40 साल के बाद खुद को रखना चाहते हैं हेल्दी, तो इन आसान टिप्स को करें फॉलो

बढ़ती उम्र के साथ शरीर में कई तरह के बदलाव होने लगते हैं और शरीर में ऊर्जा का स्तर भी काफी कम हो जाता है। हड्डियां कमजोर होने लगती हैं, मांसपेशियों में जकडऩ होने लगती है, हार्मोन का स्तर घटने लगता है और कुछ पोषक तत्त्वों को पचाने में कठिनाई होने लगती है। बढ़ती उम्र के बाद फिटनेस रूटीन बनाए रखने के लिए वाक, योग, ध्यान, हल्की स्ट्रेंथ एक्सरसाइज और संतुलित आहार को अपनी दिनचर्या में शामिल करना फायदेमंद हो सकता है…

40 की उम्र के बाद महिलाओं का शरीर कई तरह के बदलावों से गुजरता है। इस दौरान हार्मोनल बदलाव का असर मस्सल्स, हड्डियों और शरीर के टिश्यू पर भी पड़ता है। कुछ महिलाओं को कमर में अकडऩ, कोर मस्सल्स में कमजोरी या यूरिन लीकेज जैसी परेशानियों महसूस होने लगती हैं। इसलिए बढ़ती उम्र के साथ इन बदलावों को समझना और शरीर की देखभाल करना जरूरी है। पेल्विक फ्लोर मस्सल्स ब्लैडर, आंतों और पेल्विक ऑर्गन्स को सपोर्ट करने के साथ ब्लैडर को कंट्रोल करती हैं। वहीं, मजबूत कोर सही पोस्चर, बैलेंस और डेली एक्टिविटीज को आसान बनाता है। बढ़ती उम्र के बाद फिटनेस रूटीन में हल्की स्ट्रेंथ एक्सरसाइज को शामिल करना फायदेमंद हो सकता है। इन एक्सरसाइज को रेगुलर और सही तरीके से करके आप पेल्विक फ्लोर, कोर और शरीर के निचले हिस्से को मजबूत बना सकती हैं। आइए जानते हैं आसान एक्सरसाइज के बारे में, जिन्हें आप सुविधानुसार रूटीन में शामिल कर सकती हैं।

बैंडेड ग्लूट ब्रिज

बैंडेड ग्लूट ब्रिज स्ट्रेंथ एक्सरसाइज है, जो ग्लूट्स, हिप्स और कोर की मस्सल्स पर काम करती है। घुटनों के ठीक ऊपर मिनी रेजिस्टेंस बैंड लगाएं। पीठ के बल लेट जाएं और घुटनों को मोडक़र पैरों को जमीन पर रखें। पैरों के बीच हिप्स जितनी दूरी रखें। अब बैंड के खिंचाव के साथ धीरे-धीरे घुटनों को बाहर की ओर करें। एडिय़ों पर जोर देते हुए हिप्स को ऊपर की ओर उठाएं। ऊपर पहुंचकर हिप्स की मस्सल्स को टाइट करें और कमर पर ज्यादा जोर न दें। फिर धीरे-धीरे हिप्स को नीचे लाएं और इस प्रोसेस को दोहराएं।

बैंडेड ग्लूट ब्रिज के फायदे

यह एक्सरसाइज ग्लूट्स और बाहरी हिप मस्सल्स को मजबूत करने में मदद करती है। मजबूत ग्लूट्स अच्छे पोस्चर, हिप अलाइनमेंट और कमर को सपोर्ट देते हैं। यह चलने, सीढिय़ां चढऩे और सामान उठाने जैसी डेली के कामों के लिए हिप्स को तैयार करता है।

साइड क्लैमशेल्स एक्सरसाइज

साइड क्लैमशेल्स एक्सरसाइज हिप्स, ग्लूट्स और कोर को मजबूत करने के साथ पेल्विक की स्थिरता बनाए रखती है। इसमें पैरों की स्पीड क्लैमशेल के खुलने और बंद होने जैसी होती है। इसको करने के लिए एक करवट लेटें और घुटनों को मोड़ें। हिप्स को एक-दूसरे के ऊपर रखें और दोनों पैरों को साथ रखें। शरीर के ऊपरी हिस्से को निचले हाथ से सहारा दें। अब पैरों को साथ रखते हुए ऊपर वाले घुटने को धीरे-धीरे उठाएं और फिर नीचे लाएं। अगर आप साइड प्लैंक कर रही हैं, तो हिप्स को धीरे से ऊपर उठाएं।

फायदे

यह हिप्स और शरीर के निचले हिस्से की मस्सल्स के लिए बेस्ट एक्सरसाइज है। चलने, सीढिय़ां चढऩे और एक पैर से की जाने वाली एक्सरसाइज के लिए भी मजबूत बेस तैयार करती है।

सीटेड नी ओपनर्स एक्सरसाइज

यह आसानी से की जाने वाली एक्सरसाइज है, जिसे कुर्सी पर बैठकर किया जाता है। यह घुटनों की फ्लेक्सिबिलिटी, पैरों की ताकत और शरीर के निचले हिस्से की आरामदायक मूवमेंट को बेहतर बना सकती है। इसे करने के लिए एक कुर्सी पर सीधी बैठें और दोनों पैर जमीन पर रखें। जरूरत पडऩे पर कुर्सी के किनारों का सहारा लें। अब एक पैर को थोड़ा ऊपर उठाएं और नीचे वाले पैर को धीरे-धीरे सीधा करें। कुछ सेकंड इस पोजीशन में रहें और थाइज की मस्सल्स को एक्टिव रखें। फिर पैर को वापस जमीन पर रखें। दोनों पैरों से 10-15 बार दोहराएं। यह एक्सरसाइज घुटनों की मूवमेंट को अच्छा और क्वाड्रिसेप्स सहित आसपास की मस्सल्स को मजबूत बना सकती है। इन एक्सरसाइज को वाकिंग, स्ट्रेचिंग और ब्रीदिंग और अन्य एक्सरसाइज के साथ बैलेंस्ड फिटनेस रूटीन में शामिल किया जा सकता है। एक्सरसाइज के दौरान कंट्रोल मूवमेंट और सही तरीके से सांस लेना शरीर के प्रति जागरूकता बढ़ाता है।