पहुंच से इंटरव्यू में पाए ज्यादा अंक, शैक्षणिक योग्यता भी नजरअंदाज
गोपनीय पत्र ने खोली पोल, यूनिवर्सिटी ने विजिलेंस को भेजी शिकायत
प्रधान संवाददाता — नौणी (सोलन)
डा. यशवंत सिंह परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय में धोखाधड़ी कर बना प्रोफेसर 27 सालों से गणित पढ़ाता रहा है। आरोप है कि उसने ऊंची पहुंच के सहारे इंटरव्यू में भी सबसे अधिक नंबर पाए और चयन के समय ज्यादा शैक्षणिक योग्यता रखने वाले पात्र प्रतिभागियों को नजरअंदाज किया गया था। इस सारी धोखाधड़ी का खुलासा नौणी यूनिवर्सिटी के उपकुपति द्वारा विजिलेंस के आलाधिकारियों को लिखे गए एक गोपनीय पत्र के लीक हो जाने से हुआ है। पत्र नौणी यूनिवर्सिटी के कुलपति के सचिव की ओर से भेजा गया है और पुलिस महानिदेशक राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो शिमला के नाम है। इसमें प्रोफेसर के वे कागज भी साथ संलग्न किए गए हैं, जो नियुक्ति के समय यूनिवर्सिटी प्रशासन को मुहैया करवाए गए थे।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने हिमाचल प्रदेश सरकार के सतर्कता विभाग को विस्तृत शिकायत भेजकर मामले में तुरंत एफआईआर दर्ज करने और जांच शुरू करने की मांग की है। बता दें कि गोपनीय पत्र में उल्लेख किया गया है कि साल 1999 में गणित के सहायक प्रोफेसर की नियुक्ति के समय अनिवार्य पात्रता को किनारे करते हुए चहेते को नौकरी दी गई है। नियुक्ति करते समय निर्धारित अनिवार्य योग्यता नेट न होने के बावजूद उन्हें पात्र घोषित कर दिया गया। आवेदन पत्र में नियुक्ति पाए सहायक प्रोफेसर ने 1995 में एचपी लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सेट परीक्षा उत्तीर्ण करने का उल्लेख किया था। यह परीक्षा यूजीसी मानदंडों के अनुरूप न होने के कारण रद्द कर दी गई थी, लेकिन इस तथ्य को आवेदन में छिपाया गया।
स्क्रीनिंग समिति और चयन समिति ने नियमों की अवहेलना करते हुए चहेते उम्मीदवारी को आगे बढ़ाया। साक्षात्कार में उन्हें उच्च अंक दिए गए, जबकि बेहतर शैक्षणिक योग्यता रखने वाले अन्य अभ्यर्थी को नजरअंदाज किया गया। नियुक्ति के तुरंत बाद एक अन्य अभ्यर्थी ने इस चयन को राज्य प्रशासनिक न्यायाधिकरण में चुनौती दी थी। मामला बाद में हाई कोर्ट में गया। इस अभ्यर्थी ने साल 2010 में याचिका वापस ले ली और मूल आरोपों का कोई न्यायिक निपटारा नहीं हुआ। डा. यशवंत सिंह परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय के उपकुलपति एचएस बवेजा ने कहा कि यूनिवर्सिटी प्रशासन ने पत्र लिखा होगा। इसकी ज्यादा जानकारी नहीं है। धोखाधड़ी का मामला सामने आने पर सबंधित जांच एजेंसी से मामला दर्ज कर छानबीन करने के लिए पत्र लिखे जाते हैं। यह एक प्रक्रिया के तहत किया जाता है।
प्रोफेसर हर माह ले रहा 2.65 लाख पगार
यूनिवर्सिटी में धोखाधडी कर सहायक प्रोफेसर की नियुक्ति पाए गणित के इस प्रोफेसर को करियर उन्नति योजना के तहत एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर पद पर पदोन्नत किया गया। वर्तमान में वह प्रोफेसर हैं। इनका मासिक वेतन लगभग 2.65 लाख रुपए है। साल 2030 में इस प्रोफेसर की रिटायरमेंट होनी है।