नालागढ़ ब्लास्ट ने खोली आतंकी नेटवर्क की नई परत, नशे के आदी युवाओं को बनाया ‘फुट सोल्जर’

अमन वर्मा—शिमला

हिमाचल के पुलिस जिला बद्दी के तहत एक जनवरी 2026 को सुबह नालागढ़ पुलिस थाने में के पास हुए आईईडी धमाके में नए खुलासे डराने वाले हैं। ये धमाका इतना तेज था कि पुलिस थाने की खिड़कियों के शीशे टूट गए और करीब 45 मीटर दूर निर्माणाधीन रिटायर्ड आर्मी पर्सनल एसोसिएशन भवन को भी नुकसान पहुंचा था। तब प्रतिबंधित खालिस्तानी संगठनों बब्बर खालसा इंटरनेशनल और पंजाब सॉवरेनिटी एलायंस ने सोशल मीडिया पोस्ट में हमले की जिम्मेदारी ली थी। अब जांच में सामने आया कि यह हमला केवल स्थानीय स्तर की साजिश नहीं था, बल्कि इसके पीछे विदेश में बैठे कथित आतंकी हैंडलरों का नेटवर्क काम कर रहा था। जांच एजेंसियों के अनुसार इस नेटवर्क ने पंजाब के नशे की गिरफ्त में आए और आर्थिक रूप से कमजोर युवाओं को अपने लिए इस्तेमाल किया। इन युवाओं को छोटे-छोटे काम सौंपे गए और उन्हें पूरी साजिश की जानकारी नहीं दी गई। किसी को सामान पहुंचाने, किसी को मोटरसाइकिल की व्यवस्था करने और किसी को विस्फोटक को आगे पहुंचाने का काम दिया गया।

पुलिस जांच के मुताबिक, नालागढ़ को हमले के लिए इसलिए चुना गया क्योंकि यह पंजाब और हरियाणा के काफी करीब है और बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ औद्योगिक क्षेत्र की सुरक्षा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। धमाके के बाद कुछ संदिग्ध करीब डेढ़ घंटे के भीतर पंजाब पहुंच गए थे। जांच में यह भी सामने आया कि हमले में इस्तेमाल विस्फोटक कई लोगों के माध्यम से अलग-अलग चरणों में आगे बढ़ाया गया, ताकि किसी एक व्यक्ति को पूरी साजिश की जानकारी न हो। पंजाब पुलिस ने बाद में दो आरोपियों महावीर सिंह उर्फ काका और मनप्रीत सिंह उर्फ मणि को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, दोनों पर नालागढ़ पुलिस थाने में आईईडी लगाने का आरोप है। इनके पास से 9 एमएम ग्लॉक पिस्तौल और चार जिंदा कारतूस बरामद होने की बात भी सामने आई। इसके बाद जांच आगे बढऩे पर पुलिस को करीब 2.5 किलोग्राम आरडीएक्स से भरी आईईडी मिली, जिसमें रिमोट और टाइमर दोनों से विस्फोट करने की व्यवस्था बताई गई। जांच एजेंसियों के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क के पीछे विदेश में बैठे कथित हैंडलर गुरप्रीत सिंह उर्फ गोपी नवांशहरिया, जसप्रीत सिंह उर्फ जस्सी कुलम और सुशांत चोपड़ा के नाम सामने आए हैं। इनमें गोपी नवांशहरिया को पाकिस्तान स्थित बब्बर खालसा इंटरनेशनल से जुड़े आतंकी हरविंदर सिंह उर्फ रिंदा का करीबी बताया गया है। जांचकर्ताओं का दावा है कि गोपी नवांशहरिया विदेश में रहकर पंजाब में अपने नेटवर्क को संचालित कर रहा था।

18 से 20 वर्ष के थे युवक

इस मामले की सबसे चिंताजनक बात यह सामने आई कि कथित तौर पर हमले को अंजाम देने वाले युवा महज 18 से 20 वर्ष की उम्र के थे और उनका पहले कोई बड़ा आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था। पुलिस के अनुसार, ये सभी मजदूर परिवारों से जुड़े थे और नशे की समस्या से जूझ रहे थे। आरोप है कि इन्हें पैसे का लालच देकर आतंकी गतिविधियों में इस्तेमाल किया गया। 13 अगस्त को राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने इस मामले में महावीर कुमार उर्फ काका, अजय मेहरा और मनप्रीत सिंह उर्फ मणि को औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया। ये तीनों पहले से पंजाब की जेल में न्यायिक हिरासत में थे। एनआईए की नई एफआईआर के आधार पर इनकी गिरफ्तारी की गई।

हमले से पहले डाली गई पोस्ट

जांच में यह भी सामने आया कि धमाके के कुछ घंटों बाद बीकेआई और पीएसए की ओर से सोशल मीडिया पर हमले को लेकर पोस्ट की गई थी। पोस्ट में दावा किया गया था कि हमला हिमाचल में सिंथेटिक ड्रग्स के कथित निर्माण और पंजाब में उसकी सप्लाई के विरोध में किया गया। हालांकि पुलिस और जांच एजेंसियां इस दावे की जांच के साथ-साथ हमले के पीछे की वास्तविक आतंकी साजिश और विदेशी कनेक्शन को खंगाल रही हैं।