आस्था

सृष्टि के रचियता ब्रह्मा की यज्ञस्थली और ऋषियों की तपस्या स्थली तीर्थगुरु पुष्कर नाग पहाड़ के बीच बसा हुआ है। यहां प्रति वर्ष विश्वविख्यात कार्तिक मेला लगता है। सर्वधर्म समभाव की नगरी अजमेर से उत्तर-पश्चिम में करीब 11 किलोमीटर दूर पुष्कर में अगस्त्य, वामदेव, जमदग्नि, भर्तृहरि इत्यादि ऋषियों के तपस्या स्थल के रूप में उनकी

राजस्थान में 800 साल पुराने शीतला माता मंदिर में चामत्कारिक भूमिगत घड़े पर रखा पत्थर साल में दो बार ही हटाया जाता है। साल में दो बार जब ये घड़ा निकलता है, तो यहां मेले का आयोजन भी होता है। माना जाता है कि इस चामत्कारिक घड़े में चाहे जितना पानी डालों ये नहीं भरता,

हिमाचल को देवभूमि के नाम से जाना जाता है। यहां के लोगों में शिव के प्रति गहन आस्था का परिणाम है कि यहां का हर स्थान शिव की किसी न किसी कथा से जुड़ा हुआ है। आज आपको ले चलते हैं शिव के एक ऐसे ही धाम, जो जिला चंबा के भट्टियात में कुंजरोटी स्थान

कालाष्टमी अथवा काला अष्टमी का हिंदू धर्म में बड़ा ही महत्त्वपूर्ण स्थान है। प्रत्येक माह में कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दौरान इसे मनाया जाता है। कालभैरव के भक्त वर्ष की सभी कालाष्टमी के दिन उनकी पूजा और उनके लिए उपवास करते हैं। सबसे मुख्य कालाष्टमी, जिसे कालभैरव जयंती के नाम से जाना जाता

ब्रोकली में अन्य सब्जियों की तुलना में बहुत पौष्टिक और स्वास्थवद्र्धक गुण होते हैं। ब्रोकली खाने में बहुत ही स्वादिष्ट होती है। इसे आप सलाद व सब्जी के रूप में भी खा सकते हैं। यही नहीं ब्रोकली का सूप भी सेहत के लिए बहुत ही फायदेमंद है। बोकली में अधिक मात्रा में क्रोमियम, विटामिन, आयरन,

माता-पिता हमेशा अपने बच्चों के खान-पान को लेकर चिंतित रहते हैं, क्योंकि अच्छे खान-पान की मदद से ही उनका शारीरिक और मानसिक विकास होता है। साथ ही रोगों से लडऩे में मदद मिलती है। सर्दी के मौसम में माता-पिता अपने बच्चों को ऐसी चीजें देना चाहते हंै, जो टेस्टी और हेल्दी हों। साथ ही सर्दियों

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं सर्दियों में अकसर लोगों को निमोनिया हो जाता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि श्वसन संबंधी वायरल संक्रमण जैसे कि फ्लू आदि सर्दियों में अधिक आम हैं। ये निमोनिया के जोखिम को बढ़ा देते हैं। मुख्य रूप से बैक्टीरिया, वायरस और फंगस संक्रमण निमोनिया का कारण बनते हैं… पूरा देश इस समय

वास्तव में परोपकार ही मनुष्य का सबसे बड़ा धर्म है जिसका अर्थ है दूसरों की भलाई चाहे वह किसी भी रूप में हो। यूं तो भारत की भूमि पर अनेकों परोपकारी महापुरुषों के उदाहरण पौराणिक काल से ही मिलते रहे हैं, परंतु ऋषि दधीचि के बलिदान एवं त्याग को कौन भूल सकता है। ऋषि दधीचि

गतांक से आगे… दुराग्रहपूर्ण सुधारों का परिणाम लक्ष्य हानि संसार का इतिहास बताता है कि जहां कहीं ऐसे दुराग्रहपूर्ण सुधारों का प्रयास हुआ, उनका एकमेव परिणाम उनके अपने लक्ष्य की हानि में हुआ। अमरीका में दास प्रथा को समाप्त करने के लिए जो आंदोलन हुआ, न्याय और स्वतंत्रता की स्थापना के हेतु उससे भारी आंदोलन