हाई कोर्ट के निर्देश, केवल विवादित रकम पर ही लगाई जाए रोक
विधि संवाददाता — शिमला
हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने साइबर अपराधों की जांच के नाम पर आम नागरिकों के पूरे बैंक खातों को फ्रीज करने की पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर रुख अपनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि केवल किसी एक संदिग्ध या विवादित लेन-देन (ट्रांजैक्शन) के कारण किसी व्यक्ति का पूरा सैलरी अकाउंट फ्रीज करना उसके जीने के अधिकार और आजीविका के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है। न्यायाधीश संदीप शर्मा ने पटवारी शिव सिंह द्वारा दायर एक आपराधिक रिट याचिका का निपटारा करते हुए यह आदेश जारी किया। अदालत ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया को निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ता के सैलरी अकाउंट से पूर्ण डेबिट फ्रीज को तुरंत हटाया जाए और केवल जांच के दायरे में आने वाली 21,000 रुपए की विवादित राशि पर ही रोक बरकरार रखी जाए।
याचिकाकर्ता शिव सिंह, जो कि शिमला जिला की रामपुर तहसील के गानवी में सरकारी कर्मचारी (पटवारी) के रूप में कार्यरत हैं, ने अपने मोबाइल पर एक गेमिंग ऐप डाउनलोड किया था। इस ऐप पर गेम खेलकर उन्होंने 21,000 जीते, जो नौ जुलाई, 2026 को डिजिटल गेटवे के माध्यम से उनके एसबीआई सैलरी अकाउंट में क्रेडिट हुए। इसके बाद महाराष्ट्र के ठाणे की साइबर क्राइम पुलिस की एक शिकायत और नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल के अलर्ट के आधार पर बैंक ने शिव सिंह के पूरे खाते के लेन-देन पर पूरी तरह रोक (टोटल डेबिट फ्रीज) लगा दी। इस खाते से उनका परिवार चलता था, बच्चों की स्कूल फीस, घर का किराया, चिकित्सा खर्च और लोन की ईएमआई जाती थी, जो पूरी तरह ठप हो गई। पीडि़त ने साइबर सैल से लेकर बैंक तक गुहार लगाई, लेकिन जब सुनवाई नहीं हुई, तो उन्होंने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।