एजेंसियां — ओस्लो
रूस को चुनौती देना हर देश के बस की बात नहीं है। खासकर तब जब मामला रूस के रणनीतिक इलाके आर्कटिक से जुड़ा हो, लेकिन अब नॉर्वे ने ऐसा कदम उठाया है, जिसने मॉस्को को भडक़ा दिया है। नॉर्वे ने आर्कटिक के स्वालबार्ड में रूस का कार्गो शिप ‘प्रोफेसर मोल्चानोव’ को जब्त कर लिया है। यह कार्रवाई यूक्रेन की सरकारी ऊर्जा कंपनी नाफटोग्ज की मांग पर की गई है। रूस ने इस कार्रवाई को सीधे-सीधे ‘पाइरेसी’ तक करार दिया है। रूस के नागरिक और कारोबारी जहाजों पर हमलों को लेकर राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने चेतावनी दी है। उन्होंने इसे आतंकवाद करार दिया और कहा कि इससे रूस और यूक्रेन के बीच शांति वार्ता की संभावना और मुश्किल हो रही है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने रूसी जहाजों को जब्त करने और उनकी संपत्ति बेचने की योजनाओं को समुद्री डकैती और लूट करार दिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि मॉस्को दुनिया के किसी भी हिस्से में जिसे वह उचित समझेगा उसी तरह से जवाब देगा। विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि रूस अपने लक्ष्य खुद चुनेगा और इसका जवाब देगा। मामला सिर्फ एक जहाज की जब्ती का नहीं है। इसके पीछे रूस और यूक्रेन के बीच अरबों डॉलर की कानूनी लड़ाई है।
नाफटोग्ज का दावा है कि 2014 में रूस द्वारा क्रीमिया के अधिग्रहण के दौरान उसकी संपत्तियों पर कब्जा कर लिया गया था। इसके बाद कंपनी ने अंतरराष्ट्रीय कानूनी लड़ाई शुरू की। अप्रैल 2023 में हेग स्थित एक अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायाधिकरण ने रूस को नाफटोग्ज को करीब 4.22 अरब डॉलर चुकाने का आदेश दिया। इसके अलावा ब्याज और कानूनी खर्च का भुगतान करने का आदेश दिया था, लेकिन रूस ने यह रकम नहीं चुकाई। यहीं से शुरू होती है रूस की संपत्तियों को दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में पकडऩे की मुहिम। नाफटोग्ज अब उन देशों में रूसी संपत्तियों की तलाश कर रही है, जिसे वे वसूल कर सके। इसी कोशिश के तहत कंपनी की नजर प्रोफेसर मोल्चानोव पर गई।