
महाभारत के अनुसार युधिष्ठिर को धर्मराज कहा जाता है। वे सत्य, संयम, क्षमा और न्यायप्रियता जैसे महान गुणों के प्रतीक थे। उन्हें उनके सदाचार और धर्म के प्रति अटूट निष्ठा के लिए जाना जाता है।
मणिमहेश झील हिमाचल प्रदेश में प्रमुख तीर्थ स्थानों में से एक है। मणिमहेश यात्रा प्रत्येक वर्ष श्रीकृष्ण जन्माष्टमी से राधा अष्टमी तक चलती है। मणिमहेश यात्रा इस वर्ष 4 सितंबर से प्रारंभ होकर 19 सितंबर तक चलेगी।
भारत की सनातन संस्कृति केवल पूजा-पद्धतियों और धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है। इसकी मूल चेतना ज्ञान, तप, साधना, आत्मसंयम, सत्य और लोकमंगल की उस महान परंपरा में निहित है...
यह व्रत महिलाओं के लिए बेहद खास होता है, इसे कुंवारी कन्याओं द्वारा भी मनाया जाता है। इस दौरान जहां सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए ये व्रत रखती हैं, तो वहीं कुंवारी कन्याएं अच्छा वर पाने के लिए इसे रखती हैं...
स्वामी रामस्वरूप अथर्ववेद मंत्र 4/11/7 ने स्वयं ‘रूपेण इंद्र:’ अर्थात ईश्वर के समान कह दिया है। परंतु जो केवल पढ़, सुन, रट कर ही समझता है वह आध्यात्मिक पथ पर है, तो वह अविद्याग्रस्त है और केवल पढ़, सुन, रट कर प्रवचन आदि करने वाले (वेदोक्त यज्ञ, योग साधना न करने वाले) उनका तो वेद
नितिका कुठियाला पाकशास्त्री व शोधकर्ता सफर खुद में एक मंजिल है! मैं हमेशा से मानती आई हूं कि यात्रा इस बात पर निर्भर नहीं करती कि आप कितनी दूर जाते हैं या कितना खर्च करते हैं। सफर दूरी या बजट से शुरू नहीं होता, वह जिज्ञासा से शुरू होता है। आज हर व्यक्ति अपनी जेब
ओशो ज्ञान एक ऐसा शब्द है, जिसके भेद एक दूसरे से अलग है। एक ज्ञान है केवल जानना, जानकारी, बौद्धिक समझ। दूसरा ज्ञान है, अनुभूति, प्रज्ञा, जीवंत प्रतीति। एक मृत तथ्यों का संग्रह है, एक जीवित सत्य का बोध है। दोनों में बहुत अंतर है। भूमि और आकाश का, अंधकार और प्रकाश का। वस्तुत: बौद्धिक
30 अगस्त रविवार, भाद्रपद, कृष्णपक्ष, द्वितीया 31 अगस्त सोमवार, भाद्रपद, कृष्णपक्ष, तृतीया 1 सितंबर मंगलवार, भाद्रपद, कृष्णपक्ष, चतुर्थी 2 सितंबर बुधवार, भाद्रपद, कृष्णपक्ष, पंचमी 3 सितंबर गुरुवार, भाद्रपद, कृष्णपक्ष, सप्तमी 4 सितंबर शुक्रवार, भाद्रपद, कृष्णपक्ष, अष्टमी, कृष्ण जन्माष्टमी 5 सितंबर शनिवार, भाद्रपद, कृष्णपक्ष, नवमी
स्वामी विवेकानंद गतांक से आगे… नरेंद्र ने पागलों की भांति नाव में सवार होकर महर्षि से एकदम पूछा, महाश्य क्या आपने ईश्वर को देखा है? महर्षि उस समय इस सवाल का जवाब देने के मूड में नहीं थे, कुछ देर बाद बोले, तुम्हारी आंखें बिलकुल योगी की तरह हैं। तुम्हारे शरीर में भी योगियों जैसी