क्या कभी आपके साथ भी ऐसा हुआ है कि जेब में या पर्स में रखा नोट बारिश में भीग गया हो या, बार-बार हाथों में घूमते-घूमते फट जाए या इतना गंदा हो जाए कि उसे संभालना भी मुश्किल लगे। फिर टेंशन ये कि ये गंदा फटा- पुराना नोट कोई लेगा भी या नहीं , लेकिन जल्द ही ऐसी परेशानियां बीते जमाने की बात हो सकती हैं, क्योंकि भारत में अब कागजी करेंसी की जगह प्लास्टिक यानी पॉलिमर नोटों की एंट्री की तैयारी शुरू हो गई है। सरकार ने 10 और 20 रुपये के करीब 200 करोड़ पॉलिमर नोटों के फील्ड ट्रायल को मंजूरी दे दी है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हाल ही में राज्यसभा में इसकी जानकारी दी। लेकिन सवाल ये है कि ये नोट आपके हाथ में कब आएंगे, इनमें ऐसा क्या खास होगा और क्या इनके आने से नकली नोटों पर भी लगाम लगेगी या नहीं… तो चलिए आज इसी पर पूरी बात करते हैं। सबसे पहले समझिए कि पॉलिमर नोटों का कॉन्सेप्ट भारत के लिए नया है, लेकिन दुनिया के कई देशों में इनका इस्तेमाल पहले से हो रहा है। ऑस्ट्रेलिया ने जनवरी 1988 में सबसे पहले 10 डॉलर का पॉलिमर नोट जारी किया था, इसके बाद कई देशों ने इस तकनीक को अपनाया… जानकारी के मुताबिक, दुनियाभर के करीब 60 देशों में पॉलिमर नोट पूरी तरह या आंशिक रूप से इस्तेमाल किए जा रहे हैं। पॉलिमर यानी प्लास्टिक नोट कागज की जगह एक खास तरह की पतली और लचीली प्लास्टिक सामग्री BOPP यानि बॉयएक्सियली ओरिएंटेड पॉलीप्रोपाइलीन से बने करेंसी नोट होते हैं जो सामान्य कागजी नोटों की तुलना में ज्यादा मजबूत और टिकाऊ होती है।
हमारे देश में 10 और 20 रुपये के नोट सबसे ज्यादा हाथों से होकर गुजरते हैं। ऐसे में बार-बार इस्तेमाल, नमी और पानी के संपर्क में आने से कागजी नोट जल्दी खराब हो जाते हैं। इसके मुकाबले पॉलिमर नोट पानी के प्रति ज्यादा प्रतिरोधी होते हैं और आसानी से फटते या गलते नहीं हैं। इनकी सतह पर धूल और गंदगी भी कम चिपकती है और इन्हें आसानी से साफ किया जा सकता है। यानी बारिश में जेब में रखा नोट भीग गया तो उसके खराब होने की चिंता काफी कम हो सकती है. इसके अलावा भी इस नोट के कई फायदे हैं। पॉलिमर नोट ज्यादा समय तक चलने की वजह से बार-बार नए नोट छापने की जरूरत भी कम हो सकती है। इससे पुराने और खराब नोटों को वापस लेने और नष्ट करने पर होने वाले खर्च में बचत हो सकती है, वहीं पर्यावरण के लिहाज से भी इसका फायदा बताया जाता है। कागजी नोटों की छपाई में कागज, पानी, स्याही और ऊर्जा की ज्यादा जरूरत होती है। ऐसे में अगर नोट ज्यादा समय तक चलते हैं तो नए नोटों की छपाई की जरूरत कम होगी और संसाधनों की खपत भी घट सकती है। यही नहीं इस्तेमाल किए जा चुके पॉलिमर नोटों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत रिसाइकिल करके दूसरी प्लास्टिक आधारित चीजें भी बनाई जा सकती हैं।
दूसरी ओर पोलिमर नोटों की एक और बड़ी खासियत इनकी सुरक्षा हो सकती है। पॉलिमर नोटों में पारदर्शी विंडो और दूसरे आधुनिक सिक्योरिटी फीचर शामिल किए जा सकते हैं, जिनकी सामान्य प्रिंटर या स्कैनर से नकल करना काफी मुश्किल होता है। ऐसे में पॉलिमर नोटों के इस्तेमाल से जाली नोटों की समस्या पर भी काफी हद तक लगाम लगाने में मदद मिल सकती है। यहीं नहीं प्लास्टिक (पॉलीमर) के नोटों में दीमक लगने और उन्हें नुकसान पहुँचाने का खतरा भी नहीं होता है, जो कि पारंपरिक कागज के नोटों की एक बड़ी समस्या है। हाल ही में आपको याद होगा राजस्थान में एक किसान के 5 लाख रु दीमक चट कर गई थी और इससे पहले भी ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं. क्योंकि कागज में दीमक आसानी से लग जाती है, लेकिन प्लास्टिक नोट के साथ ऐसा नहीं हो सकता। अब सवाल ये हैं कि क्या प्लास्टिक के नोट आते ही कागज के नोट बंद हो जाएगें- तो इसका जवाब है नहीं- सरकार ने साफ किया है कि पॉलिमर नोट आने के बाद भी 10 और 20 रुपये के कागजी नोट बंद नहीं होंगे। दोनों तरह के नोट साथ-साथ चलेंगे। क्योंकि अभी पॉलिमर नोटों को मार्केट में लाने की प्रक्रिया बहुत ही शुरुआती चरण में है। सरकार ने फिलहाल फील्ड ट्रायल को मंजूरी दी है, वो भी सिर्फ छोटे नोटों पर. यही नहीं इनके पूरे देश में चलन में आने की तारीख अभी तय नहीं है। ट्रायल के नतीजों, लागत, सुरक्षा और दूसरी जरूरी चीजों का आकलन करने के बाद ही इन्हें बड़े स्तर पर जारी करने को लेकर फैसला होगा। यानी फिलहाल आपको अपनी जेब में प्लास्टिक का 10 या 20 रुपये का नोट मिलने में थोड़ा वक्त लग सकता है, लेकिन अगर ट्रायल सफल रहा तो आने वाले समय में भारत की करेंसी का रूप जरूर बदलता नजर आ सकता है और ये कई मायनों में भारत के लिए गेम चेंजर हो सकते हैं।