बैतूल। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की छतों पर सोलर पैनल लगाकर बिजली बिल कम करने की उम्मीद कर रहे उपभोक्ताओं को नेट मीटरिंग की मौजूदा व्यवस्था में अपेक्षित बचत नहीं मिल पा रही है। दिन में सोलर पैनल से उत्पादित अतिरिक्त बिजली वितरण कंपनी को करीब 2.57 रुपये प्रति यूनिट की दर से देने के बाद यही उपभोक्ता रात में ग्रिड से मिलने वाली बिजली के लिए आठ से 10 रुपये प्रति यूनिट तक भुगतान कर रहे हैं। इसके अलावा फिक्स्ड चार्ज भी लिया जा रहा है।
प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत तीन किलोवाट तक का सोलर सिस्टम लगाने वाले उपभोक्ताओं को प्रतिमाह 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। योजना में सोलर सिस्टम लगाने पर सब्सिडी सीधे बैंक खाते में दिए जाने तथा कम ब्याज पर ऋण की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। इसके चलते जिले में बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी छतों पर सोलर पैनल लगवाए हैं।
सोलर पैनल से दिन के समय उत्पादित बिजली पहले उपभोक्ता के घर में इस्तेमाल होती है और अतिरिक्त बिजली नेट मीटर के माध्यम से विद्युत ग्रिड में चली जाती है। इस बिजली का हिसाब मीटर में दर्ज होता है और वितरण कंपनी नियामक आयोग द्वारा निर्धारित दर के अनुसार उसका भुगतान करती है। रात में सोलर पैनल से उत्पादन नहीं होने पर उपभोक्ताओं को ग्रिड से बिजली लेनी पड़ती है, जिसका बिल लागू घरेलू टैरिफ के आधार पर बनता है।
मध्यप्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी, बैतूल के महाप्रबंधक बीएस बघेल के अनुसार विद्युत नियामक आयोग द्वारा बिजली की दरें मांग और आपूर्ति सहित विभिन्न परिस्थितियों को ध्यान में रखकर निर्धारित की जाती हैं। दिन में उपभोक्ताओं से मिलने वाली अतिरिक्त बिजली को अन्य उपभोक्ताओं तक पहुंचाने में ट्रांसमिशन, वितरण व्यवस्था, आधारभूत ढांचे के रखरखाव और कर्मचारियों से जुड़े खर्च भी शामिल होते हैं।
जानकारों के अनुसार सोलर पैनल का अधिक लाभ लेने के लिए उपभोक्ताओं को दिन के समय बिजली की खपत बढ़ानी चाहिए। वाशिंग मशीन, पानी की मोटर, मिक्सी, एसी, कूलर और इलेक्ट्रिक प्रेस जैसे उपकरणों का उपयोग दिन में करने से सोलर से उत्पादित बिजली का सीधे घर में उपयोग किया जा सकता है और ग्रिड को भेजी जाने वाली अतिरिक्त बिजली कम की जा सकती है।
रात की जरूरतों के लिए बैटरी और इन्वर्टर का उपयोग भी एक विकल्प हो सकता है। दिन में सोलर बिजली से बैटरी चार्ज कर रात में उसका इस्तेमाल करने से ग्रिड से बिजली लेने की जरूरत कम की जा सकती है। जानकारों के मुताबिक जिन घरों में दिन के समय बिजली की खपत अधिक होती है, उनके लिए रूफटॉप सोलर अधिक फायदेमंद हो सकता है, जबकि दिन में अतिरिक्त बिजली ग्रिड को भेजकर रात में ग्रिड पर निर्भर रहने वाले उपभोक्ताओं को अपेक्षित बचत नहीं मिल पा रही है।