ये बसें चलेंगी वहीं; जहां चार्जिंग की सुविधा और सडक़ें सही!

एचआरटीसी के बेड़े में आईं 296 इलेक्ट्रिक बसें, ट्रायल के बाद ही विभिन्न रूटों पर भेजी जा रहीं गाडिय़ां

कार्यालय संवाददाता — शिमला

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का सपना प्रदेश को हरित राज्य के रूप में विकसित करना है। सीएम के इसी सपने का साकार करने में हिमाचल पथ परिवहन निगम अहम भूमिका निभा रहा है। एचआरटीसी के बेड़़े में 296 नई इलेक्ट्रिक बसें शामिल की गई हैं। इन बसों का प्रदेश के विभिन्न जिलों में संचालन शुरू हो गया है, लेकिन इनके साथ विवाद भी जुडऩे लगे हैं। कहीं से बसें वापस बुलाई जा रही हैं, तो कहीं अभी मिली ही नहीं हैं। कई बड़े-बड़े और पुराने डिपो खाली रह गए हैं। पठानकोट-बैजनाथ जैसे डिपो में सबसे ज्यादा खटारा बसें हैं और यहां चार्जिंग स्टेशन तक स्थापित नहीं किए गए हैं। निगम प्रबंधन सडक़ की स्थिति, यात्रियों की मांग और चार्जिंग सुविधा को ध्यान में रखकर इन बसों को अलग-अलग रूटों पर भेज रहा है। खास बात यह है कि ऊबड़-खाबड़ और खराब सडक़ों वाले क्षेत्रों में इन बसों के संचालन में आ रही दिक्कतों को देखते हुए रूट पर उतारने से पहले बसों का ट्रायल किया जा रहा है। टाइप-2 श्रेणी की इन इलेक्ट्रिक बसों का संचालन उन्हीं रूटों पर किया जा रहा है, जहां सडक़ें लोक निर्माण विभाग के निर्धारित मानकों के अनुरूप हैं। निगम प्रबंधन का कहना है कि इलेक्ट्रिक बसों के सुचारू संचालन के लिए सडक़ की स्थिति बेहतर होना जरूरी है।

इसी कारण किसी भी नए क्षेत्र में बस भेजने से पहले संबंधित रूट की स्थिति और संचालन की व्यवहारिकता को जांचा जा रहा है। एचआरटीसी प्रबंधन की ओर से इलेक्ट्रिक बसों को किसी एक क्षेत्र में भेजने के बजाय यात्रियों की मांग, सडक़ की स्थिति और चार्जिंग सुविधा को आधार बनाया जा रहा है। निगम प्रबंधन का प्रयास है कि जहां आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हैं, वहां इन बसों का अधिकतम उपयोग किया जाए, ताकि यात्रियों को बेहतर परिवहन सुविधा के साथ-साथ इलेक्ट्रिक परिवहन को भी बढ़ावा मिल सके। प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में ये बसें अभी भी ट्रायल पर भेजी जा रही हैं और यदि इस ट्रायल में ये बसें सफल नहीं होती हैं, तो इन्हें संबंधित डिपो से दूसरे डिपो में शिफ्ट भी किया जाएगा। अब तक राजधानी शिमला लोकल डिपो में बसों के संचालन में आ रही परेशानी के चलते देहरा डिपो में शिफ्ट किया गया है।

ऊना और हमीरपुर को मिलीं सबसे अधिक बसें

हिमाचल प्रदेश में सबसे अधिक 35-35 इलेक्ट्रिक बसें ऊना और हमीरपुर क्षेत्रों में भेजी गई हैं। इसके अलावा हरोली में 22, सोलन में 15, नाहन में 15, शिमला लोकल में 15, शिमला ग्रामीण में 25, बिलासपुर में 18, देहरा में 20, नगरोटा में 10, पालमपुर में 10 और धर्मशाला में पांच बसें भेजी गई हैं।

चार्जिंग स्टेशन नहीं, तो रूट पर नहीं जाएंगी बसें

इलेक्ट्रिक बसों के संचालन में सबसे अहम चार्जिंग सुविधा है। प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में अभी तक चार्जिंग स्टेशन स्थापित नहीं हो पाए हैं। ऐसे क्षेत्रों में फिलहाल वहां इन बसों को नहीं भेजा जा रहा है। कुछ बस अड्डों और स्टेशनों पर चार्जिंग प्वाइंट की सुविधा उपलब्ध न होने के कारण संचालन में व्यावहारिक दिक्कतें भी सामने आ रही हैं।