कार्यालय संवाददाता — शिमला
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विधानसभा में स्पष्ट किया कि पेपर लीक और सामूहिक नकल जैसे मामलों में सरकार किसी को भी बख्शने वाली नहीं है। उन्होंने कहा कि 22 दिसंबर को पेपर लीक का पता चलते ही सभी पेपर रद्द किए गए और आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। जो भी गलत करेगा, चाहे वह कोई भी हो, उसे सलाखों के पीछे भेजा जाएगा। मुख्यमंत्री ने नेता प्रतिपक्ष की ओर से उठाए गए सामूहिक नकल के आरोपों पर कहा कि विधानसभा में जहां भी मास चीटिंग हुई है, उसके प्रमाण दिए जाएं, सरकार तत्काल कार्रवाई करेगी। विधानसभा में करीब पौने दो घंटे चली बहस के बाद राज्य विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक पारित हो गया।
सीएम सुक्खू ने कहा कि इस विधेयक का उद्देश्य विश्वविद्यालय की स्वायत्तता से छेड़छाड़ करना नहीं, बल्कि भर्ती और वित्तीय व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। सरकार ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की गाइडलाइन को नहीं तोड़ा है। विधेयक की धारा-34 इस बात को स्पष्ट करती है कि आयोग के नियमों का पालन किया गया है।
सिर्फ वित्तीय मामलों में ही प्रदेश सरकार का दखल
सीएम ने कहा कि विश्वविद्यालय की वित्तीय जवाबदेही मजबूत करने के लिए वित्त समिति का अध्यक्ष वित्त सचिव को बनाया गया है। यह बदलाव केवल वित्तीय मामलों तक सीमित है। शैक्षणिक मामलों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। प्रदेश सरकार का उद्देश्य वित्तीय प्रबंधन और भर्ती व्यवस्था को बेहतर बनाना है। मुख्यमंत्री ने भाजपा से विधेयक का समर्थन करने का आग्रह किया और कहा कि इसे युवाओं को लाभ होगा।
सामूहिक नकल के सबूत दें, हम कार्रवाई करेंगे
सीएम सुक्खू ने कहा कि पेपर लीक के मामले में सरकार ने तत्काल कार्रवाई की। 22 दिसंबर को पेपर लीक का पता लगते ही सभी पेपर रद्द किए गए और एफआईआर दर्ज की गई। उन्होंने कहा कि सामूहिक नकल जहां भी हुई है, उसके प्रमाण विपक्ष विधानसभा में दें, सरकार दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करेगी। आने वाले समय में निजी विश्वविद्यालयों के संबंध में भी कानून लाने की जरूरत है।