2.40 लाख मीट्रिक टन कचरा साफ

चंडीगढ़ नगर निगम ने जीरो लैंडफिल मॉडल से बदलेगी शही की तस्वीर, गायब होने लगे कूड़े के ढेर

दिव्य हिमाचल ब्यूरो- चंडीगढ़

स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए चंडीगढ़ नगर निगम शहर को ज़ीरो लैंडफिल मॉडल में बदलने की कगार पर है, क्योंकि दादूमाजरा डंपसाइट पर तीसरे और अंतिम विरासती कचरा डंप के बायोरेमेडिएशन का काम पूरा होने वाला है। 25 जनवरी को शुरू हुई, तीसरे विरासती कचरा डंप की चल रही बायोरेमेडिएशन परियोजना ने महत्वपूर्ण मौसम संबंधी व्यवधानों के बावजूद 70-75 प्रतिशत अपशिष्ट प्रसंस्करण का प्रभावशाली लक्ष्य हासिल कर लिया है। पिछले 6 महीनों में 45 से अधिक बार बारिश हुई है, जिनमें से प्रत्येक में दो दिनों से अधिक समय तक परिचालन रुका रहा। हालांकि, इन चुनौतियों से विचलित हुए बिना, परियोजना को तैनात मशीनरी और जनशक्ति में 15 से 20 गुना वृद्धि के साथ गति दी गई है, जिससे अपशिष्ट प्रबंधन दक्षता में नए मानक स्थापित हुए हैं। लगभग 2.40 लाख मीट्रिक टन पुराने कचरे से युक्त इस अंतिम कचरे के ढेर को दो प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और मौजूदा एजेंसी के सहयोग से साफ़ किया जा रहा है, जो तेज़ी से प्रगति सुनिश्चित करने के लिए दो समर्पित शिफ्टों में काम कर रही है।

इस बायोरेमेडिएशन प्रयास के पूरा होने से चंडीगढ़ के लिए लैंडफिल पर निर्भरता का अंत हो गया है, जो टिकाऊ शहरी जीवन की दिशा में एक परिवर्तनकारी कदम है। अपनी दृढ़ यात्रा में नगर निगम ने रेडियोलॉजिकल लक्षण वर्णन, लीचेट प्रबंधन, अग्नि नियंत्रण और सुरक्षा प्रोटोकॉल जैसी कई जटिल चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना किया है और भारत सरकार के आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय द्वारा निर्धारित पर्यावरणीय मानदंडों और कचरा मुक्त शहरों के स्टार रेटिंग प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन किया है। इस अंतिम प्रयास के साथ चंडीगढ़ भारत के पहले पूर्ण रूप से लैंडफिल मुक्त शहरों में से एक बनने के लिए तैयार है। इस परियोजना के बारे में बोलते हुए नगर आयुक्त आईएएस अमित कुमार ने कहा कि यह सिफऱ् कचरा प्रबंधन की उपलब्धि नहीं है, बल्कि स्थिरता और स्मार्ट शहरी विकास के प्रति चंडीगढ़ की प्रतिबद्धता की घोषणा है।