जयंती माता मंदिर

कांगड़ा के साथ लगती पहाड़ी पर स्थित जयंती माता का मंदिर काफी प्राचीन है। जयंती माता मंदिर में हर वर्ष पंचभीष्म मेले लगते हैं। ये मेले हर साल कार्तिक मास की एकादशी से शुरू होते हैं। इस दौरान तुलसी को गमले में लगाकर उसे घर के भीतर रखा जाता है…

ध्यान में मग्न

स्वामी विवेकानंद गतांक से आगे... बहुत अनुरोध करने पर भी स्वामी जी ने उनसे मित्रता के स्मृति चिन्ह के रूप में एक छोटी सी चीज लेकर शेष सबको अस्वीकार कर दिया। दीवान बहादुर ने स्वामी जी को छोटी सी गठरी में छोटा सा एक बंडल रख देने के लिए…

नींद में जागरूकता

सद्गुरु जग्गी वासुदेव क्या यह संभव है कि हम नींद में भी जागरूक और होशपूर्ण रहें? शून्य एवं सुषुप्ति की बात करते हुए सद्गुरु समझा रहे हैं कि ऐसी अवस्था का अनुभव लेने के लिए क्या करना पड़ता है? आप जब सोते हैं तब बस सोईए, कुछ और करने की…

व्रत एवं त्योहार  

10 नवंबर रविवार, कार्तिक, शुक्लपक्ष, त्रयोदशी, पंचक समाप्त 11 नवंबर सोमवार, कार्तिक, शुक्लपक्ष, चतुर्दशी 12 नवंबर मंगलवार, कार्तिक, शुक्लपक्ष, पूर्णिमा, गुरु नानक जयंती 13 नवंबर बुधवार, कार्तिक, कृष्णपक्ष, प्रथमा 14 नवंबर…

जेन कहानियां

अनमोल सीख सोयेन एक अत्यंत प्रतिष्ठित जेन गुरु थे। उनके कुछ शिष्य गर्मी की दोपहरी में सो जाया करते थे। सोयेन उनसे कुछ नहीं कहते, मगर स्वयं सोयेन को एक दिन में नींद लेते किसी ने नहीं देखा था। इसके पीछे उनके गुरु की एक अनमोल सीख थी। सोयेन जब…

सद्गुरु का प्रसाद है श्रद्धा

बाबा हरदेव उदाहरणतः एक व्यक्ति जब कहता है कि वह ईश्वर पर विश्वास करता है, तो यह बात जोर लगा कर कहता है कि वह विश्वास करता है। वह जानता है कि उतना ही ताकतवर अविश्वास इसके भीतर बैठा हुआ है जितना वह विश्वास पर ताकत लगा रहा है। अविश्वास न हो…

तिब्बत में छिपा है तंत्र ज्ञान

डोलमा राह में बतलाता चल रहा था। ‘उनका स्पष्ट आदेश है। मुगु की तेरहवीं तिथि तक हम सब गोम्फा छोड़कर सामभू चले जाएं।’ मुगु तिब्बतियों के एक माह का नाम है। ‘अब मुगु में केवल दो माह, दस दिन शेष हैं। आप आ गए, बहुत है, वरना फिर न मिल पाते।’ ‘सामभू…

परमात्मा से पुकार

श्रीराम शर्मा आत्मा ने परमात्मा से याचना की ‘असतो मा समय, तमसो मा ज्योतिर्गमय, मृत्योर्मा अमृतंगमय’। यह तीनों ही पुकारें ऐसी हैं, जिन्हें द्रौपदी और गज की पुकार के समतुल्य समझा जा सकता है। निर्वस्त्र होते समय द्रौपदी ने अपने को असहाय पाकर…

व्याकुलता से रहित मन

श्रीश्री रवि शंकर ध्यान गहराई से विश्राम करना है। यदि आप समस्या पर ध्यान दे रहे हैं, तो आप विश्राम नहीं कर रहे हैं। तो हम क्या करें, हम बस जाने दें, यह लगभग नींद की तरह है पर नींद नहीं। सुदर्शन क्रिया के बाद यही होता है, जब आप लेटे होते…

ड्ढकुंडलिनी साधनाएं : कुंडलिनी क्या है

यस्य मध्ये दकारो वा कवचं मूर्ध्नि दृश्यते। त्रिविधं दृश्यते चास्त्रं तिरस्कृत उदाहृतः।। 41।। जिसके मध्य में द, आदि में हुं और अंत में फट् हो, उस मंत्र को तिरस्कृत कहते हैं।। 41।। हद्वयं हृदये शीर्षे वषट् वौषट् च मध्यतः। स एव भेदितो मंत्र,…

विवाद से परे है ईश्वर का अस्तित्व

आस्तिकता के इस मूलभूत आधार को जिन्होंने अपनी जीवन शैली बनाया, उनके जीवन व क्रियाकलापों को परमार्थनिष्ठा का आदर्श कहा जा सकता है। परमार्थ का अर्थ ही यह है कि जिससे सर्वश्रेष्ठ प्रयोजन की पूर्ति होती हो। इसी कारण परमार्थ परायणता को आस्तिकता…

किसी अजूबे से कम नहीं हैं महाभारत के पात्र

विदुर (अर्थ कुशल, बुद्धिमान अथवा मनीषी) हिंदू ग्रंथ महाभारत के केंद्रीय पात्रों में से एक व हस्तिनापुर के प्रधानमंत्री, कौरवों और पांडवों के काका और धृतराष्ट्र एवं पाण्डु के भाई थे। उनका जन्म एक दासी के गर्भ से हुआ था। विदुर को धर्मराज का…

ईर्ष्या और घृणा

ओशो हमारा श्वास लेना बिलकुल प्रेम करने की तरह होना चाहिए। जो व्यक्ति जितना प्रेममय होगा उसकी श्वसन क्रिया भी उतनी ही मद्धिम होगी। जो ईर्ष्या और घृणा से भरा होगा उसकी श्वसन गति उसी तरह व्यक्त होगी। क्या कभी आपने कभी किसी बच्चे को गहरी नींद…

नित्यानुष्ठान न्यासों के जरिए होता है

वैसे तो प्रत्येक न्यास-विधान के अंत में उसका फल लिखा रहता है, तथापि यह विशेष स्मरणीय है कि जिस प्रकार हम किसी मंत्र का पुरश्चरण या विशेष अनुष्ठान करते हैं, उसी प्रकार केवल न्यासों से भी ये विधियां की जा सकती हैं। इस दृष्टि से नित्यानुष्ठान…

पढ़ाई के लिए इंग्लैंड जाना चाहती थीं शहनाज

सौंदर्य के क्षेत्र में शहनाज हुसैन एक बड़ी शख्सियत हैं। सौंदर्य के भीतर उनके जीवन संघर्ष की एक लंबी गाथा है। हर किसी के लिए प्रेरणा का काम करने वाला उनका जीवन-वृत्त वास्तव में खुद को संवारने की यात्रा सरीखा भी है। शहनाज हुसैन की बेटी नीलोफर…