सदन में विपक्ष का हंगामा और नारेबाजी, विरोध के बाद विधानसभा में विश्वविद्यालयों संबंधी विधेयक पारित
कार्यालय संवाददाता — शिमला
हिमाचल प्रदेश के विश्वविद्यालयों में अब प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर की नियुक्तियां विश्वविद्यालय स्तर पर ही होंगी, जबकि अन्य पदों की भर्ती लोक सेवा आयोग और राज्य चयन आयोग के माध्यम से करवाई जाएगी। विश्वविद्यालय की शैक्षणिक स्वायत्तता बरकरार रखते हुए भर्ती और वित्तीय व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से लाया गया राज्य विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक बुधवार को विधानसभा में करीब पौने दो घंटे चली चर्चा के बाद पारित कर दिया गया। विधेयक पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई। विपक्ष ने सरकार से विधेयक को जबरन पारित न करने की मांग करते हुए कहा कि पूर्व में भी ऐसे मामले हाई कोर्ट में अटक चुके हैं और इस विधेयक को भी न्यायालय में चुनौती दी जा सकती है। विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि सरकार का उद्देश्य विश्वविद्यालय की स्वायत्तता खत्म करना नहीं, बल्कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि शैक्षणिक मामलों में सरकार का हस्तक्षेप नहीं होगा और नियुक्तियां यूजीसी के नियमों के अनुसार ही होंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सहायक प्रोफेसर के पदों पर नेट और सेट जैसी निर्धारित योग्यता पूरी करने वाले अभ्यर्थियों को लिखित परीक्षा के माध्यम से आगे आने का अवसर मिलेगा। साक्षात्कार के लिए 20 अंक निर्धारित होंगे। वहीं, एसोसिएट प्रोफेसर की नियुक्ति विश्वविद्यालय स्वयं करेगा। पूरी प्रक्रिया योग्यता आधारित और पारदर्शी होने से किसी भी नियुक्ति पर सवाल उठाने की गुंजाइश नहीं रहेगी। उन्होंने कहा कि कई बार किसी मंत्री या प्रभावशाली व्यक्ति के बच्चे के चयन पर भी सवाल उठते हैं। यदि भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी होगी और योग्यता के आधार पर चयन होगा तो किसी को उंगली उठाने का मौका नहीं मिलेगा।
सरकार चाहती है कि पीएचडी, नेट और सेट जैसी योग्यता रखने वाले युवाओं को निष्पक्ष अवसर मिले। सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि विश्वविद्यालय की वित्तीय जवाबदेही मजबूत करने के लिए वित्त समिति का अध्यक्ष वित्त सचिव को बनाया गया है। सरकार का हस्तक्षेप वित्तीय मामलों तक ही सीमित रहेगा। शैक्षणिक व्यवस्था में किसी तरह का दखल नहीं दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में वित्तीय प्रबंधन और भर्ती व्यवस्था को बेहतर करना सरकार की प्राथमिकता है।