एजेंसियां — काठमांडू
नेपाल में 26 अगस्त को आई तबाही ने जो जख्म दिए हैं, वे भरने में पड़ोसी देश को लंबा वक्त लगेगा। नौ दिन बाद भी शवों के मिलने का सिलसिला जारी है। हर एक नया दिन अपनों को पाने की उम्मीदें धुंधली करता जा रहा है, तो कहीं किसी मलबे से मिले मासूम परिजनों में उम्मीद की एक किरण पैदा कर रहे हैं। नेपाली पुलिस के मुताबिक गुरुवार को मरने वालों की संख्या बढक़र 1252 हो गई, जबकि लापता लोगों की अनुमानित संख्या 4,875 पहुंच गई है। नेपाल में सबसे अधिक लोगों की मौत चितवन में हुई हैं, जहां 355 शव बरामद किए गए हैं। इसके बाद नवलपरासी पूर्व में 218, नवलपरासी पश्चिम में 208 और नुवाकोट में 177 शव बरामद हुए हैं। जहां से आपदा शुरू हुई थी, उस रसुवा में 127 लोगों की मौत दर्ज की गई है।
अब तक 11913 लोगों को बचाया जा चुका है। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर फटने से सबसे ज्यादा तबाही रसुआ, नुवाकोट, चितवन और भोटेकोशी नदी के पास के इलाकों में हुई। त्रिशूली नदी के किनारे बसी कई बस्तियां तबाह हो गईं। रसुआ में बाढ़ आने के तीन दिन बाद जिंदा मिली पांच साल की बच्ची मनीषा का काठमांडू के त्रिभुवन अस्पताल में इलाज चल रहा है। वहीं दूसरी ओर अपनों के मिलने की उम्मीदें खत्म होती देख लोग पूरी तरह टूट चुके हैं और वे उनके पुतलों का अंतिम संस्कार करने लगे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, रसुवा के पहारेबेसी गांव में लोगों ने लापता रिश्तेदारों के बारे में आठ दिनों तक कोई जानकारी न मिलने पर उनके अंतिम संस्कार की तैयारी शुरू कर दी हैं।
शोक मनाने को घर तक नहीं
लापता लोगों के परिवार अब प्रतीकात्मक पुतलों के साथ अंतिम संस्कार करने लगे हैं, जबकि कई लोगों के पास शोक मनाने के लिए घर भी नहीं बचे हैं। भोटेकोशी नदी के ऊपरी इलाकों में लगातार बारिश के कारण फिर से बाढ़ आने का खतरा बना हुआ है।