सुप्रीम कोर्ट पहुंची जंतर-मंतर की लड़ाई, विरोध-प्रदर्शन स्थल की लिस्ट से हटाने के खिलाफ अर्जी

दिव्य हिमाचल ब्यूरो — नई दिल्ली

जंतर मंतर को प्रदर्शन स्थल की लिस्ट से हटाने के सरकार के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। केंद्र सरकार ने 11 अक्तूबर को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन वाले स्थानों की लिस्ट से बाहर कर दिया था और उसकी जगह तीन नए स्थानों को प्रोटेस्ट साइट के रूप में दर्जा दिया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के इस फैसले का कांग्रेस समेत कई संगठन विरोध कर रहे हैं। अब जंतर-मंतर की ये लड़ाई सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुकी है। केंद्र सरकार के 11 अक्तूबर के आदेश को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत में एक रिट याचिका दायर की गई है। यह याचिका वकील स्वाति सिंह ने दायर की है। उनका तर्क है कि विरोध-प्रदर्शनों को दूर-दराज के इलाकों में ले जाने से शांतिपूर्ण तरीके से इक_ा होने और अभिव्यक्ति की आजादी के मौलिक अधिकार बेअसर हो सकते हैं।

याचिका में कहा गया है कि विरोध-प्रदर्शन का अधिकार सिर्फ किसी तय जगह पर इक_ा होने का अधिकार नहीं है, यह अपनी शिकायतें बताने, असहमति जाहिर करने और सरकारी अधिकारियों और समाज का ध्यान उन मुद्दों की ओर खींचने का अधिकार है, जिन पर कार्रवाई की जरूरत है। इसलिए, विरोध-प्रदर्शन की जगह कोई मामूली प्रशासनिक बात नहीं है। याचिका में कहा गया है कि संबंधित संस्थानों से उसकी नजदीकी, जनता की पहुंच और जिन लोगों तक बात पहुंचानी है, उनकी नजर में आना, ये सब सीधे तौर पर विरोध-प्रदर्शन की प्रभावशीलता पर असर डाल सकते हैं।


अमरीकी सिंगर का आरोप, पीएम मोदी के खिलाफ यूएस से फंडिंग

एजेंसियां — वाशिंगटन

कॉकरोच जनता पार्टी के प्रमुख अभिजीत दीपके पर अमरीकी सिंगर मैरी मिलबेन ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने आरोप लगाए हैं कि दीपके को अमरीका से फंडिंग हो रही है। उन्होंने कहा है कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ काम करने वाले डोनर्स उन्हें आर्थिक मदद दे रहे हैं। हालांकि, इस दौरान उन्होंने किसी डोनर का नाम नहीं लिया है। अमरीकी सिंगर ने लिखा कि भारत के सभी युवा देशभक्तों के लिए। यह समय चुप रहने का नहीं है। उन्होंने लिखा कि और इन चुने हुए डोनर्स का दुनिया में कंजर्वेटिव नेताओं को निशाना बनाने, उस देश के ऐसे युवा को खोजना जो अमेरिका में पढ़ा हो, उन्हें कट्टर बनाना, देश में वापस भेजने और तबाही मचाने के लिए फंड देने का एक ही पैटर्न है। अब तक इनमें से कोई भी सफल नहीं हो सका है।