हिमाचल के तीन हाइड्रो प्रोजेक्ट्स में कमियां, सीएम ने सदन में रखी राज्य बांध सुरक्षा संगठन की वार्षिक रिपोर्ट

वरिष्ठ संवाददाता — शिमला

हिमाचल प्रदेश के बड़े बांधों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर राज्य बांध सुरक्षा संगठन की वार्षिक रिपोर्ट 2025-26 में तीन बांधों पर विशेष निगरानी रखने की जरूरत बताई गई है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने गुरुवार को मानसून सत्र के अंतिम दिन वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत की। रिपोर्ट के अनुसार राज्य में एसडीएसओ के अधिकार क्षेत्र में 17 बांध हैं। इनमें 15 बांध पूरी तरह चालू हैं, जबकि दो बांध निर्माणाधीन हैं। चालू बांधों का इस वर्ष प्री-मानसून और पोस्ट-मानसून दोनों चरणों में निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान अधिकांश बांधों की स्थिति संतोषजनक पाई गई, लेकिन गिरि जटोन बैराज, मलाणा-1 और मलाणा-2 जलविद्युत परियोजनाओं में कुछ तकनीकी और संरचनात्मक कमियां सामने आने के कारण इन्हें कैटेगरी-दो में रखा गया है। इन परियोजनाओं में सुधार कार्यों में तेजी लाने और लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार बांधों की जांच बांध सुरक्षा अधिनियम-2021 और राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण (एनडीएसए) के दिशा-निर्देशों के तहत की गई। निरीक्षण के दौरान बांधों की मजबूती, स्पिलवे, गेट, जलाशय संचालन, सुरक्षा उपकरण, रखरखाव, आपदा प्रबंधन व्यवस्था और आपातकालीन तैयारियों की विस्तार से समीक्षा की गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि गिरि जटोन बैराज के निरीक्षण के दौरान बैराज के एक पियर के एक्सपेंशन ज्वाइंट पर असमान धंसाव के प्रमाण मिले हैं।

इसके अलावा डाउनस्ट्रीम सुरक्षा कार्यों में कटाव पाया गया है। कई स्थानों पर कंकरीट ब्लॉक और कर्टन वॉल अपनी जगह से खिसके हुए मिले हैं, जबकि कुछ हिस्सों में दरारें भी दर्ज की गई हैं। रिपोर्ट के कहा गया है कि मलाणा-दो जलविद्युत परियोजना में अतिरिक्त स्पिल-वे निर्माण और रेडियल गेटों के हाइड्रोलिक होइस्ट बदलने का कार्य अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। परियोजना में अतिरिक्त अनगेटेड स्पिलवे का निर्माण जारी है और इसे जुलाई 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। कार्य पूरा होने तक इस बांध को कैटेगरी-दो में रखा गया है और इसकी विशेष निगरानी की जाएगी। मलाणा-एक जलविद्युत परियोजना में बैलेंसिंग रिजर्वायर की रिटेनिंग वॉल, क्षतिग्रस्त ब्लॉकों और डायवर्जन चैनल की मरम्मत एवं पुनर्निर्माण का काम अभी जारी है। रिपोर्ट के अनुसार इन कार्यों को 31 दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।