दिव्य हिमाचल ब्यूरो — नई दिल्ली
चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 7.8 फीसदी जीडीपी ग्रोथ के आंकड़ों पर विपक्ष ने सरकार को घेरते हुए इन आंकड़ों पर सवाल उठाए हैं। इसके बाद सांख्यिकी और कायक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने इन सवालों और आलोचनाओं पर स्पष्टीकरण जारी किया है। दरअसल, पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग और कुछ अर्थशास्त्रियों के बार विपक्ष द्वारा आंकड़ों की गणना प्रक्रिया पर सवाल उठाए जाने के बाद मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि विकास दर के आंकड़ों में कोई भी फेरबदल या मैकेनिकल बढ़ोतरी नहीं की गई है। सुभाष चंद्र गर्ग का आरोप था कि पिछले साल की मौजूदा कीमतों के अनुमान को 86.05 लाख करोड़ से घटाकर 80 लाख करोड़ कर दिया गया, ताकि चालू वर्ष की विकास दर ज्यादा दिखे। इसके जवाब में मंत्रालय ने बताया कि 86.05 लाख करोड़ का आंकड़ा 2011-12 आधार वर्ष के तहत था। जब 2022-23 आधार वर्ष लागू किया गया, तो डाटा सोर्स और औद्योगिक उत्पादन सूचकांक की नई सीरीज के तहत पिछली तिमाही का बेस 80.32 लाख करोड़ (बाद में संशोधित होकर 80 लाख करोड़) हो गया। इसलिए दो अलग-अलग आधार वर्ष की शृंखलाओं की सीधी तुलना करना पूरी तरह से गलत है, और आलोचक इसे गलत तरीके से पेश कर रहे हैं।
आलोचकों ने यह भी सवाल उठाया था कि जब उत्पादन और कच्चे माल दोनों की कीमतें बढ़ी हैं, तो मेन्युफैक्चरिंग का इम्प्लिसिट जीवीए डिफ्लेटर (जीवीए डिफ्लेटर) माइनस 1.5 प्रतिशत कैसे रह गया। इसके जवाब में सरकार का कहना है कि भारत में अब डबल-डिफ्लेशन विधि का उपयोग होता है, जिसमें आउटपुट और कच्चे माल की कीमतों को अलग-अलग एडजस्ट किया जाता है। जब कच्चे माल की दरें आउटपुट की कीमतों की तुलना में तेजी से बढ़ती हैं, तो रियल जीवीए ग्रोथ नोमिनल जीवीए से अधिक दिखती है। मंत्रालय का तर्क है कि पहली तिमाही में नॉमिनल जीवीए 7.7 प्रतिशत और रीयल जीवीए 9.2 फीसदी रहा, जिससे डिफलेटर -1.5 फीसदी आया. इसका मतलब यह नहीं है कि उत्पाद सस्ते हुए हैं। यही नहीं, मंत्रालय ने ओईसीडी शोध का हवाला देते हुए कहा कि वैश्विक स्तर पर ऊर्जा और कच्चे माल के झटकों के दौरान डबल डिफ्लेशन का उपयोग करने वाले देशों में नकारात्मक डिफलेटर दिखना एक स्वाभाविक आर्थिक प्रक्रिया है। जीडीपी आंकड़ों की गणना में नए और अधिक सटीक डाटा स्रोतों, जैसे उत्पादक मूल्य सूचकांक और बैंकिंग सेवा मूल्य सूचकांक को शामिल किया गया है। अत: 7.8 फीसदी की विकास दर आर्थिक वास्तविकताओं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत पद्धतियों पर आधारित है।