दवाडा में बारिश के बीच पत्थरों की बरसात, यातायात बंद

दिव्य हिमाचल ब्यूरो—मंडी

चंडीगढ़-मनाली राष्ट्रीय राजमार्ग के दवाडा से थलौट में भारी वर्षा के कारण पहाड़ी ढलानों से पत्थरों की बौछार का गंभीर खतरा पैदा हो गया है। प्रशासन ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बारिश रुकने तक यातायात पूरी तरह बंद कर दिया है। स्थानीय प्रशासन और पुलिस अधिकारियों के अनुसार, लगातार तेज बारिश से पहाड़ी ढलान कमजोर पड़ गई है, जिससे बड़े-बड़े पत्थर सडक़ पर गिरने की आशंका बढ़ गई है। दवाडा क्षेत्र के आसपास वाहनों की आवाजाही पूरी तरह रोक दी गई है। यातायात तभी बहाल किया जाएगा जब बारिश रुक जाएगी और क्षेत्र को सुरक्षित घोषित कर दिया जाएगा। यात्रियों से अपील की गई है कि वे इस मार्ग का उपयोग न करें और वैकल्पिक रास्तों का सहारा लें।

दवाडा में खतरा बरकरार

दवाडा फ्लाईओवर के पास इस मानसून में बार-बार यातायात प्रभावित हुआ है। सितंबर 2025 में भारी बारिश और भूस्खलन से फ्लाईओवर का एक पिलर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था, जिससे रातभर ट्रैफिक बंद रखा गया था और अस्थायी व्यवस्था करनी पड़ी थी। जुलाई 2026 में भी दवाडा फ्लाईओवर के पास लैंडस्लाइड की घटनाएं हुईं, जिससे यातायात बाधित रहा। इस साल मानसून के दौरान यहां कई घंटों से लेकर एक-दो दिन तक यातायात ठप रहने की घटनाएं दर्ज की गई हैं। एनएचएआई ने इसे गंभीर स्थलों में शामिल किया है।

44 स्थानों पर हालत नाजुक

एनएचएआई ने अप्रैल 2026 में पंडोह से मनाली के बीच 44 क्रिटिकल लोकेशन चिन्हित किए हैं। इन स्थानों को सुरक्षित बनाने के लिए और पहाड में स्थिरता लाने तथा पुनस्र्थापना कार्य के लिए 825 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए। इनमें थालौट में एक, झलोगी क्षेत्र में नौ और कुल्लू-मनाली के बीच 35 स्थल शामिल हैं। झलोगी टनल और औट के पास दवाड़ा फ्लाईओवर को भी तत्काल हस्तक्षेप वाले स्थलों में रखा गया है।

इन स्थानों पर यातायात बाधित

इस मानसून में पंडोह-औट फोरलेन पर कई बार भूस्खलन और शूटिंग स्टोन से यातायात बाधित हुआ। जुलाई-अगस्त 2025 में दो दर्जन से अधिक लैंडस्लाइड दर्ज हुईं। इस बरसात मे भी दवाडा, थालौट, झलोगी और आसपास के क्षेत्रों में बार-बार यातायात ठप होने की घटनाएं हुईं। यात्रियों और स्थानीय लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई, जबकि पर्यटन और सामान परिवहन पर भी असर पड़ा। प्रशासन स्थिति पर नजर रखे हुए है। यात्रियों को सलाह दी जा रही कि वह वैकल्पिक सडकों का इस्तेमाल करें।