नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने पंजाब कारागार एवं सुधारात्मक सेवाएं अधिनियम, 2026 को केंद्रशासित प्रदेश चंडीगढ़ में लागू कर दिया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, इसके तहत अंतरराज्यीय कैदियों के स्थानांतरण, जेलों की सुरक्षा, कैदियों के पुनर्वास और दिव्यांग बंदियों के लिए विशेष सुरक्षा उपायों से जुड़े प्रावधान किए गए हैं। भारत के राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना के माध्यम से पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 की धारा 87 के तहत इस कानून को चंडीगढ़ में लागू किया गया है। इसके लिए चंडीगढ़ के प्रशासनिक ढांचे के अनुरूप कुछ संशोधन भी किए गए हैं।
संशोधित प्रावधानों के तहत संविधान के अनुच्छेद 239 के अंतर्गत राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त चंडीगढ़ के प्रशासक को इस कानून के तहत सरकार को सौंपे गए अधिकार प्राप्त होंगे। चंडीगढ़ के जेल महानिरीक्षक या सरकार द्वारा अधिसूचित कोई अन्य अधिकारी जेल एवं सुधारात्मक प्रशासन विभाग का प्रमुख होगा। कानून के प्रमुख प्रावधानों में चंडीगढ़ और अन्य राज्यों या केंद्रशासित प्रदेशों के बीच कैदियों का स्थानांतरण भी शामिल है।
सरकार संबंधित राज्य या केंद्रशासित प्रदेश की सहमति से आजीवन कारावास या मृत्युदंड की सजा काट रहे कैदियों अथवा कुछ निर्धारित चूकों के कारण हिरासत में रखे गए लोगों को दूसरे राज्यों या केंद्रशासित प्रदेशों की जेलों में स्थानांतरित करने की अनुमति दे सकती है। निर्धारित शर्तों के तहत दूसरे राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के कैदियों को भी चंडीगढ़ की जेलों में स्थानांतरित किया जा सकेगा।
सुरक्षा, कानून-व्यवस्था बनाए रखने या जनहित के आधार पर किसी विचाराधीन कैदी को चंडीगढ़ से दूसरे राज्य या केंद्रशासित प्रदेश की जेल में भेजने के लिए संबंधित सरकारों की सहमति और उस अदालत की मंजूरी जरूरी होगी, जहां मामले की सुनवाई चल रही है। कानून में जेलों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के प्रावधान भी किए गए हैं। इनमें ड्रोन और अन्य हवाई वस्तुओं के संचालन पर प्रतिबंध शामिल है। इसके तहत जेल विभाग को सक्षम अधिकारियों से जेल परिसर और उसकी बाहरी सीमा से 500 मीटर तक के क्षेत्र को नो-फ्लाई जोन घोषित कराने के लिए अधिसूचना जारी करवानी होगी।
चंडीगढ़ के लिए किए गए विशेष संशोधन के अनुसार, इस अधिसूचित क्षेत्र में हवाई वस्तुओं का संचालन केवल नागरिक उड्डयन कानून के तहत जरूरी अनुमतियां और जेल विभाग की पूर्व मंजूरी मिलने पर ही किया जा सकेगा। अधिसूचना में दिव्यांग कैदियों की जरूरतों को समझने के लिए जेल कर्मचारियों को नियमित प्रशिक्षण देने का अतिरिक्त प्रावधान भी शामिल किया गया है।
अधिसूचना में कहा गया है, “जेल कर्मचारियों को दिव्यांग कैदियों के अधिकारों और जरूरतों के प्रति संवेदनशील बनाने के लिए नियमित प्रशिक्षण दिया जाएगा।” इसका उद्देश्य ऐसे कैदियों को उचित देखभाल और सहायता उपलब्ध कराने के लिए कर्मचारियों को सक्षम बनाना है। मूल कानून में जेलों के बुनियादी ढांचे को दिव्यांगों के अनुकूल बनाने का भी प्रावधान है। इसमें बैरक, शौचालय, चिकित्सा सुविधाएं, शैक्षणिक एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र और शिकायत निवारण प्रणाली शामिल हैं। इसके तहत जेल में प्रवेश के समय प्रत्येक कैदी की दिव्यांगता संबंधी जांच करना और उसकी विशेष जरूरतों का रिकॉर्ड तैयार करना भी अनिवार्य होगा, ताकि उसे उपयुक्त आवास और सहायता उपलब्ध कराई जा सके।
इस कानून में जेल प्रशासन के लिए आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल का भी प्रावधान है। इनमें सीसीटीवी निगरानी, जैमर, बॉडी स्कैनर, बायोमेट्रिक पहचान प्रणाली और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधाएं शामिल हैं। चंडीगढ़ के लिए किए गए एक अन्य विशेष संशोधन में आदतन अपराधी की परिभाषा निर्धारित की गई है। अधिसूचना के अनुसार, आदतन अपराधी वह व्यक्ति होगा जिसे लगातार पांच वर्ष की अवधि के दौरान अलग-अलग अपराधों के लिए दो से अधिक बार दोषी ठहराकर कारावास की सजा सुनाई गई हो। हालांकि, इसके लिए निर्धारित अपवाद और शर्तें लागू होंगी। इस अवधि की गणना करते समय कारावास की सजा काटने या हिरासत में बिताई गई अवधि को शामिल नहीं किया जाएगा।
अधिसूचना में जेलों में आपातकालीन व्यवस्थाओं से संबंधित धारा 80 में पंजाब पारदर्शिता लोक खरीद अधिनियम, 2019 के स्थान पर सामान्य वित्तीय नियम, 2017 का संदर्भ भी शामिल किया गया है। केंद्र द्वारा अधिसूचित संशोधनों और विस्तारित कानून के प्रावधानों के अनुसार अब चंडीगढ़ का जेल प्रशासन संचालित होगा।