दिव्य हिमाचल ब्यूरो— नई दिल्ली
अमरीका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने प्रस्तावित एफसीआरए संशोधन विधेयक 2026 को लेकर मीडिया और सिविल सोसायटी में चल रही चर्चाओं पर भारत का रुख स्पष्ट किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए ‘मिथ बनाम रियलिटी’ के साथ उन दावों का जवाब दिया, जिनमें कहा जा रहा है कि नया कानून विदेशी फंडिंग लेने वाले एनजीओ, धार्मिक संस्थानों और चैरिटेबल संगठनों पर बड़ी पाबंदियां लगाएगा। उनके मुताबिक, प्रस्तावित बदलावों का मकसद विदेशी फंड के प्रवाह में ज्यादा पारदर्शिता और बेहतर निगरानी सुनिश्चित करना है। विनय मोहन क्वात्रा ने कहा कि एफसीआरए के तहत विदेशी योगदान लेना अपने आप में प्रतिबंधित नहीं है।
भारत सरकार के मुताबिक, 2026 का बिल मौजूदा व्यवस्था में प्रशासनिक और नियामकीय खामियों को दूर करने की कोशिश है। हालांकि, बिल को लेकर विपक्ष और कुछ धार्मिक संगठनों ने चिंता जताई है। मिथ यह था कि नया कानून एनजीओ और सिविल सोसायटी के लिए विदेशी फंड बंद कर देगा, जबकि भारतीय राजदूत के मुताबिक, ऐसा नहीं है। विदेशी फंड के प्रवाह को नियंत्रित करना राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता से जुड़ा कदम है। भारत में एफसीआरए की शुरुआत 1976 में हुई थी और 2010 में इसे नए ढांचे के साथ लागू किया गया। 2016, 2018 और 2020 में भी इसमें बदलाव किए गए। उनका कहना है कि 2026 का प्रस्ताव उसी व्यवस्था को ज्यादा पारदर्शी और स्पष्ट बनाने की दिशा में अगला कदम है।