वरिष्ठ संवाददाता—शिमला
हिमाचल के मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की सीटों पर आरक्षण बढ़ाने के मुद्दे पर सरकार जातीय गणना का डाटा आने के बाद विचार करेगी। विधानसभा के मानसून सत्र में विधायक सुखराम चौधरी की तरफ से उठाए सवाल पर मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने मंगलवार को प्रश्रकाल में सदन के भीतर यह ऐलान किया। उन्होंने कहा कि अन्य पिछड़ा वर्ग का कल्याण कांग्रेस ने किया है। विधायक पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब वह भाजपा सरकार में मंत्री थे, तो क्यों नहीं इस विषय को उठाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ओबीसी का कल्याण राजनीतिक नहीं, बल्कि उनकी भावनाओं को देखकर कर रही है। प्रदेश सरकार ने राज्य में ओबीसी आयोग बनाया है और कमीशन भी इस विषय पर विचार कर रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ओबीसी आयोग की रिकेमेंडेशन और जातीय गणना का डाटा आने के बाद सरकार इस विषय पर विचार करेगी। इससे पहले विधायक सुखराम चौधरी ने सदन में कहा कि प्रदेश के आयुर्विज्ञान महाविद्यालयों में एमबीबीएस की 85 प्रतिशत राज्य कोटे की सीटों में ओबीसी के लिए अलग-अलग संख्या में सीटें आरक्षित हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश की आबादी में ओबीसी की हिस्सेदारी करीब 24 प्रतिशत है, जबकि एमबीबीएस में उन्हें मिलने वाला आरक्षण बहुत कम है। उन्होंने इसे ऊंट के मुंह में जीरा बताते हुए कहा कि या तो आरक्षण की व्यवस्था समाप्त कर दी जाए या एमबीबीएस में ओबीसी को कम से कम 18 प्रतिशत आरक्षण दिया जाए। उन्होंने आरक्षण के युक्तिकरण की भी मांग की। जवाब में मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि कांग्रेस ने ओबीसी वर्ग के कल्याण के लिए काम किया है। उन्होंने सुखराम चौधरी से कहा कि जब वह मंत्री थे, तब उन्होंने यह मुद्दा क्यों नहीं उठाया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार आरक्षण 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए। सरकार ने ओबीसी आयोग बनाया है, जिससे इस वर्ग को उनके अधिकार मिल सकें। जिन क्षेत्रों में ओबीसी के लिए आरक्षण कम है, वहां आयोग मंथन कर रहा है। उन्होंने कहा कि जातीय जनगणना पूरी होने के बाद इसके आंकड़ों के आधार पर आगे निर्णय लिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जातीय जनगणना के आंकड़े सामने आने के बाद ओबीसी आरक्षण पर विचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अलग-अलग क्षेत्रों में आरक्षण की व्यवस्था है और जातीय जनगणना के बाद कई तथ्य सामने आएंगे। ओबीसी आयोग की रिपोर्ट पर भी सरकार विचार करेगी।
सवाल के लिखित जवाब में मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में सरकारी विभागों में सीधी भर्ती से भरे जाने वाले पदों पर ओबीसी को वर्ग-ए और वर्ग-बी में 12 प्रतिशत तथा वर्ग-सी और वर्ग-डी में 18 प्रतिशत आरक्षण दिया जाता है। सरकारी विभागों में प्रशिक्षण के लिए भी अलग-अलग संस्थानों और पाठयक्रमों के अनुसार आरक्षण की व्यवस्था है। चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग के अधीन आयुर्विज्ञान महाविद्यालयों में एमबीबीएस के 85 प्रतिशत राज्य कोटे के तहत ओबीसी के लिए सीटें अलग-अलग निर्धारित हैं। इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान महाविद्यालय शिमला में कुल 102 राज्य कोटे की सीटों में ओबीसी के लिए चार सीटें आरक्षित हैं। डॉ. राजेंद्र प्रसाद आयुर्विज्ञान महाविद्यालय टांडा में 102 में दो, श्री लाल बहादुर शास्त्री आयुर्विज्ञान महाविद्यालय मंडी में 102 में दो, डॉ. यशवंत सिंह परमार आयुर्विज्ञान महाविद्यालय नाहन में 102 में दो, डॉ. राधाकृष्णन आयुर्विज्ञान महाविद्यालय हमीरपुर में 102 में दो और पंडित जवाहरलाल नेहरू आयुर्विज्ञान महाविद्यालय चंबा में 102 में दो सीटें ओबीसी के लिए आरक्षित हैं। हिमाचल प्रदेश दंत महाविद्यालय शिमला में 64 राज्य कोटे की सीटों में ओबीसी के लिए एक सीट आरक्षित है। तकनीकी शिक्षा विभाग के तहत राजकीय इंजीनियरिंग महाविद्यालय, फार्मेसी महाविद्यालय, बहुतकनीकी संस्थानों और औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में डिग्री और डिप्लोमा पाठ्यक्रमों के लिए ओबीसी को 18 प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा है। आयुष विभाग के राजीव गांधी राजकीय आयुर्वेदिक स्नातकोत्तर महाविद्यालय एवं चिकित्सालय पपरोला में बीएएमएस और एमडी आयुर्वेद पाठ्यक्रमों में ओबीसी के लिए 12 प्रतिशत आरक्षण है, वहीं स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के तहत नर्सिंग, पैरामेडिकल तथा डेंटल हाइजिनिस्ट और डेंटल मैकेनिक पाठयक्रमों में ओबीसी के लिए 18 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है। जबकि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला में बीएड पाठयक्रम में ओबीसी के लिए 15 प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा है।