आस्था

शनि अमावस्या के दिन भगवान सूर्य देव के पुत्र शनि देव की आराधना करने से समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। किसी माह के जिस शनिवार को अमावस्या पड़ती है, उसी दिन ‘शनि अमावस्या’ मनाई जानी है। यह पितृकार्येषु अमावस्या और शनिश्चरी अमावस्या के रूप में भी जानी जाती है। कालसर्प योग, ढैय्या तथा साढ़ेसाती सहित

-गतांक से आगे… स्वयम्भू-पुष्प-प्राणा स्वयम्भू-कुसुमोत्थिता। स्वयम्भू-कुसुम-स्नाता स्वयम्भूृ-पुष्प-तर्पिता।। 126।। स्वयम्भू-पुष्प-घटिता स्वयम्भू-पुष्प-धारिणी। स्वयम्भू-पुष्प-तिलका स्वयम्भू-पुष्प-चर्चिता।। 127।। स्वयम्भू-पुष्प-निरता स्वयम्भू-कुसुम-ग्रहा। स्वयम्भू-पुष्प-यज्ञांगा स्वयम्भू-कुसुमात्मिका।। 128।। स्वयम्भू-पुष्प-निचिता स्वयम्भू-कुसुम-प्रिया। स्वयम्भू-कुसुमादान-लालसोन्मत्त-मानसा।। 129।। स्वयम्भू-कुसुमानन्द-लहरी-स्निग्ध देहिनी। स्वयम्भू-कुसुमाधारा स्वयम्भू-कुसुमा-कला।। 130।।   -क्रमशः

हिंदू धर्म में हर साल होने वाली जगन्नाथ रथ यात्रा को काफी हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। आषाढ़ मास की द्वितीय तिथि को ये रथ यात्रा शुरू होती है और शुक्ल पक्ष के 11वें दिन भगवान की वापसी के साथ इसका समापन होता है। इस रथ यात्रा में हजारों की संख्या में भक्तगण शामिल

गतांक से आगे… परंतु सबसे बड़ा विद्वान और चारों वेदों में ज्ञान, कर्म एवं उपासना रूप विद्या दान करने वाला स्वयं, हमारा सच्चा पितर अर्थात रक्षक, वह निराकार परमेश्वर ही है। ऋग्वेद मंत्र 9/73/2 में कहा है कि जो (पवित्रवंत:) पुण्यवान साधक( प्रत्न: पिता) अनादि परमेश्वर (अभिक्षति) रक्षा करता है और (मह:समुद्रम) इस महान संसार

अंबुवाची मेला कामाख्या मंदिर का सबसे बड़ा उत्सव माना जाता है। यहां देवी की पूजा योनि रूप में होती है। माना जाता है अंबुवाची उत्सव के दौरान माता रजस्वला होती हैं, हर साल 22 से 25 जून तक इसके लिए मंदिर बंद रखा जाता है। 26 जून को शुद्धिकरण के बाद मंदिर दर्शन के लिए

हिमाचल प्रदेश को देवभूमि के नाम से जाना जाता है। हिमाचल प्रदेश में देवी-देवताओं के बहुत से मंदिर हैं और हर मंदिर का अपना अलग महत्त्व है। सोलन का नाम मां शूलिनी देवी के नाम पर पड़ा। माता शूलिनी सोलन की अधिष्ठात्री देवी हैं। माता शूलिनी देवी का मंदिर सोलन बाजार में स्थित है। यहा

सद्गुरु जग्गी वासुदेव आध्यात्मिक प्रक्रिया तभी शुरू होती है जब आप मृत्यु का सामना करते हैं या तो खुद की या फिर किसी ऐसे व्यक्ति की जो आपको प्रिय है और जिसके बिना जीने की बात आप नहीं सोच सकते। जब मृत्यु आ रही हो या हो गई हो, तब ही अधिकतर लोगों के मन

गतांक से आगे… हम अभ्यस्त हो गए हैं। क्या यह सच नहीं है? हम एक साथ मिल नहीं सकते, हम एक दूसरे से प्रेम नहीं करते, हम बड़े स्वार्थी हैं, हम तीन मनुष्य भी एक दूसरे से घृणा या ईष्र्या किए बिना एकत्र नहीं रह सकते। हाय सदियों की घोर ईष्र्या द्वारा हम लबालब भरे

* रात को एक गिलास पानी में दो चम्मच मेथी के बीज भिगोएं और सुबह इस पानी को छान कर पी लें। इससे बेली फैट कम होता है। * बहती नाक से परेशान हों, तो यूकेलिप्टस (सफेदा) का तेल रूमाल में डालकर सूंघने से आराम मिलेगा। * आलू का छिलका त्वचा पर ब्लीच की तरह