मोहित जसवाल—हरोली
ऊना जिला के हरोली स्थित ऐतिहासिक एवं अलौकिक लक्ष्मी नारायण मंदिर अपने असीम धार्मिक महत्व और बेमिसाल सुंदरता के कारण दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है। जलकुंड के बीचों-बीच बना यह भव्य मंदिर न केवल स्थापत्य कला की अद्भुत मिसाल पेश करता है, बल्कि यहां दर्शन करने आने वाले भक्तों की अटूट आस्था का प्रतीक भी है। जनमान्यता है कि इस पवित्र स्थान पर श्री लक्ष्मी नारायण की सच्चे मन से पूजा-अर्चना करने से भक्तों पर धन-धान्य की विशेष कृपा होती है और उनके जीवन में किसी भी प्रकार का अभाव नहीं रहता। इस ऐतिहासिक मंदिर का नींव पत्थर एवं इसका श्रीगणेश 30 जनवरी, 1936 को तत्कालीन होशियारपुर जिला के सेशन जज राय बहादुर चुनी लाल द्वारा किया गया था।
इस भव्य मंदिर का निर्माण हरोली के प्रसिद्ध कुठियाला वंश के दानवीर लाला विलभदर्मल कुठियाला ने श्रद्धालुओं के कल्याण के लिए करवाया था। एक तालाब नुमा आकार के ठीक मध्य में निर्मित इस मंदिर की गुंबद शैली की नक्काशी और कलाकृतियां हर किसी का मन मोह लेती हैं। मुख्य लक्ष्मी नारायण मंदिर के साथ ही परिसर में विष्णुसर मंदिर भी सुशोभित है, जो इसकी अलौकिक सुंदरता को द्विगुणित करता है। कुठियाला वंशज की इस अनमोल विरासत का समय-समय पर जीर्णोद्धार कर इसे और अधिक भव्य रूप प्रदान किया गया है। वर्तमान में सोनिया देवी मंदिर की उचित देखभाल और देख-रेख का जिम्मा निष्ठापूर्वक संभाल रही हैं। कुठियाला परिवार के बारे में यह भी माना जाता है कि मंदिर के असीम आशीर्वाद के स्वरूप ही इस वंश के लोग न्यायपालिका सहित अन्य उच्च प्रशासनिक पदों पर अपनी सेवाएं देकर देश का नाम रोशन कर रहे हैं और अपनी सांस्कृतिक विरासत को सहेजने में योगदान दे रहे हैं। आज भी हरोली से गुजरने वाले और आसपास के क्षेत्रों से आने वाले श्रद्धालु इस सुंदर एवं पवित्र परिसर में शीश नवाकर भगवान लक्ष्मी नारायण का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। शांत और भक्तिमय वातावरण से परिपूर्ण इस धाम में दर्शन करने से भक्तों का भाग्य संवरता है और वे अपने जीवन में सुख, समृद्धि तथा शांति की अनुभूति करते हैं।