
वैदिक काल से लेकर महात्मा गांधी युग तक भारतीय चिंतन की हर धारा में पर्यावरण के प्रति गहरी आत्मीयता और स्पष्ट दृष्टि मिलती है। भारतीय सनातन परंपरा को विश्व की प्राचीनतम जीवन पद्धति माना जाता है। इस परंपरा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें प्रकृति को कभी भोग की वस्तु नहीं माना गया, बल्कि उसे ऊर्जा का स्रोत और जीवन का आधार माना गया है...
ज्येष्ठ पूर्णिमा का हिंदू धर्म में बड़ा ही महत्त्व बताया गया है। इस दिन गंगा में स्नान का भी महत्त्व है। गंगा स्नान के बाद पूजा-अर्चना तथा दान-दक्षिणा आदि से व्यक्ति के मनोरथ पूर्ण होते हैं। ज्येष्ठ माह में शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा के दिन स्त्रियां वट वृक्ष की पूजा करती हैं...
हिमाचल प्रदेश के मंडी जनपद में यूं तो अनेकों मंदिर व पर्यटन स्थल हैं, लेकिन धार्मिक दृष्टि से मंडी को अगर मंदिरों की नगरी कहा जाए, तो शायद कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी और इसीलिए यह छोटी काशी के नाम से भी विश्वविख्यात है। मंडी नगर धर्म, संस्कृति व कला की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध है। यही नहीं, पुराणों व उपनिषदों में इसे जहां छोटी काशी की संज्ञा दी गई है, वहीं महर्षि मांडव की नगरी आदि नामों से भी यह प्रचलित है, क्योंकि काशी की तर्ज पर मंडी के हर गली में मंदिर हैं। इसी कड़ी में मंडी जनपद के उपमंडल करसोग में अवस्थित मां शिकारी देवी मंदिर भक्तजनों की श्रद्धा, आस्था व विश्वास का अटूट केंद्र बिंदु है। करसोग में वै
भारत में ऐसे कई स्थान हैं जहां आस्था, रहस्य और लोककथाएं आज भी लोगों को हैरान कर देती हैं। बिहार का राजगीर भी उन्हीं खास जगहों में गिना जाता है। यहां मलमास शुरू होते ही एक ऐसी अनोखी घटना देखने को मिलती है, जिसे सुनकर लोग चौंक जाते हैं। कहा जाता है कि पूरे एक महीने तक राजगीर में एक भी कौआ दिखाई नहीं देता। यह सवाल आज भी लोगों के मन में बना हुआ है। स्थानीय लोग इसे सतयुग से जुड़ी कथा मानते हैं। मलमास मेले का आगाज हो चुका है। नालंदा के राजगीर में यह मेला एक महीने तक चलेगा। जिला प्रशासन की ओर से मेले को लेकर खास इंतजाम किए गए हैं। जगह-जगह पर श्रद्धालुओं के रुकने
स्वामी विवेकानंद गतांक से आगे… इतना होने पर भी मैं आपसे कहता हूं कि ईश्वर है, यह ध्रुव सत्य है, हंसी की बात नहीं। वही हमारे जीवन का नियमन कर रहा है और यद्यपि मैं जानता हूं कि जातिसुलभ स्वभाव दोष के कारण ही गुलाम लोग अपनी भलाई करने वालों को ही काट खाने दौड़ते
जे.पी. शर्मा, मनोवैज्ञानिक नीलकंठ, मेन बाजार ऊना मो. 9816168952 आज के दौर में जीवनशैली इस कद्र जटिल हो गई है कि मनुष्य जीवन की प्रकृति प्रदत्त सहजता, संयम, सुगमता, व्यवहार कुशलता, अपनत्व, समन्वय, सहिष्णुता, संवेदनशीलता, सौहार्द, सान्निध्य, मनोसंतुलन सभी कुछ नकारात्मकताग्रस्त हो गया है। बाल्यकाल की मासूम चंचलता, युवावर्ग का जोशो जुनून, वरिष्ठजनों का धैर्य,
जब बच्चे का खाने, वजन या शरीर की बनावट के साथ रिश्ता अस्वस्थ हो जाता है, तो उसे ईटिंग डिसऑर्डर कहा जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, ईटिंग डिसऑर्डर किसी एक वजह से नहीं होता, बल्कि कई कारण मिलकर इसे जन्म देते हैं। बच्चों में कैसे विकसित होती है ये समस्या, क्या होते हैं कारण और
बाबा हरदेव गतांक से आगे… सद्गुरु की कृपा से मन को ऐसी मति मिलती है कि पल-पल, छिन-छिन हरि का सुमिरन होता है। परमात्मा चेते आया तो संसार का चिंतन समाप्त हो जाता है। सद्गुरु ने जो नाम धन दिया है इससे बड़ा संसार में कोई धन नहीं है। संसार में लोग बड़े-बड़े महल बनाते
स्वामी विवेकानंद गतांक से आगे… इतना होने पर भी मैं आपसे कहता हूं कि ईश्वर है, यह ध्रुव सत्य है, हंसी की बात नहीं। वही हमारे जीवन का नियमन कर रहा है और यद्यपि मैं जानता हूं कि जातिसुलभ स्वभाव दोष के कारण ही गुलाम लोग अपनी भलाई करने वालों को ही काट खाने दौड़ते