नए जिले बनाने का पुराना मुद्दा फिर जागा, सरकार ने किया आयोग का गठन, देहरा, नूरपुर, रामपुर का दावा मजबूत

पालमपुर के साथ सरकाघाट-धर्मपुर की सोई उम्मीदें भी लगी हिलोरे लेने

दिव्य हिमाचल ब्यूरो — शिमला

आगामी विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राज्य की सुक्खू सरकार ने नए जिलों के गठन पर आयोग बनाकर नया दांव खेला है। राज्य सरकार के इस कदम से वर्षों पुराना राजनीतिक मुद्दा फिर जिंदा हो गया है। वैसे हर सरकार में चुनाव से ठीक पहले नए जिलों का यह मुद्दा चर्चा में आता था, लेकिन आयोग का गठन पहले नहीं हुआ था। इस आयोग को रिपोर्ट देने के लिए छह माह का समय दिया गया है। यानी आगामी चुनाव से पहले राज्य सरकार फैसला भी ले सकती है। वर्ष 2002 में तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल की सरकार के समय नए जिले बनाने की तैयारी की चर्चा शुरू हुई थी। वर्ष 2022 में नूरपुर पुलिस जिला भी स्थापित हुआ, जिससे पूर्ण राजस्व जिले की मांग को फिर बल मिला। यही नहीं, वर्ष 2011-12 में यह मुद्दा फिर जोर-शोर से उठा। 2013 और 2022 में भी इस बारे में चर्चा हुई, लेकिन आयोग पहले नहीं बना था।


हिमाचल में वर्तमान में 12 प्रशासनिक जिले और 15 पुलिस जिले हैं। पुलिस में नूरपुर, बद्दी और देहरा को अलग से एसपी दिया जा चुका है, लेकिन डीसी अभी भी 12 ही हैं। वर्तमान प्रशासनिक व्यवस्था 1971 की बनी हुई है। इसके बाद से अब तक कोई नया जिला नहीं बना है। इसलिए अब यदि जिले बनते हैं, तो नूरपुर और देहरा का क्लेम पहला है। शिमला के रामपुर का दावा भी मजबूत है। हालांकि बद्दी को तब भी पुलिस जिला क्राइम के मामलों की वजह से बनाया था, प्रशासनिक जरूरत पर नहीं। इसके अलावा भी कांगड़ा में पालमपुर, शिमला जिला में रामपुर और मंडी जिला में सुंदरनगर, सरकाघाट और धर्मपुर को नया जिला बनाने की मांग होती रही है। खासकर कांगड़ा को छोटा करने और प्रदेश के दूरदराज क्षेत्रों में सुविधाएं बढ़ाने का मुद्दा पिछले दो दशकों से उठता रहा है।

आर्थिक संकट चुनौती

अब बड़ा सवाल यह है कि राज्य की खराब आर्थिक स्थिति को देखते हुए क्या यह सिर्फ एक राजनीतिक कदम होगा? या खर्चे बढऩे के बजाय इस कदम से बचत होगी? नए जिलों से राजस्व, पुलिस, स्वास्थ्य और अन्य सरकारी सेवाएं लोगों के नजदीक उपलब्ध हो सकती हैं, लेकिन प्रदेश सरकार के सामने वित्तीय संसाधन बढ़ाने की चुनौती हमेशा बनी रहेगी।

कब-क्या हुआ?

वर्ष 1972 : आखिरी बड़ा जिला पुनर्गठन

पहली सितंबर, 1972 को कांगड़ा से हमीरपुर और ऊना जिले बनाए गए। पुराने महासू और शिमला जिलों के पुनर्गठन से सोलन जिला भी अस्तित्व में आया। इसके बाद प्रदेश में जिलों की संख्या 12 हो गई।

वर्ष 2003 : नूरपुर को एडीसी मिला

कांगड़ा जिला के नूरपुर में अतिरिक्त उपायुक्त का कार्यालय स्थापित किया गया। इसे अलग जिला बनाने की मांग के इतिहास में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है।

वर्ष 2011 : कांगड़ा के तीन जिले

तत्कालीन धूमल सरकार के समय मंत्री रहे रविंद्र रवि ने नूरपुर, देहरा और पालमपुर को अलग जिले बनाने का प्रस्ताव उठाया। भाजपा स्तर पर भी इस विषय पर चर्चा हुई, लेकिन सहमति नहीं बनी।

वर्ष 2021 : जयराम सरकार में उभरा मुद्दा

जयराम सरकार के कार्यकाल में भी नए जिले बनाने की संभावनाओं पर चर्चा हुई। नूरपुर को जिला बनाने की मांग फिर सुर्खियों में रही। हालांकि उस समय भी नया राजस्व जिला नहीं बना। जयराम सरकार ने आर्थिक स्थितियों का हवाला दिया।

वर्ष 2026 : प्रशासनिक पुनर्गठन आयोग गठित

सुक्खू सरकार की कैबिनेट बैठक में प्रशासनिक इकाइयों के पुनर्गठन के लिए आयोग गठित करने को मंजूरी दी गई। इसके बाद 14 अक्तूबर, 2026 को आयोग के गठन की अधिसूचना जारी हुई।

भाजपा में मंडी जिला पहले से ही दो हिस्सों में बंटा

भारतीय जनता पार्टी के अंदर संगठनात्मक दृष्टि से पहले ही मंडी जिला को दो हिस्सों में बांट कर रखा गया है। इसमें संगठनात्मक जिला मंडी और संगठनात्मक जिला सुंदरनगर शामिल हैं। जिसमें सुंदरनगर जिला में करसोग, नाचन, सुंदरनगर, सरकाघाट और धर्मपुर को शामिल किया गया है, जबकि संगठनात्मक जिला मंडी में सदर, जोगिंद्रनगर, द्रंग, बल्ह और सराज शामिल हैं। भाजपा ने यह निर्णय संगठन की मजबूती को लेकर लागू किया है।

सरकाघाट-धर्मपुर को जिला बनाने की मांग

सरकाघाट और धर्मपुर को अलग जिला बनाने की मांग नई नहीं है। सितंबर, 2022 में तत्कालीन जलशक्ति मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर ने भी धर्मपुर को भविष्य में जिला बनाने की मांग को लेकर बयान दिया था। यदि भविष्य में सरकाघाट और धर्मपुर को केंद्र में रखकर अलग जिला बनाने की कोई योजना तैयार होती है, तो जोगिंद्रनगर विधानसभा क्षेत्र के कुछ हिस्सों के साथ ही पड़ोसी जिला के कुछ क्षेत्रों को इसमें शामिल करने का विकल्प भी चर्चा में आ सकता है।

मुख्यालय से दूरी और भौगोलिक परिस्थितियां

मंडी जिले का भौगोलिक विस्तार काफी बड़ा है। सरकाघाट, धर्मपुर और जोगिंद्रनगर के कई हिस्सों से जिला मुख्यालय से दूरी 100 किलोमीटर से भी अधिक है। वहीं, जोगिंद्रनगर के कई हिस्सों के लोगों के लिए मंडी मुख्यालय की जगह पालमपुर नजदीक पड़ता है। अगर भविष्य में पालमपुर जिला बनता है, तो इन क्षेत्रों को उसमें शामिल करने की मांग जोर पकड़ सकती है। करसोग के लोग भी करसोग को अकसर शिमला जिला में शामिल करने की मांग करते आए हैं।

मंडी जिला का भी बंटवारा

धर्मपुर-सरकाघाट को जिला बनाने की फिर जगी उम्मीद

दूरस्थ क्षेत्रों की जरूरतों मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था की समीक्षा भी अहम

दिव्य हिमाचल ब्यूरो — मंडी

हिमाचल प्रदेश में नए जिलों के गठन और प्रशासनिक इकाइयों के पुनर्गठन की संभावनाओं के बीच मंडी जिला में भी एक नए जिला के गठन की चर्चाओं को फिर से बल मिल गया है। प्रदेश सरकार द्वारा हिमाचल में जिलों के पुनर्गठन की अधिसूचना जारी होने के बाद यह संभावनाएं प्रबल हो गई हैं। मंडी जिला की भौगोलिक दृष्टि के हिसाब से यहां कई बार एक अन्य जिला के गठन की मांग उठती आई है। खासकर कर धर्मपुर और सरकाघाट विधानसभा क्षेत्रों को मिला कर नए जिला के गठन को लेकर कई बार आवाज बुलंद हुई है। वर्तमान में अगर कांग्रेस सरकार के प्रयास सिरे चढ़ते हैं, तो मंडी जिला के दूसरे टुकड़े के रूप में सरकाघाट जिला अस्तित्व में आ सकता है। हालांकि 2012 में तत्त्कालीन धूमल सरकार नेप्रदेश में कुछ अन्य जिलों के साथ ही सुंदरनगर को नया जिला बनाने को लेकर प्रयास किए थे, लेकिन यह प्रयास भाजपा के अंदर की गुटबाजी के कारण सिरे नहीं चढ़ सके थे। उस समय सुंदरनगर जिला का गठन कर इसमें वर्तमान सराज, नाचन, करसोग, सुंदरनगर, सरकाघाट और धर्मपुर को शामिल करने की तैयारी की गई थी। अब वर्तमान में कांग्रेस सरकार इस तरफ बढ़ती हुई नजर आ रही है। हाालांकि कांग्रेस सरकार सुंदरनगर के नाम से नया जिला बनाने के प्रस्ताव पर शायद आगे नहीं बढ़ेगी, यह बात राजनीतिक दृष्टि और मंडी की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए भी जाहिर की गई है।