1500 करोड़ की आपदा राशि पर विधानसभा में तीखी बहस, जयराम के सवालों पर CM सुक्खू का पलटवार

वरिष्ठ संवाददाता-शिमला

मानसून सत्र के अंतिम दिन गुरूवार को 1500 करोड़ की राशि पर मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर आमने-सामने आ गए। वहीं कर्मचारी-पेंशनरों के धरने प्रदर्शन पर भी सदन में खूब सवाल जवाब हुए। जयराम ठाकुर ने आपदा की राशि और कर्मचारी-पेंशनरों के धरना-प्रदर्शन पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री से सदन में स्थिति स्पष्ट करने की बात कही। जिस पर मुख्यमंत्री ने भी कड़ा रूख अख्तियार करते नेता के हर सवाल पर सदन में स्पष्टीकरण दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि धरने पर कर्मचारी-पेंशनर बैठे है, तो लोकतंत्र में यह उनका अधिकार है। उन्होंने कहा कि इनका जो भी शेष है वो मिलना चाहिए।

सीएम ने कहा कि मैं इनकी प्रशंसा करता हूं कि वह सरकार को जागृत कर रहे है। उन्होंने पूर्व सरकार ने चुनावों से कुछ समय पहले छठा वेतन आयोग लागू कर दिया और सिर्फ 50 हजार दिए। उन्होंने कहा कि पूर्व सरकार के समय प्रदेश को 60 हजार केंद्र से मिले। इसमें 47 हजार करोड़ की आरडीजी पूर्व सरकार को पांच वर्षो में मिली, जबकि वर्तमान सरकार को 17 हजार करोड़ रूपये मिले। हमें भाजपा के बराबर मिलते तो हम दस हजार करोड़ का एरियर और जो 76 हजार 560 करोड़ का कर्ज है, उसका भी दस हजार करोड़ चुकाकर देते तथा प्रदेश भी आत्मनिर्भर होता। सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रधानमंत्री जब हिमाचल दौरे पर आए थे, तो हमने 1500 करोड़ नहीं मांगे थे। गगल एयरपोर्ट पर मीटिंग हुई और नेता प्रतिपक्ष ने भी बात रखी, लेकिन मौके पर कोई घोषणा पीएम ने नहीं की।

उन्होंने कहा कि पीएम ने ट्विटर पर प्रदेश को 1500 करोड़ रुपए की घोषणा की। उन्होंने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि आपदा में हुए नुक्सान की पीडीएनए से क्षतिपूर्ति होनी थी और जब पैसा आएगा तो यह इंफ्रास्ट्रक्चर पर लगेगा। सीएम ने कहा कि जब आपदा आती है, तो यह नहीं देखा जाता कि दिल्ली से पैसा आएगा। हमने अपने स्टेट बजट को पीडीएनए में खर्च किया है। सीएम ने कहा कि नीति आयोग, इनके मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार सरकार की तारीफ कर रहे है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम चुनाव को देख राजनीति नहीं करते, जनता को देख कर सेवा भाव करते है। उन्होंने विपक्ष पर सवाल उठाते हुए कहा कि वह राजनीतिक लाभ के लिए सवाल कर रहे है। सीएम ने कहा कि अभी सरकार को तीन साल, आठ महीने और 23 दिन हुए है। निश्चित रहे सब जगह सुधार करेंगे।

इससे पहले प्रश्नकाल में अनुपूरक सवाल करते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि यदि सरकार कर्मचारी हितैषी है तो कर्मचारी और पेंशनर हर चौक पर धरने पर क्यों है। उन्होंने कहा कि आप हर बात केंद्र के सर डालने की कोशिश कर रहे है। जयराम ठाकुर ने कहा कि आरडीजी बंद होने का पहला साल है, इससे पहले तीन वर्ष तक प्रदेश को यह मिलती रही, तब देनदारियां क्यों नहीं दी। उन्होंने कहा कि जो आपदा का पैसा आता है, उसे पेंशन व सैलरी पर कैसे खर्च कर सकते है। उन्होंने बिजली बोर्ड के प्रदर्शन का हवाला देते हुए कहा कि यदि सरकार ने ओपीएस लागू कर दी है तो बिजली बोर्ड कर्मचारी धरने पर क्यों बैठे है।