विभाग ने खेतों में जाकर परखी पौधों की गुणवत्ता, शिवा परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए फिल्ड निगरानी शुरू

प्रदेश में शिवा परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए फिल्ड निगरानी शुरू

चिव बोले, सरकारी रिपोर्टों तक सीमित न रहें परियोजना की उपलब्धियां

कार्यालय संवाददाता-शिमला

प्रदेश सरकार की महत्त्वाकांक्षी एचपी-शिवा परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए बागबानी विभाग ने फील्ड में निगरानी तेज कर दी है। परियोजना के तहत लगाए जा रहे फलदार पौधों की गुणवत्ता, वैज्ञानिक तरीके से पौधारोपण, भूमि की तैयारी, सिंचाई व्यवस्था और निर्धारित दूरी सहित विभिन्न कार्यों का अधिकारियों की टीम मौके पर जाकर निरीक्षण कर रही है। विभाग का फोकस अब परियोजना की उपलब्धियों को कागजी रिपोर्टों से बाहर निकालकर किसानों के खेतों और उनकी बढ़ती आय में दिखाई देने पर है। सचिव बागबानी डॉ. सी पॉल रासु ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सरकार की बागवानी योजनाओं का लाभ प्रदेश के अंतिम किसान तक पहुंचना चाहिए।

एचपी-शिवा परियोजना की उपलब्धियां केवल सरकारी रिपोर्टों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि किसानों के खेतों में विकसित हो रहे बगीचों और उनकी आय में इसका स्पष्ट असर नजर आना चाहिए। उन्होंने परियोजना में गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों को नियमित रूप से फील्ड में जाकर किसानों के साथ काम करने के निर्देश दिए हैं।

व्यवस्थाएं जांची

परियोजना निदेशक डॉ. समीर सिंह राणा पिछले तीन दिनों से कांगड़ा और बिलासपुर के विभिन्न क्षेत्रों में पहुंचकर एचपी-शिवा के तहत चल रहे पौधारोपण कार्यों का निरीक्षण कर रहे हैं। उन्होंने खेतों में पहुंचकर पौध सामग्री की गुणवत्ता, भूमि की तैयारी, वैज्ञानिक लेआउट, पौधों के बीच निर्धारित दूरी और सिंचाई जैसी व्यवस्थाओं का जायजा लिया।

गुणवत्तापूर्ण पौधों पर जोर

विभाग का विशेष जोर गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री के इस्तेमाल और वैज्ञानिक मानकों के अनुसार पौधारोपण पर है। अधिकारियों का मानना है कि शुरुआती चरण में गुणवत्ता से समझौता होने पर भविष्य में बगीचों की उत्पादकता प्रभावित हो सकती है। इसलिए खेत तैयार करने से लेकर पौधारोपण और सिंचाई तक प्रत्येक चरण की निगरानी की जा रही है।

किसानों की आय बढ़ेगी

डॉ. समीर राणा ने कहा कि शिवा परियोजना का उद्देश्य केवल पौधारोपण करवाना नहीं, बल्कि टिकाऊ और आर्थिक रूप से लाभकारी फल बगीचे विकसित कर किसानों की आय बढ़ाना है।