यह व्रत महिलाओं के लिए बेहद खास होता है, इसे कुंवारी कन्याओं द्वारा भी मनाया जाता है। इस दौरान जहां सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए ये व्रत रखती हैं, तो वहीं कुंवारी कन्याएं अच्छा वर पाने के लिए इसे रखती हैं…
हिंदू धर्म में सावन माह के त्योहार बेहद ही पवित्र और खास माने जाते है यह माह पूर्णत: भगवान शिव जी को समर्पित होता है। इस माह में आने वाला हर त्योहार बहुत महत्त्वपूर्ण माना जाता है। वहीं इसी मास की समाप्ति के बाद एक प्रमुख त्योहार दस्तक देने जा रहा है और वह है कजरी तीज व्रत। यह व्रत महिलाओं के लिए बेहद खास होता है, इसे कुंवारी कन्याओं द्वारा भी मनाया जाता है। इस दौरान जहां सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए ये व्रत रखती हैं, तो वहीं कुंवारी कन्याएं अच्छा वर पाने के लिए इसे रखती हैं। ये खास पर्व हिंदी भाषी राज्यों राजस्थान, बिहार और मध्यप्रदेश समेत अन्य राज्यों में भी मनाया जाता है। हर साल कजरी तीज भाद्र मास में कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। इस वर्ष यह तिथि 31 अगस्त को पड़ रही है। चलिए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से। प्रत्येक वर्ष भाद्रपद मास में कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को कजरी तीज का व्रत मनाया जाता है। इसे सामान्यतौर पर कजली तीज, बूढ़ी तीज और सातूड़ी तीज के नाम से भी जाना जाता है।
कजरी तीज को कजली तीज या बड़ी तीज भी कहा जाता है। भाद्रपद के शुक्लपक्ष की तीज के दिन, जिसे कजली तीज कहा जाता है, गाए जाने वाले गीत को कजली अथवा कजरी कहा गया है। इस व्रत को भी सुहागिन महिलाएं अखंड सौभाग्य की कामना करने के लिए रखती हैं। इसके अलावा कुंवारी कन्याएं भी अपना मनपसंद वर पाने की इच्छा के साथ इस दिन व्रत और पूजा करती हैं। कजरी तीज पर सुहागिन महिलाएं कजरी खेलने अपने मायके जाती हैं। रात भर महिलाएं जागती हैं साथ ही कजरी खेलती और खूब झूमती नाचती हैं। इसके अलावा इस अवसर पर घर में झूला डाला जाता है, जिस पर बैठकर महिलाएं अपनी खुशी जाहिर करती हैं। गेहूं, सत्तू, चावल, जौ और चना यह सब घी में मिलाकर तरह-तरह के पकवान बनाए जाते हैं। यही पकवान खाकर महिलाएं अपना व्रत खोलती हैं। खीर, पूरी, हलवा आदि इस दिन बनने वाले मुख्य पकवानो में से एक हैं। कजरी तीज पर गउओं की भी पूजा करने की विशेष परंपरा है। शाम को व्रत तोडऩे से पहले महिलाएं 7 रोटियों पर चना और गुड़ रखकर गाय माता को खिलाती हैं।