श्रीश्री रवि शंकर
ध्यान हमारे आसपास सकारात्मक और सामंजस्य की ऊर्जा का सृजन करता है। अब तक काफी शोध हुआ है
कि कैसे ध्यान उच्च रक्तचाप, हृदय की समस्याएं, चमड़ी के रोगों में और अन्य विभिन्न समस्याओं में मददगार है। यह शारीरिक बीमारियों और मानसिक व्याधियों को रोकने में बहुत सहायक है…
आज की इस रफ्तार भरी और अस्त-व्यस्त दुनिया में, कई लोगों के लिए आंतरिक शांति और सेहत प्राथमिकता बन गए हैं। ध्यान, गति से स्थिरता की यात्रा है, ध्वनि से मौन तक। ध्यान करने की आवश्यकता प्रत्येक मनुष्य में विद्यमान होती है क्योंकि मानव जीवन की प्राकृतिक प्रवृत्ति एक ऐसे आनंद को खोजना है जो कभी कम न हो, वह प्रेम जो कभी भी विकृत नहीं हो या नकारात्मक भावों में परिवर्तित न हो। क्या ध्यान आपके लिए पराया है? बिलकुल नहीं। वह इसलिए क्योंकि आप अपने जन्म से पहले कुछ महीनों के लिए ध्यानस्थ थे। आप कुछ न करते हुए, अपनी माता के गर्भ में थे। यहां तक कि आपको अपना खाना भी नहीं चबाना पडता था, यह सीधे आपके पेट में पहुंचाया जाता था और आप प्रसन्नतापूर्वक तरलता में तैर रहे थे, उलट-पुलट होते हुए, लात मारते हुए, कभी यहां तो कभी वहां, लेकिन ज्यादातर प्रसन्नतापूर्वक तैरते रहे। यही ध्यान या पूर्ण विश्राम है। अगर आप ध्यान से होने वाले लाभ देखेंगे तो आप यह महसूस करेंगे कि आज के समय में ध्यान बहुत महत्त्वपूर्ण है। पुराने समय में ध्यान को आत्मबोध के लिए व्यवहार में लाया जाता था, स्वयं की खोज के लिए प्रयोग किया जाता था। ध्यान दुखों को मिटाने और समस्याओं से निपटने का रास्ता हुआ करता था। यह अपनी क्षमताओं को सुधारने का भी तरीका हुआ करता था। अतीत में इसे, इन तीनों चीजों के लिए उपयोग किया जाता था। आज, अगर आत्मबोध को छोड दें, तो आप देखेंगे कि आज की सामाजिक बुराईयां, तनाव और चिंता, इन सभी के हेतु ध्यान आवश्यक है। आपके जीवन में जितनी अधिक जिम्मेदारी उतनी अधिक ध्यान की जरूरत। अगर आप के पास करने को कुछ नहीं है तो शायद ध्यान की आपको इतनी आवश्यकता न हो।
लेकिन आप जितने व्यस्त हैं, उतना ही कम समय है आपके पास और उतना अधिक कार्य आपके पास एवं तत्पश्चात आपकी इच्छाएं और आकांक्षाएं हैं, अत: आपको ध्यान की ज्यादा आवश्यकता होगी। ध्यान न केवल आपको तनाव से मुक्त करता है और आपको शक्ति देता है, बल्कि यह आपको चुनौतियों का सामना करने के सामथ्र्य में वृद्वि करेगा। ध्यान हमें उत्तम स्वास्थ्य प्रदान करता है। संगीत भावनाओं का भोजन है, ज्ञान भोजन है बुद्वि का, मनोरंजन आहार है मन का, ध्यान भोजन है हमारी आत्मा का या चेतना का। यह मन का ऊर्जा प्रदायक है। क्या आपने देखा है कि कभी-कभी जब आप किसी से मिलते हैं, बिना ही कारण आपको उनसे बात करने का मन नहीं करता? वहीं, कुछ लोग ऐसे भी होंगे जिनसे आप इतना मिले नहीं हैं, तो भी आपको उनके साथ बात करने से आत्मीयता लगती है। ऐसा सकारात्मक ऊर्जा के कारण होता है। ध्यान हमारे आसपास सकारात्मक और सामंजस्य की ऊर्जा का सृजन करता है। अब तक काफी शोध हुआ है कि कैसे ध्यान उच्च रक्तचाप, हृदय की समस्याएं, चमड़ी के रोगों में और अन्य विभिन्न समस्याओं में मददगार है। यह शारीरिक बीमारियों और मानसिक व्याधियों को रोकने में बहुत सहायक है। यह आपके आसपास सकारात्मक तरंगों का निर्माण करता है, दूसरों के साथ आपका बर्ताव और दूसरों का आपके साथ बर्ताव, दोनों को प्रभावित करता है। ध्यान आपको अल्प समय में अथाह विश्राम देता है।