12वीं में कॉमर्स स्ट्रीम से पढऩे वाले छात्रों के मन में अकसर यह सवाल आता है कि उन्हें 12वीं के बाद क्या करना चाहिए। ऐसे में छात्र अपने करियर को एक नई दिशा देने के लिए कंपनी सेक्रेटरी (सीएस) की पढ़ाई कर सकते हैं। सीएस उन लोगों के लिए एक बेहतरीन प्रोफेशन है, जिन्हें कानून एवं प्रशासनिक क्षेत्रों में दिलचस्पी होती है। आज जिस तरह कॉरपोरेट सेक्टर का विकास हो रहा है उसी तरह कंपनी को कानूनन तरीके से चलाने के लिए जॉब मार्केट में कुशल कंपनी सेक्रेटरी पेशेवरों की डिमांड भी बढ़ रही है। इस क्षेत्र में अच्छी सैलरी के साथ-साथ करियर में स्थिरता और अवसरों की कमी नहीं है…
करियर का चुनाव सिर्फ लोकप्रियता या वेतन देखकर नहीं करना चाहिए, बल्कि अपनी रुचि, योग्यता और भविष्य को ध्यान में रखकर करना चाहिए। कंपनी सेक्रेटरी (सीएस) एक ऐसा पेशा है, जो कानून, प्रबंधन और कॉरपोरेट गवर्नेस से जुड़ा होता है। आज के समय में सीएस की मांग तेजी से बढ़ रही है, क्योंकि यह कंपनियों में जरूरी कानूनी और प्रबंधन से जुड़े काम संभालता है। यह सिर्फ दस्तावेज बनाने का काम नहीं है, बल्कि कंपनी के बड़े फैसलों और नियमों के पालन में भी अहम भूमिका निभाता है, इसलिए बड़ी कंपनियां, बैंक और स्टार्टअप्स में सीएस की अच्छी डिमांड है।
मैनेजमेंट, कानूनी आवश्यकता और कुशल प्रशासन के लिए किसी भी प्राइवेट या फिर गवर्नमेंट कंपनी या फिर इंस्टीट्यूट में इन पदों पर नियुक्ति की जाती है। कंपनी सेक्रेटरी की पोस्ट बहुत ही महत्त्वपूर्ण पोस्ट होती है। कंपनी सेक्रेटरी सरकारी दांवपेच के अंदर इस बात का भी ख्याल रखा जाता है कि कंपनी गवर्नमेंट द्वारा तय किए गए मानकों का पालन कर रही है या नहीं।
इन की जिम्मेदारी
एक कुशल कंपनी सेक्रेटरी की यह जिम्मेदारी होती है कि वह यह देखे कंपनी मनमाने तरीकों से नहीं, बल्कि नियम-कायदों के अनुरूप ही कार्य करें। एक कंपनी सेक्रेटरी क्वालीफाइड प्रोफेशनल होते हैं, जो कंपनी के वित्तीय मुद्दों पर अपनी राय देते हैं। साथ ही एक कंपनी सेक्रेटरी की यह भी जिम्मेदारी होती है कि वह सुनिश्चित करें कि कंपनी भारत द्वारा बनाए गए कानून के तहत काम कर रही है या नहीं। ये पेशेवर कंपनी को बेहतर वित्तीय राय देने के साथ-साथ कंपनी के कानूनी और प्रशासनिक कार्यों में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं
ऐसे करें शुरुआत
कंपनी सेक्रेटरी (सीएस) बनने के लिए किसी विशेष विषय की अनिवार्यता नहीं होती। किसी भी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 12वीं पास छात्र इस क्षेत्र में प्रवेश कर सकते हैं। यह कोर्स उन विद्यार्थियों के लिए उपयुक्त है, जिनकी रुचि कानून और नियमों की समझ, व्यवसाय और कॉरपोरेट कार्यप्रणाली, विश्लेषणात्मक सोच, प्रबंधन और नेतृत्व तथा प्रभावी संचार क्षमता में होती है। अगर आप कॉमर्स स्ट्रीम से पढ़ाई कर रहे हैं और 12वीं के बाद सीएस की पढ़ाई करना चाहते हैं, तो इसके लिए आपको कक्षा 12वीं न्यूनतम 40 प्रतिशत अंकों के साथ पास करनी होगी। 12वीं पूरी करने के बाद स्टूडेंट्स को इंस्टीट्यूट ऑफ़ कंपनी सेके्रटरीज ऑफ इंडिया में फाउंडेशन कोर्स के लिए अप्लाई करना होता है। यह कोर्स आठ महीने की समयसीमा का है। प्रवेश के तीन साल के अंदर इस कोर्स को पास करना जरूरी माना गया है। सीएस की पढ़ाई करने के लिए आपको तीन फेज सीएस एग्जीक्यूटिव एंट्रेंस टेस्ट (सीएसईईटी), एग्जीक्यूटिव प्रोग्राम और प्रोफेशनल प्रोग्राम को पास करना होगा।
ग्रेजुएशन के बाद एक कोर्स में छूट: जिन छात्रों ने अपनी ग्रेजुएशन पूरी कर ली है, उन्हें सीएस एग्जीक्यूटिव एंट्रेंस टेस्ट (सीएसईईटी) में एनरोल होने की जरूरत नहीं होती है। ग्रेजुएट पास छात्र सीधा एग्जीक्यूटिव प्रोग्राम के लिए अप्लाई कर सकते हैं।
प्रवेश प्रक्रिया
सीएस भारत की प्रतिष्ठित प्रोफेशनल योग्यताओं में से एक है। इसका संचालन इंस्टीट्यूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरीज ऑफ इंडिया (आईसीएसआई) द्वारा किया जाता है। कंपनी सेक्रेटरी बनने के लिए विद्यार्थियों को एक निर्धारित प्रवेश प्रक्रिया से गुजरना होता है, जिसमें सामान्यत: कंपनी सेक्रेटरी एग्जीक्यूटिव एंट्रेंस टेस्ट (सीएसईईटी), उसके बाद सीएस एग्जीक्यूटिव प्रोग्राम और फिर सीएस प्रोफेशनल प्रोग्राम शामिल होते हैं। इन सभी चरणों के साथ-साथ अनिवार्य प्रशिक्षण एवं मूल्यांकन भी पूरा करना आवश्यक होता है। इन सभी चरणों को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद अभ्यर्थी कंपनी सेक्रेटरी के रूप में योग्य माना जाता है।
आर्टिकलशिप जरूरी
परीक्षा को पास करने के बाद सभी छात्रों को एग्जीक्यूटिव डिवेलपमेंट प्रोग्राम पूरा करना अनिवार्य है। यह एक महीने की ट्रेनिंग होती है, जो आईसीएसआई द्वारा ही संचालित की जाती है। इसके साथ ही सीएस एग्जीक्यूटिव की परीक्षा पास करने के बाद छात्रों को 21 महीने की आर्टिकलशिप करना भी जरूरी होता है। बता दें कि यदि कोई छात्र आर्टिकलशिप पूरा नहीं करता है, तो उसे सीएस के लिए क्वॉलिफाइड नहीं माना जाएगा। अब आर्टिकलशिप और प्रोफेशनल प्रोग्राम को पूरा करने के बाद छात्रों को आखिरी बार कॉरपोरेट लर्निंग डेवलपमेंट प्रोग्राम (सीएलडीपी) ट्रेनिंग को भी पूरा करना होता है। यह ट्रेनिंग एक महीने के लिए आयोजित कराई जाती है।
कोर्स का स्वरूप
सीएस एग्जीक्यूटिव एंट्रेंस टेस्ट में कुल चार पेपर होते हैं। इन चारों पेपर को पास करने के बाद एग्जीक्यूटिव प्रोग्राम के लिए अप्लाई करना होता है। इसके साथ ही एग्जीक्यूटिव प्रोग्राम और प्रोफेशनल प्रोग्राम में सात-सात पेपर होते हैं। बता दें कि सीएस एग्जीक्यूटिव एंट्रेंस टेस्ट साल में तीन बार फरवरी, जून और अक्तूबर माह में आयोजित कराया जाता है।
फाउंडेशन कोर्स (4 पेपर)
बिजनेस एनवायरनमेंट एंड एंटरप्रेंयूर्शिप
बिजनेस इकोनॉमिक्स
बिजनेस मैनेजमेंट, एथिक्स, लॉ एंड कम्युनिकेशन
फंडामेंटल्स ऑफ़ एकाउंटिंग एंड ऑडिटिंग
2. एग्जीक्यूटिव कोर्स (7 पेपर)
कंपनी लॉ
इकोनॉमिक्स एंड कमर्शियल लॉ
टैक्स लॉ एंड प्रैक्टिस
कॉस्ट एंड मैनेजमेंट अकाउंटिंग
कंपनी अकाउंट्स एंड ऑडिटिंग प्रैक्टिसेज
इंडस्ट्रियल लेबर एंड जनरल लॉ
कैपिटल मार्केट एंड सिक्योरिटीज लॉ
3. प्रोफेशनल कोर्स (9 पेपर)
एडवांस्ड कंपनी लॉ एंड प्रैक्टिस
कॉरपोरेट रिस्ट्रक्चरिंग, वैल्यूएशन एंड इन्सॉल्वेंसी
सेक्रेटेरियल ऑडिट, ड्यू डिलिजेंस एंड कंप्लायंस मैनेजमेंट एडवांस्ड टैक्स लॉ एंड प्रैक्टिस
ड्राफ्टिंग, अपीयरेंस एंड प्लीडिंग
ऐच्छिक विषय पांच में से एक विषय चुन सकते हैं
बैंकिंग लॉ एंड प्रैक्टिस
इंश्योरेंस लॉ एंड प्रैक्टिस
कैपिटल, कमोडिटी एंड मनी मार्केट
इंटेलेक्चुअल बिजनेस- लॉ एंड प्रैक्टिस
इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट- लॉ एंड प्रैक्टिस
डिग्री और प्रोफेशनल योग्यता, दोनों साथ
सीएस की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक यह है कि इसे बीकॉम, बीबीए, बीए, बीएससी या अन्य स्नातक कार्यक्रमों के साथ समानांतर रूप से किया जा सकता है। अधिकांश विद्यार्थी अपनी नियमित ग्रेजुएशन के साथ सीएस की तैयारी करते हैं। इससे उनके पास एक विश्वविद्यालय की डिग्री और एक प्रोफेशनल योग्यता दोनों होती हैं, जो रोजगार के अवसरों को और मजबूत बनाती हैं। यदि विद्यार्थी नियमित रूप से तैयारी करे और सभी परीक्षाएं निर्धारित समय पर उत्तीर्ण करता जाए, तो सामान्यत: सीएस की पूरी प्रक्रिया लगभग तीन से चार वर्षों में पूरी हो सकती है। हालांकि, वास्तविक अवधि विद्यार्थी की तैयारी, परीक्षा परिणाम और प्रशिक्षण की प्रगति पर निर्भर करती है।
– कानून और नियमों में रुचि रखने वाले छात्रों के लिए उपयुक्त है।
– व्यवसाय और कॉरपोरेट कार्यप्रणाली समझने वालों के लिए अच्छा विकल्प है।
– अच्छी संचार क्षमता भी महत्त्वपूर्ण है।
सिर्फ कानून नहीं डिजिटल समझ भी जरूरी
भारत की अर्थव्यवस्था के तेजी से बढऩे के साथ नई कंपनियों, स्टार्टअप्स और निवेश में वृद्धि हो रही है, जिससे सीएस पेशेवरों की मांग बनी हुई है। इस क्षेत्र में बैंकों, कानूनी फर्मों, स्टार्टअप्स और स्वतंत्र प्रैक्टिस में अवसर उपलब्ध हैं। डिजिटल युग में ई-गवर्नेस, साइबर सुरक्षा और डिजिटल कंप्लायंस की समझ भी महत्त्वपूर्ण है। लगातार सीखने और खुद को अपडेट रखने वालों के लिए इस क्षेत्र में अच्छे अवसर हैं।