मनरेगा कर्मचारियों का मानदेय नहीं होगा कम, सुक्खू सरकार ने किया साफ, पुराने वेतन के बराबर ही मिलेगा भुगतान

कार्यालय संवाददाता — शिमला

हिमाचल प्रदेश में मनरेगा से जुड़े कर्मचारियों को अब मानदेय कम होने की चिंता नहीं रहेगी। प्रदेश की सुक्खू सरकार ने साफ कर दिया है कि पहली जुलाई, 2026 से मिलने वाला निश्चित मासिक मानदेय उतना ही होगा, जितना कर्मचारी को इससे ठीक पहले मनरेगा के तहत मासिक पारिश्रमिक मिल रहा था। यानी नई व्यवस्था लागू होने के बाद कर्मचारियों को पहले मिल रही कुल मासिक राशि से कम भुगतान नहीं किया जाएगा। ग्रामीण विकास विभाग ने 18 अगस्त को इस संबंध में शुद्धिपत्र जारी कर पहले जारी आदेश के दो प्रावधानों में संशोधन किया है। सरकार के इस फैसले से ग्राम रोजगार योजना से जुड़े कर्मचारियों को बड़ी राहत मिली है। अब उनका मानदेय एकमुश्त निर्धारित राशि के रूप में तय होगा और यह राशि पहली जुलाई से पहले मिलने वाले सकल मासिक पारिश्रमिक के बराबर होगी। सरल भाषा में समझें तो यदि किसी कर्मचारी को 30 जून तक मनरेगा के तहत कुल मिलाकर जितना मासिक पारिश्रमिक मिल रहा था, पहली जुलाई से नई व्यवस्था में उसका निर्धारित मानदेय भी उसी के बराबर रखा जाएगा।

इससे कर्मचारियों के भुगतान में कटौती की आशंका दूर हो गई है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि योजना से जुड़े कर्मचारियों का मासिक मानदेय ग्राम विकास एवं रोजगार गारंटी योजना की प्रशासनिक निधि से दिया जाएगा। हालांकि इसके लिए केंद्र सरकार की ओर से निर्धारित मानकों के अनुसार धनराशि का आबंटन और उपलब्धता जरूरी होगी। सरकार ने सभी उपायुक्तों, जिला विकास अधिकारियों और खंड विकास अधिकारियों समेत संबंधित अधिकारियों को संशोधित प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। इससे प्रदेश में मनरेगा और ग्रामीण रोजगार व्यवस्था से जुड़े कर्मचारियों को उनके पहले मिल रहे सकल पारिश्रमिक के बराबर मानदेय मिलने का रास्ता साफ हो गया है।