देशभर में स्वाइन फ्लू के केस लगातार रफ्तार पकड़ रहे हैं। बदलते मौसम और बढ़ती उमस में जुकाम होना आम बात है। लेकिन कुछ ऐसे ही लक्षण आपको एच1एन1 वायरस भी देता है, जिसे हम स्वाइन फ्लू कहते हैं। ऐसे में स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों के बीच जागरूक रहना जरूरी है, क्योंकि डाक्टरों के मुताबिक सामान्य फ्लू जैसे दिखने वाले ये लक्षण किसी भी समय घातक हो सकते हैं।
कितना खतरनाक है नया वेरिएंट
एच1एन1 वायरस हमारे शरीर के अंदर जाकर रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट जैसे नाक, गले और छाती पर असर डालता है। इसकी वजह से निमोनिया भी हो सकता है। ज्यादा फैलने पर ये पूरे फेफड़ों को भी अपने चपेट में ले सकता है। रेस्पिरेटरी फेल्यिोर भी हो सकता है। एच1एन1 वायरस मुख्यत: ड्रॉपलेट इन्फ्केशन से फैलता है। खांसने से, छींकने से जो ड्रॉपलेट्स गिरते हैं, वो जब हवा में जाते हैं तो उसके दायरे में जो लोग भी आते हैं, उनसे यह वायरस फैलता है। बारिश और उमस की वजह से स्वाइन फ्लू वायरस लंबे वक्त तक जिंदा रहता है, जिससे ये एक से दूसरे व्यक्ति में आसानी से फैलता है। इस वायरस से संक्रमित होने पर सर्दी, खांसी, जुकाम, बुखार, बदन टूटने जैसे लक्षण दिखते हैं। आमतौर पर 85 फीसदी मरीजों में यही लक्षण दिखते हैं, जो तीन से पांच दिनों में अपने आप ठीक भी हो जाते हैं। हालांकि, खांसी, कमजोरी और थकान एक-दो सप्ताह या कभी-कभी उससे अधिक समय तक रह सकती है।
कब जाएं डाक्टर के पास
एच1एन1 खासतौर पर श्वसन तंत्र को प्रभावित करता है और खांसने या छींकने से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में जा सकता है। इस वायरस से संक्रमित होने पर सांस लेने में दिक्कत होना, सूखी खांसी आना और नाक बहना, शरीर में दर्द होना, सिर में दर्द होना, गले में खराश होना या गले में दर्द महसूस होना, ठंड लगना और एकदम से बुखार आ जाना और शरीर में कमजोरी महसूस होना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। जिन लोगों को सांस लेने में दिक्कत आ रही है, कंफ्यूजन की स्थिति बन रही है, लंबे समय से तेज बुखार आया हुआ है, होंठों की रंगत नीली नजर आ रही है या लक्षण और खतरनाक होने लगे हैं, तो डाक्टर से मिलने में देरी नहीं करनी चाहिए। वहीं, इसके संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए कुछ सावधानियां जरूर अपनाएं जैसे कि खांसी या छींक आने पर अपने नाक और मुंह को रूमाल से ढकें, अपने हाथों को साबुन और पानी से अच्छी तरह से धोएं, अगर आपको खांसी है, बुखार है या लगातार छींक आ रही है, तो सार्वजिनक जगहों पर जाने से परहेज करें, ढेर सारा पानी पिएं और पोषक तत्त्वों से भरपूर खाना खाएं और पूरी नींद लेकर सोएं और आराम करें।