा नगरोटा में संचालित की जा रही हैं। इसके अतिरिक्त कुल्लू, मंडी और सुंदरनगर में भी आवश्यक चार्जिंग अवसंरचना विकसित की जा चुकी है तथा इन क्षेत्रों में नई इलेक्ट्रिक बस सेवाओं का संचालन भी आज से शुरू किया गया है।
श्री सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार एचआरटीसी को बसें खरीद कर देती है और हर साल अनुदान के रूप में 840 करोड़ सरकार की ओर से दिए जा रहे हैं। इतनी ही कमाई एचआरटीसी अपने संसाधनोंं से भी कर रही है। सीएम ने कहा कि एचआरटीसी में ड्राइवर और कंडक्टर की जरूरत है, अफसरों की नहीं। सरकार एचआरटीसी को अच्छा और आत्मनिर्भर बनाना चाहती है। निगम में रीजन के हिसाब से आरएम रख दिए हैं, जबकि बसों की संख्या के आधार पर आरएम होना चाहिए। एचआरटीसी में अधिकारियों की फ्लीट स्ट्रेंथ को 56 से कम करके 30 किया जाएगा। सभी गाडिय़ों को इलेक्ट्रिक करने की दिशा में भी काम किया जाएगा। इस संबंध में सचिव को निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले पांच साल में एचआरटीसी प्रॉफिट कमाएगी। इस अवसर पर अतिरिक्त मुख्य सचिव ओंकार चंद शर्मा, प्रबंध निदेशक एचआरटीसी शिवम प्रताप सिंह उपस्थित थे।
एक बार चार्ज करने पर 270 किलोमीटर दौड़ रही बस
मुख्यमंत्री ने कहा कि टाइप-1 इलेक्ट्रिक बसों की निर्धारित ड्राइविंग रेंज 80 प्रतिशत स्टेट ऑफ चार्ज पर लगभग 180 किलोमीटर है। शिमला चंडीगढ़ मार्ग पर इलेक्ट्रिक बस द्वारा एक बार चार्ज करने पर लगभग 270 किलोमीटर की दूरी सफलतापूर्वक तय की जा रही है। इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से ऊर्जा लागत में लगभग 12-13 रुपए प्रति किलोमीटर की बचत हो रही है।
युवाओं को डीजल बस पर 30 इलेक्ट्रिक बस पर 50 प्रतिशत छूट
सरकार राज्य के युवाओं को भी बसें डालने के लिए प्रोत्साहित करने जा रही है। डीजल बस खरीदने पर 30 प्रतिशत और इलेक्ट्रिक बस खरीदने पर 50 प्रतिशत सबसिडी दी जाएगी। इलेक्ट्रिक बस खरीदने वाले को सरकार पांच साल तक हर महीने 80 हजार रुपए देगी, जबकि डीजल बस खरीदने वाले को 50 हजार रुपए हर महीने दिए जाएंगे। इन बसों में छात्रों को फ्री यात्रा की सुविधा मिलेगी और महिलाओं को 50 प्रतिशत फ्री यात्रा की सुविधा मिलेगी। कॉलेज पास छात्रों के लिए प्रतिदिन के हिसाब से पांच रुपए में पास बनाया जाएगा। सवारियों से होने वाली कमाई बस संचालक की होगी, जबकि बीच का वायबिलिटी गैप फंडिंग सरकार देगी।
मुख्यमंत्री बोले; 1000 इलेक्ट्रिक, 200 हाईड्रोजन बसें खरीदेगी सरकार
सरकार का लक्ष्य अगले पांच साल में एचआरटीसी को आत्मनिर्भर बनाने का है। सरकार आने वाले समय में 1000 ई-बसें और 200 हाईड्रोजन बसें खरीदेगी। एचआरटीसी को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार 1000 बसें खरीदकर एचआरटीसी देने की फाइल को सरकार ने मंजूरी दे दी है। इलेक्ट्रिक बसों के टेंडर में 12 साल की मेंटेनेंस की व्यवस्था की गई है। बस खराब होने पर पेनल्टी का भी प्रावधान है। इलेक्ट्रिक बसों से अच्छी माइलेज मिल रही है।
ये अधिकारी-पदाधिकारी रहे मौजूद
अतिरिक्त मुख्य सचिव ओंकार चंद शर्मा, प्रबंध निदेशक एचआरटीसी शिवम प्रताप सिंह मुख्यमंत्री के साथ शिमला में उपस्थित थे। मंडी में वर्चुअल माध्यम से एचआरटीसी के उपाध्यक्ष अजय वर्मा, एपीएमसी अध्यक्ष संजीव गुलेरिया, जल प्रबंधन बोर्ड के उपाध्यक्ष शशि शर्मा, जिला कांग्रेस कमेटी मंडी अध्यक्ष चंपा ठाकुर सहित अन्य गणमान्य उपस्थित थे।