अतिक्रमण करने वाले परिवार की बहू नहीं लड़ सकेगी चुनाव, विपक्ष के विरोध के बीच पंचायती राज संशोधन विधेयक पारित

मानसून सत्र के आखिरी दिन विपक्ष के विरोध के बीच पंचायती राज संशोधन विधेयक पारित

कार्यालय संवाददाता — शिमला

प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के आखिरी दिन विपक्ष गतिरोध के बीच हिमाचल प्रदेश पंचायती राज द्वितीय संशोधन विधेयक पारित कर दिया गया। अब वन भूमि पर अतिक्रमण करने वाले परिवार के सदस्य की बहू भी पंचायत चुनाव लडऩे के लिए अयोग्य होगी। भाजपा विधायकों ने इस प्रावधान को महिलाओं को चुनाव से वंचित करने वाला बताते हुए सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। वहीं, पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि यदि बहू परिवार की जमीन की कानूनी वारिस बनती है, तो संपत्ति से जुड़ी देनदारियों की जिम्मेदारी भी उसकी होगी। ऐसे में वह भी चुनाव नहीं लड़ सकती है। गुरुवार को विधेयक पर चर्चा के दौरान नयनादेवी के भाजपा विधायक रणधीर शर्मा ने कहा कि आचार संहिता लगी होने के बीच पंचायत चुनाव के नामांकन से एक दिन पहले अध्यादेश लाने का क्या उद्देश्य था।

उन्होंने कहा कि परिवार की परिभाषा में पहले पुत्रवधू शामिल नहीं थी, लेकिन छह मई को इसमें बदलाव कर पुत्रवधू को भी इसके दायरे में ला दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि ससुर या दादा ने शादी से पहले अतिक्रमण किया है तो उसकी सजा बहू को क्यों दी जा रही है। भाजपा विधायक त्रिलोक जम्वाल ने कहा कि जाति जन्म से तय होती है और इसे शादी के बाद बदला नहीं जा सकता। यदि कोई महिला शादी के बाद दूसरे परिवार में आती है और उस परिवार पर अतिक्रमण का मामला है तो उसे उसके लिए दंडित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति ने अपराध नहीं किया, उसे चुनाव लडऩे से रोकना उचित नहीं है।

भाजपा पक्ष या विपक्ष में

पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि उन्हें समझ नहीं आ रहा कि विपक्ष अतिक्रमण के पक्ष में है या खिलाफ। उन्होंने कहा कि कई ऐसे लोग हैं, जो खुद चुनाव नहीं लड़ पा रहे और अब परिवार की बहू को चुनाव लड़ाने की कोशिश कर रहे हैं। शहरी निकायों में ऐसा प्रावधान पहले से लागू है और अब पंचायतों में भी इसे लागू किया गया है।

सरकार की मंशा पर सवाल

नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने सवाल उठाते हुए कहा कि पहले सरकार पंचायत चुनाव करवाने को तैयार नहीं थी। सुप्रीम कोर्ट में मामला जाने के बाद चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ी। आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू होने के बाद अध्यादेश कैसे लाया जा सकता है। यदि विधेयक आज पारित हो रहा है तो इसे पिछली तारीख से लागू करने की जरूरत क्यों पड़ी।