खाद्य सुरक्षा के लिए हिमाचल में स्थापित होंगी चार प्रयोगशालाएं, मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने किया ऐलान

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने किया ऐलान, नई पोषण नीति को दी मंजूरी

वरिष्ठ संवाददाता — शिमला

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने गुरुवार को कहा कि प्रदेश में नई पोषण नीति को मंजूरी दे दी गई है। राज्य में खाद्य सुरक्षा संबंधी अधोसंरचना एवं निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रदेश में चार नई प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएंगी, जबकि कंडाघाट स्थित संयुक्त परीक्षण प्रयोगशाला भी अपग्रेड की जाएगी। सरकार ने धर्मशाला में नई प्रयोगशाला स्थापित करने की प्रक्रिया पहले ही शुरू कर दी है। उन्होंने कहा कि इन पहलों के प्रभावी संचालन के लिए आवश्यक पदों के सृजन और उन्हें भरने का प्रावधान भी किया गया है। इन उपायों से खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की निगरानी बेहतर होगी, उनमें मिलावट एवं दूषित खाने का पता लगाने में सहायता मिलेगी तथा निर्धारित खाद्य सुरक्षा और पोषण मानकों का अनुपालन सुनिश्चित किया जा सकेगा। नीति में प्रयोगशाला आधारित निगरानी, मोबाइल खाद्य परीक्षण सुविधाओं, जल गुणवत्ता की निगरानी तथा प्रस्तावित राज्य पोषण पोर्टल के माध्यम से पोषण संबंधी आंकड़ों के डिजिटल एकीकरण का भी प्रस्ताव किया गया है। इन पहलों से साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने, निगरानी व्यवस्था को सुदृढ़ करने तथा समय पर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने में सहायता मिलने की उम्मीद है। विभिन्न विभागों के बीच समन्वय, योजना निर्माण, क्रियान्वयन और निगरानी को सुदृढ़ करने के लिए राज्य पोषण समन्वय प्रकोष्ठ तथा जिला पोषण समन्वय प्रकोष्ठ स्थापित करने का प्रस्ताव है।


इसके साथ ही, एकीकृत बाल विकास सेवा, पीएम पोषण योजना और सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत संचालित पोषण संबंधी कार्यक्रमों को और मजबूत बनाने पर विशेष बल दिया जाएगा। नीति में सामुदायिक सहभागिता तथा व्यवहार परिवर्तन संचार को भी महत्त्वपूर्ण स्थान दिया गया है। इसके अतिरिक्त, नीति के तहत पोषण संबंधी जागरूकता बढ़ाने, खाद्य सुरक्षा के प्रति लोगों को शिक्षित करने तथा पहले से संचालित पोषण कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी विशेष बल दिया गया है। इस नीति का उद्देश्य कुपोषण, एनीमिया, सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी, आहार में विविधता का अभाव तथा खानपान से जुड़ी उभरती बीमारियों जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए एक व्यापक और समन्वित व्यवस्था विकसित करना है। नीति में पारंपरिक हिमाचली खानपान, मौसमी फलों, दालों, मोटे अनाज, हरी पत्तेदार सब्जियों, दुग्ध उत्पादों तथा स्थानीय स्तर पर उपलब्ध अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थों को बढ़ावा देने पर विशेष बल दिया गया है, ताकि जन स्वास्थ्य में सुधार के साथ-साथ लोगों में स्वस्थ खानपान की आदतों को प्रोत्साहित किया जा सके। इस प्रकार, हिमाचल प्रदेश पोषण नीति, 2026 का उद्देश्य प्रदेशवासियों को सुरक्षित, पौष्टिक और संतुलित आहार उपलब्ध करवाने के साथ-साथ स्वस्थ समाज के निर्माण की दिशा में ठोस कदम उठाना है।

पोषण चुनौतियों से निपटने की व्यापक रूपरेखा

मुख्यमंत्री ने कहा कि नई पोषण नीति में पोषण संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए एक व्यापक रूपरेखा की परिकल्पना की गई है। इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सभी संबंधित विभागों के समन्वित प्रयासों पर विशेष ध्यान दिया गया है। साथ ही, कमजोर एवं दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की पोषण संबंधी आवश्यकताओं को प्राथमिकता दी गई है। खाद्य परीक्षण प्रयोगशालाएं पोषण में मदद करेंगी।