हरियाणा में पेट्रोल-पंपों पर बंद होगी कैशलेस पेमेंट, UPI ट्रांजेक्शन पर चार्ज का विरोध

यूपीआई ट्रांजेक्शन पर पांच रुपए चार्ज का विरोध; ऑनर बोले, प्रति लीटर 2-3 रुपए की बचत, अब मुनाफा खत्म होगा

दिव्य हिमाचल ब्यूरो — चंडीगढ़

केंद्र सरकार की ओर से पेट्रोल पंपों पर 2000 रुपए से अधिक के यूपीआई ट्रांजेक्शन पर पांच रुपए मर्चेंट डिस्काउंट रेट लगाने के प्रस्ताव का पेट्रोलियम डीलरों ने विरोध शुरू कर दिया है। ऑल हरियाणा पेट्रोलियम डीलर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने इस संबंध में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र भेजकर फैसले पर पुनर्विचार की मांग की है। एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि पेट्रोल पंपों को इस नियम से राहत नहीं दी गई तो पूरे हरियाणा में पेट्रोल पंपों पर कैशलेस यानी डिजिटल भुगतान की सुविधा बंद की जा सकती है और ग्राहकों से केवल नकद भुगतान लेकर ही पेट्रोल-डीजल दिया जाएगा। एसोसिएशन के जिला हिसार प्रधान राजकुमार सलेमगढ़ के अनुसार हरियाणा में करीब 4469 पेट्रोल पंप संचालित हैं। इनमें लगभग 2547 पंप स्वतंत्र डीलरशिप पर चल रहे हैं। गुरुग्राम में करीब 232, फरीदाबाद में 166 और हिसार में 146 पेट्रोल पंप हैं।

राज्य में प्रतिदिन करीब 1.7 करोड़ से 2.1 करोड़ लीटर पेट्रोल-डीजल की बिक्री होती है। पेट्रोल पंपों का रोजाना कुल कारोबार लगभग 150 करोड़ रुपए से 180 करोड़ रुपए बताया गया है, जिसमें करीब 60 से 70 प्रतिशत भुगतान डिजिटल माध्यमों से होता है। डीलरों का कहना है कि पेट्रोल पंप कारोबार बेहद कम मार्जिन पर चलता है। वर्ष 2017 के बाद से उनके कमीशन में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। वर्तमान में प्रति लीटर डीजल पर करीब 2 रुपए और पेट्रोल पर लगभग तीन रुपए की बचत होती है। ऐसे में यदि ग्राहक 2100 रुपए का पेट्रोल यूपीआई से खरीदता है तो 5 रुपए एमडीआर के रूप में कटने से डीलर का मार्जिन और कम हो जाएगा। डीलरों के मुताबिक बड़े यूपीआई भुगतान पर लगातार शुल्क लगने से छोटे और ग्रामीण क्षेत्रों तथा हाईवे के किनारे स्थित पेट्रोल पंपों पर इसका अधिक असर पड़ेगा और कई मामलों में उन्हें यह राशि अपनी जेब से वहन करनी पड़ सकती है। एसोसिएशन ने केंद्र सरकार से पेट्रोल पंप डीलरों को प्रस्तावित एमडीआर से राहत देने और डिजिटल भुगतान व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए उचित कदम उठाने की मांग की है।