दिव्य हिमाचल ब्यूरो — नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) से पूछा कि वह टोल प्लाजा पर कैमरे से निगरानी और मॉनिटरिंग रूम क्यों नहीं लगा सकती। कोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्ग पर बड़े पैमाने पर हो रहे अतिक्रमण और वहां खड़े वाहनों की वजह से लगने वाले जाम की ओर इशारा किया। जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ राजस्थान के फलोदी इलाके में हुए एक हादसे से जुड़े स्वत: संज्ञान वाले मामले की सुनवाई कर रही थी, जिसमें 15 लोगों की जान चली गई थी। कोर्ट ने पूछा कि टोल प्लाजा पर कैमरे लगाकर हाईवे की निगरानी क्यों नहीं की जा सकती और इसके लिए अलग मॉनीटरिंग रूम क्यों नहीं बनाया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि हाईवे पर अतिक्रमण और सडक़ किनारे गलत तरीके से खड़े वाहन बड़ी समस्या हैं। मामले की अगली सुनवाई छह अक्तूबर को होगी। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की मदद एमिकस क्यूरी (अदालत के सहयोगी) के तौर पर कर रहे सीनियर वकील एएनएस नाडकर्णी ने कहा कि राजमार्ग पर गाडिय़ों की अवैध पार्किंग एक बड़ी समस्या है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि इससे सडक़ दुर्घटनाएं होती हैं। पीठ ने यह भी कहा कि राजमार्ग पर अतिक्रमण और खड़ी गाडिय़ां दो मुख्य समस्याएं हैं। एनएचएआई के वकील ने दलील दी कि राजमार्ग पर अनधिकृत पार्किंग की जांच के लिए नियमित निरीक्षण और गश्त के संबंध में सर्कुलर जारी किए गए हैं। पीठ ने कहा कि आप कैमरा सर्विलांस सिस्टम लगाने के बारे में क्यों नहीं सोच सकते? आप सभी टोल प्लाजा पर मॉनिटरिंग रूम बना सकते हैं। पीठ ने देखा कि सडक़ परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय, गृह मंत्रालय और तमिलनाडु सरकार ने इस मामले में अभी तक अपने अनुपालन हलफनामे दाखिल नहीं किए हैं। पीठ ने दोनों मंत्रालयों को अपने हलफनामे दाखिल करने के लिए दो हफ्ते का समय दिया।