जिन्होंने 30-40 साल हिमाचल की सेवा की, उन्हें उम्र के इस पड़ाव में तरसाना सही नहीं

दिव्य हिमाचल ब्यूरो—शिमला

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने राज्य के पेंशपरों के मुद्दे पर कहा कि प्रदेश का लगभग हर वर्ग वर्तमान सरकार की कार्यशैली से परेशान है। सबसे दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति उन सेवानिवृत्त कर्मचारियों की है, जिन्होंने अपने जीवन के 30 से 40 वर्ष हिमाचल प्रदेश की सेवा में लगाए और आज अपने ही अधिकारों एवं लंबित वित्तीय लाभों के लिए सडक़ों पर आंदोलन करने को मजबूर हैं। डॉ. बिंदल ने कहा कि 70, 75, 80 और यहां तक कि 90 वर्ष की आयु के बुजुर्गों को अपने पेंशनरी लाभों के लिए घरों से निकलकर धरने-प्रदर्शन करने पड़ रहे हैं। यह प्रदेश सरकार के लिए अत्यंत शर्मनाक स्थिति है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने दशकों तक प्रदेश की सेवा की, उन्हें जीवन के इस पड़ाव पर अपने अधिकारों के लिए सरकार से संघर्ष करना पड़ रहा है, लेकिन कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री, मंत्री और विधायक उनकी आवाज सुनने को तैयार नहीं हैं।

उन्होंने कहा कि धर्मशाला में करीब 8,000 सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने विधानसभा का घेराव किया, प्रदेश के विभिन्न जिलों में लगातार धरने-प्रदर्शन हुए और अब हजारों सेवानिवृत्त कर्मचारी शिमला पहुंचकर विधानसभा के बाहर प्रदर्शन कर रहे हैं। लाहौल-स्पीति, किन्नौर, चंबा, कांगड़ा सहित प्रदेश के दूर-दराज क्षेत्रों से बुजुर्ग कर्मचारी शिमला पहुंच रहे हैं, लेकिन सरकार पर इसका कोई असर दिखाई नहीं दे रहा। डॉ. बिंदल ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार सेवानिवृत्त कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान के बजाय केवल बयानबाजी और जनता को गुमराह करने में लगी हुई है। कर्मचारियों की वर्षों की सेवा के बाद मिलने वाले वित्तीय अधिकारों को लंबित रखना उनके साथ अन्याय है। उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों के पेंशनरी बेनिफिट्स, 15 प्रतिशत एरियर, डीए, ग्रेच्युटी, लीव एनकैशमेंट, कम्यूटेशन तथा पे एरियर जैसे अनेक वित्तीय लाभ लंबित हैं। इन देनदारियों के जमा होते जाने से प्रत्येक प्रभावित व्यक्ति को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसके साथ ही मेडिकल बिलों की रिइम्बर्समेंट को लेकर भी सेवानिवृत्त कर्मचारियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।