निजी संवाददाता— अमृतसर
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने श्रीआनंदपुर साहिब से जुड़े चर्चित मामले में अपनी आंतरिक जांच की प्रारंभिक रिपोर्ट मंगलवार को सार्वजनिक कर दी। एसजीपीसी प्रधान एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने अमृतसर स्थित मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चार सदस्यीय जांच कमेटी की रिपोर्ट के अहम बिंदुओं से मीडिया को अवगत कराया। धामी ने बताया कि कमेटी ने सराय के रजिस्टरों की बारीकी से जांच की है। जांच में यह बात साफ तौर पर सामने आई है कि सराय के कर्मचारियों द्वारा रिकॉर्ड के साथ छेड़छाड़ की गई है। जांच कमेटी के अनुसार, जिस बीबी का नाम इस मामले में आ रहा है, वह अलग-अलग समय पर अलग-अलग गुरुद्वारा साहिबान की सरायों में ठहरी थी। हर बार की एंट्री रजिस्टर में दर्ज है और कमरा लेते समय बकायदा रसीद काटकर निर्धारित राशि जमा करवाई गई है। एसजीपीसी ने इस आरोप को सिरे से खारिज किया कि बीबी को बिना पैसे के कमरा और गाड़ी की सुविधा दी गई थी। सबसे बड़ी गड़बड़ सराय के इंचार्ज अमरीक सिंह की तरफ से की गई। जांच में पाया गया कि अमरीक सिंह ने बाद में रजिस्टर में पीछे जाकर खाली जगह पर गलत एंट्री डाल दी, जिससे रजिस्टर के सीरियल नंबर भी बिगड़ गए।
यह रिकॉर्ड से छेड़छाड़ का स्पष्ट मामला है। बीबी को दी गई एक लाख रुपए की आर्थिक मदद को लेकर उठ रहे सवालों पर धामी ने सफाई दी। उन्होंने कहा कि यह मदद धर्म प्रचार कमेटी ने नहीं, बल्कि एसजीपीसी के धर्म अर्थ फंड से दी गई थी। बीबी ने अपनी बीमारी का हवाला देते हुए इलाज के लिए लिखित अर्जी दी थी, जिसके साथ सरकारी अस्पताल के मेडिकल दस्तावेज भी लगाए गए थे। उन्हीं दस्तावेजों के आधार पर यह सहायता राशि मंजूर की गई थी। एडवोकेट धामी ने कहा कि एक तरफ पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर की जांच चल रही है और दूसरी तरफ एसजीपीसी ने भी अपनी आंतरिक जांच करवाई है, लेकिन सच सामने आने से पहले ही कुछ लोगों द्वारा सोशल मीडिया पर सियासी ट्रायल चलाया जा रहा है। यह सिखों की सर्वोच्च संस्था को बदनाम करने की सोची-समझी साजिश है। धामी ने एक बार फिर इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए सीबीआई जांच की मांग को दोहराया, ताकि सारा सच संगत के सामने आ सके।