दिव्य हिमाचल ब्यूरो — नई दिल्ली
जम्मू-कश्मीर में कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को लेकर आतंकी धमकी सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियां को हाई अलर्ट पर रखा गया है। दरअसल लश्कर-ए-तोएबा के ऑनलाइन प्रॉक्सी फं्रट यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल (यूएलसी) की ओर से जारी ताजा धमकी के बाद घाटी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विशेष पैकेज के तहत तैनात सात हजार से अधिक कश्मीरी पंडित कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, खतरे की गंभीरता इसलिए भी बढ़ गई है, क्योंकि धमकी के साथ कुछ कर्मचारियों की निजी जानकारी भी सार्वजनिक की गई है। इसमें उनके नाम, घर के पते और गाडिय़ों के नंबर शामिल हैं। इससे कर्मचारियों में डर का माहौल है और उनकी सुरक्षा को लेकर प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है। यूएलसी ने कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को सुरक्षा के लिए हथियार देने की कवायद का भी विरोध किया है।
यूएलएसी ने तर्क दिया है कि इस तरह के कदमों से इन कर्मचारियों को आतंकवाद विरोधी अभियानों में इस्तेमाल किए जाने वाले आसान निशाने में बदला जा सकता है। साथ ही, धमकी में घाटी में लौटकर सरकारी योजनाओं के तहत नौकरी करने वाले कश्मीरी पंडितों को लेकर स्थानीय और प्रवासी समुदाय के बीच खाई पैदा करने की कोशिश भी की गई है। यूएलसी और टीआरएफ जैसे प्रॉक्सी ग्रुप्स की ओर से सार्वजनिक रूप से दी गई ऑनलाइन धमकियां, एक सोची-समझी मनोवैज्ञानिक युद्ध की रणनीति का हिस्सा हैं।
स्थानीय नेटवर्क खड़ा करने की कोशिश
रिपोर्ट के मुताबिक, ध्यान भटकाने की यह चाल इसलिए अपनाई गई है, ताकि लाइन ऑफ कंट्रोल के पास बने लॉन्चपैड पर मौजूद लगभग 1000 आतंकियों की गतिविधियों को छिपाया जा सके। ये आतंकवादी जम्मू-कश्मीर के घने जंगलों वाले इलाकों में घुसपैठ करने की तलाश में हैं। साथ ही सीमा पार पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं के नेटवर्क को बनाने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि प्रशासन की गोपनीय जानकारी लीक की जा सके और धार्मिक अल्पसंख्यकों व बाहरी राज्यों के कामगारों पर लोन-वुल्फ (अकेले हमला करने वाले) के जरिए हमले करवाए जा सकें।