नेपाल ने भारत-चीन समेत कई देशों की रेस्क्यू टीमों को किया मना, कहा- हमारी सेना खुद सक्षम है

बालेन सरकार बोली, रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए हमारी सेना-सुरक्षा एजेंसियां सक्षम

राहत सामग्री और आर्थिक मदद ले रहा पड़ोस, पर बचाव अभियान में सहायता नहीं
प्रधानमंत्री और मंत्री आपदा राहत कोष में एक महीने का वेतन दान करेंगे

एजेंसियां — काठमांडू

नेपाल की बालेन शाह सरकार ने भयानक त्रासदी के बाद भी भारत और चीन की रेस्क्यू ऑपरेशन में मदद के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। भोटे कोशी में आई भयानक बाढ़ के बाद लापता लोगों की खोज और बचाव के लिए भारत, चीन समेत कई अन्य देशों ने हेलिकॉप्टर और प्रशिक्षित टीमें भेजने का प्रस्ताव नेपाल को दिया था। बालेन शाह के नेतृत्व वाली सरकार ने कहा कि उसकी सुरक्षा एजेंसियां बचाव अभियान चलाने में सक्षम हैं और लापता हुए सैकड़ों विदेशी नागरिकों के बारे में जानकारी के समन्वय के लिए एक केंद्रीय तंत्र बनाया गया है। नेपाल सरकार के जरिए राहत सामग्री और आर्थिक मदद तो ले रहा है, लेकिन उसने विदेशी खोज और बचाव मदद के प्रस्तावों को ठुकरा दिया है।

काठमांडू के इस फैसले के पीछे अतीत का एक सबक है। भारत, चीन, अमरीका, ब्रिटेन, जापान, दक्षिण कोरिया, श्रीलंका और बांग्लादेश जैसे देशों ने आधिकारिक या अनौपचारिक रूप से खोज और बचाव टीमें भेजने की पेशकश की थी। खबर के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने भी काठमांडू से संपर्क किया था, जबकि कुछ सरकारों ने हेलिकॉप्टर और आपदा वाले इलाकों में काम करने के लिए प्रशिक्षित कर्मियों की पेशकश की थी। नेपाल का कहना है कि उसकी अपनी सेना ही बचाव कार्य संभाल सकती है। नेपाल के विदेश मंत्रालय के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि सरकार को कई देशों और संगठनों से अपनी टीमें भेजने की इजाजत मांगने वाली कई आधिकारिक और गैर-आधिकारिक अनुरोध मिला था। रिपोर्ट में कहा गया है हालांकि सरकार ने उनसे कहा है कि नेपाल की अपनी सुरक्षा एजेंसियां ही इस ऑपरेशन को संभालने में सक्षम हैं। इसी बीच नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह और उनकी कैबिनेट के सदस्य आपदा राहत कोष में अपना एक महीने का वेतन दान करेंगे। यह फैसला कैबिनेट की बैठक में लिया गया। कैबिनेट ने वित्त मंत्रालय को यह भी निर्देश दिया कि वह बाढ़ से प्रभावित लोगों और कारोबारों के लिए राहत, कम ब्याज वाली वित्तीय सहायता और पुनर्वास पैकेज तैयार करे।