बारालाचा में हिम तेंदुए के संरक्षण को मिलेगी रफ्तार, वन विभाग तैयार कर रहा परियोजना, गणना भी होगी

वन विभाग तैयार कर रहा विशेष परियोजना, दुर्लभ वन्यजीव की गणना भी होगी

इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस के साथ साइन होगा एमओयू

वरिष्ठ संवाददाता — शिमला

दुर्लभ स्नो लैपर्ड के संरक्षण के लिए हिमाचल में एक नया प्रोजेक्ट धरातल पर उतरने वाला है। लाहुल स्पीति के बारालाचा कंजर्वेशन एरिया से जुड़ी परियोजना पर वन विभाग काम कर रहा है। इसके लिए इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस के साथ विभाग की हाल ही में एक बैठक भी हो चुकी है। लिहाजा जल्द ही हिम तेंदुआ के संरक्षण से जुड़े प्रोजेक्ट का वन विभाग आईबीसीए के साथ एमओयू करेगा। जानकारी के अनुसार प्रदेश के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पाए जाने वाले दुर्लभ हिम तेंदुआ (स्नो लैपर्ड) के संरक्षण के लिए वन विभाग नई योजना पर काम कर रहा है। विभाग की और से बारालाचा के संरक्षित क्षेत्र को केंद्र में रखते हुए संरक्षण परियोजना तैयार की जा रही है। इस परियोजना के तहत हिम तेंदुए के आवास, उनकी संख्या और क्षेत्र में उनकी गतिविधियों का अध्ययन किया जाएगा। इसके साथ ही यहां पाए जाने वाले अन्य दुर्लभ वन्यजीवों की भी गणना की जाएगी। वन विभाग इस परियोजना को इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस (आईबीसीए) के सहयोग से आगे बढ़ाने की तैयारी में है। इसके लिए विभाग और आईबीसीए के बीच हाल ही में एक बैठक भी हो चुकी है। लिहाजा अब विभाग इसमें आगे बढ़ते हुए जल्द ही एक एमओयू आईबीसीए के साथ करने जा रहा है।

एमओयू के बाद संरक्षण से जुड़े कार्यों को गति मिलेगी और क्षेत्र में वैज्ञानिक तरीके से वन्यजीवों की निगरानी की जा सकेगी। विभाग के वन्य प्राणी विंग का कहना है कि प्रोजेक्ट के तहत स्नो लैपर्ड की संबंधित क्षेत्र में गणना भी की जाएगी। इससे विभाग के पास दुर्लभ वन्य जीव को मौजूदगी का एक स्टीक आंकड़ा भी मिल सकेगा और हिम तेंदुआ के आवास और उनके आने-जाने वाले क्षेत्रों की जानकारी जुटाने में भी मदद मिलेगी। बता दें कि बारालाचा और इसके आसपास का ऊंचाई वाला क्षेत्र कई दुर्लभ वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास है। विभाग के अनुसार स्नो लैपर्ड के प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखना भी परियोजना का अहम हिस्सा होगा। विभाग क्षेत्र में मानव गतिविधियों, पर्यटन और वन्यजीवों के बीच संभावित टकराव की स्थिति का भी अध्ययन करेगा और इसके आधार पर संरक्षण के लिए जरूरी कदम तय किए जाएंगे। हाल के वर्षों में इन क्षेत्रों में इनकी संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है।