संतुलन और एकाग्रता का मेल…हिमाचलियों की पहली पसंद बना रोलर स्केटिंग का खेल

मोहिनी सूद—सोलन

बदलते दौर में युवाओं का रुझान पारंपरिक खेलों के साथ-साथ रोमांच और फिटनेस से जुड़े खेलों की ओर तेजी से बढ़ रहा है। इसी कड़ी में प्रदेश भर में रोलर स्केटिंग युवाओं और बच्चों के बीच खासा लोकप्रिय हो रही है। शहरों और कस्बों में कई स्थानों पर रोड स्केटिंग के लिए प्वाइंट विकसित किए गए हैं, जहां बच्चे और युवा नियमित रूप से स्केटिंग की प्रैक्टिस कर रहे हैं। कई परिवार भी बच्चों के साथ इन स्थानों पर पहुंचकर उन्हें स्केटिंग के गुर सिखाते और उनका उत्साह बढ़ाते नजर आ रहे हैं। जिला सोलन में भी रोलर स्केटिंग को लेकर युवाओं में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। शाम के समय कई युवा और बच्चे स्केटिंग का अभ्यास करते दिखाई देते हैं।

युवाओं का कहना है कि रोलर स्केटिंग केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि यह शरीर को फिट रखने के साथ-साथ आत्मविश्वास और संतुलन बढ़ाने में भी मदद करती है। लगातार अभ्यास करने से शरीर में चुस्ती आती है और एकाग्रता भी बेहतर होती है। सोलन निवासी सूजल, विनेश, सत्यम और हितेश शर्मा ने बताया कि उन्हें रोलर स्केटिंग करना काफी पसंद है। शुरुआत में स्केटिंग सीखना थोड़ा मुश्किल जरूर लगा, लेकिन लगातार अभ्यास के बाद अब इसमें काफी आनंद आने लगा है। उन्होंने कहा कि स्केटिंग के दौरान शरीर का संतुलन बनाए रखना सबसे जरूरी होता है। धीरे-धीरे अभ्यास बढ़ाने से कठिन से कठिन मूवमेंट भी आसान लगने लगते हैं। युवाओं ने बताया कि स्केटिंग के लिए सुरक्षित स्थान मिलने से इसमें रुचि और बढ़ रही है। परिवार के लोग भी बच्चों को मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से दूर रखने के लिए उन्हें स्केटिंग जैसी गतिविधियों से जोड़ रहे हैं। इससे बच्चों का समय शारीरिक गतिविधियों में बीत रहा है और उनमें खेल भावना भी विकसित हो रही है।

रोलर स्केटिंग के बढ़ते क्रेज को देखते हुए युवाओं का कहना है कि प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में स्केटिंग के लिए बेहतर और सुरक्षित सुविधाएं उपलब्ध करवाई जानी चाहिए। पर्याप्त स्थान, समतल ट्रैक और सुरक्षा व्यवस्था होने से युवा बिना किसी परेशानी के अभ्यास कर सकते हैं। साथ ही नियमित प्रतियोगिताओं का आयोजन होने से खिलाडिय़ों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर भी मिलेगा। खेल विशेषज्ञों के अनुसार स्केटिंग जैसे खेल युवाओं को शारीरिक रूप से सक्रिय रखने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। इसमें संतुलन, गति और शरीर के समन्वय की आवश्यकता होती है। यही कारण है कि अब अभिभावक भी बच्चों को पढ़ाई के साथ खेल गतिविधियों में हिस्सा लेने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

क्या कहते हैं फिटनेस कोच

फिटनेस कोच साहिल ब्रजेश्वर ने बताया कि रोलर स्केटिंग शरीर को फिट रखने के साथ-साथ संतुलन और एकाग्रता बढ़ाने में भी मदद करती है। हालांकि, स्केटिंग करते समय सावधानी बरतना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि अभ्यास के लिए सुरक्षित और समतल स्थान का चयन किया जाना चाहिए। बच्चों और युवाओं को हेलमेट, नी-कैप, एल्बो गार्ड सहित जरूरी सुरक्षा उपकरण पहनकर ही स्केटिंग करनी चाहिए। सडक़ पर वाहनों की आवाजाही के बीच स्केटिंग करने से बचना चाहिए।