किशाऊ प्रोजेक्ट से प्रदेश को प्रतिवर्ष मिलेंगे 1200 करोड़, CM बोले, प्रभावित परिवारों को मिलेगा उचित मुआवजा

जल अधिकारों और ऊर्जा क्षेत्र में हिमाचल के हितों की लड़ाई जारी रहेगी

दिव्य हिमाचल ब्यूरो — शिमला

मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज नई दिल्ली में किशाऊ विद्युत परियोजना पर विभिन्न राज्यों के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर के बाद पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत करते हुए कहा कि किशाऊ परियोजना से हिमाचल प्रदेश को बड़ा आर्थिक लाभ होगा। उन्होंने कहा कि इस समझौते के अनुसार हिमाचल प्रदेश के लिए सबसे बड़ा लाभ है कि हमें किशाऊ बांध से उत्पादित होने वाली 211 मेगावाट बिजली, जिस पर हजारों करोड़ का खर्चा आना था, वह खर्चा अब हिमाचल प्रदेश को वहन नहीं करना पड़ेगा और यह सारा खर्च, जो राज्य पानी का उपयोग करेंगे, वही वहन करेंगे। 422 मेगावाट क्षमता की ये परियोजना उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर स्थित टौंस नदी पर 15,624 करोड़ की अनुमानित लागत से बनेगी। इस परियोजना से संबंधित समझौते को लेकर वर्तमान प्रदेश सरकार ने अपने हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी और लंबे समय तक बातचीत के बाद हिमाचल के पक्ष में महत्त्वपूर्ण निर्णय दिया। सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि आकलन के अनुसार किशाऊ विद्युत परियोजना से 600 करोड़ रुपए की आय होनी थी तथा परियोजना के पूरा होने के बाद वर्तमान अनुमान के अनुसार हिमाचल प्रदेश को प्रतिवर्ष लगभग 1,200 करोड़ रुपए की आय होने की संभावना है।

इससे प्रदेश की आर्थिकी को मजबूती मिलेगी और इसका लाभ प्रदेश के लोगों तक पहुंचाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के इतिहास में यह एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है। श्री सुक्खू ने कहा कि किशाऊ परियोजना के लिए पूर्व में हुए समझौते में परियोजना से बनने वाली बिजली की लागत का वहन हिमाचल प्रदेश को करना था। वर्तमान प्रदेश सरकार ने इस शर्त को स्वीकार नहीं किया और तीन वर्षों तक लगातार अपने अधिकारों के लिए बातचीत की। परिणाम स्वरूप अब परियोजना से बनने वाली बिजली की लागत उन राज्यों द्वारा वहन की जाएगी, जो इस परियोजना के पानी का उपयोग करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि किशाऊ परियोजना से प्रभावित होने वाले परिवारों को उचित मुआवजा प्रदान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में प्रभावित होने वाले गांवों की संख्या कम है, जबकि उत्तराखंड में अधिक गांव प्रभावित होंगे। प्रभावित लोगों को भूमि अधिग्रहण से संबंधित प्रावधानों के अनुसार मुआवजा दिया जाएगा। सुक्खू ने कहा कि पानी आने वाले समय में और अधिक महत्त्वपूर्ण एवं मूल्यवान संसाधन बनने जा रहा है। हिमाचल प्रदेश अपने जल अधिकारों को लेकर लगातार मजबूती से अपना पक्ष रख रहा है। उन्होंने कहा कि भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड से जुड़े मुद्दों के साथ-साथ शानन पावर प्रोजेक्ट का मामला भी प्रदेश सरकार के लिए महत्त्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में लगभग 14,000 मेगावाट जलविद्युत एवं नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता से बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम लाभान्वित हो रहे हैं, जबकि प्रदेश को वर्तमान में 12 प्रतिशत मुफ्त बिजली रॉयल्टी और एक प्रतिशत लोकल एरिया डिवेलपमेंट फंड प्राप्त होता है।

प्रोजेक्ट में दोनों राज्यों के आधे-आधे कर्मचारी

मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि किशाऊ परियोजना में हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की भागीदारी सुनिश्चित की गई है। परियोजना में दोनों राज्यों के 50-50 प्रतिशत कर्मचारी होंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि परियोजना का कार्य शीघ्र पूरा किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश देश को प्रतिवर्ष लगभग 90,000 करोड़ की पारिस्थितिकी सेवाएं प्रदान करता है। इनमें स्वच्छ हवा, ग्लेशियरों का संरक्षण और देश की नदियों के लिए जल उपलब्ध करवाना शामिल है। वहीं, आपदाओं के कारण प्रदेश को प्रतिवर्ष हजारों करोड़ रुपए का आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता है। सीएम सुक्खू ने कहा कि हिमाचल की प्राकृतिक संपदा का लाभ उठाने वाली संस्थाओं और कंपनियों से प्रदेश को उचित आर्थिक लाभ मिलना चाहिए।