दिव्य हिमाचल ब्यूरो, चंडीगढ़
कर्मचारी की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (एसीआर) में औसत श्रेणी दर्ज होने के कारण उसे प्रोमोशन से वंचित नहीं किया जा सकता, यदि उसे इस रिपोर्ट के बारे में बताकर अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया गया हो। हाई कोर्ट ने बुधवार को यह स्पष्ट करते हुए पंजाब सरकार के तकनीकी शिक्षा एवं औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग से जुड़े चार मामलों में कर्मचारियों की पदोन्नति पर दोबारा विचार करने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने के तीन महीने के भीतर समीक्षा की प्रक्रिया पूरी की जाए। जस्टिस कुलदीप तिवारी ने कहा कि कर्मचारी की एसीआर में दर्ज ऐसी श्रेणी, जिसका उसके करियर और पदोन्नति पर असर पड़ता है, उसे बताना जरूरी है।
कर्मचारी को अपना पक्ष रखने का अवसर दिए बिना ऐसी रिपोर्ट के आधार पर उसे प्रोमोशन से वंचित करना उचित नहीं है। कोर्ट ने विभाग को संबंधित कर्मचारियों की औसत श्रेणी वाली रिपोर्टों को नजरअंदाज करते हुए नियमों के अनुसार उनकी पात्रता पर दोबारा विचार करने का निर्देश दिया है। मामले में याचिकाकर्ताओं ने फोरमैन इंस्ट्रक्टर के पद पर पदोन्नति की मांग की थी। उनका कहना था कि निर्धारित योग्यता पूरी करने के बावजूद उनसे कनिष्ठ कर्मचारियों को प्रोमोशन दे दिया गया। इनमें तेजा सिंह का मामला भी शामिल था। उन्हें 21 अगस्त, 1977 को कपूरथला के जूनियर टेक्निकल स्कूल में वर्कशॉप इंस्ट्रक्टर के पद पर अस्थायी नियुक्ति मिली थी। उनकी सेवाएं पहली अक्तूबर, 1980 को नियमित कर दी गई थीं। वर्ष 1996 में फोरमैन इंस्ट्रक्टर के 26 पदों पर प्रोमोशन के लिए विभागीय पदोन्नति समिति ने 28 पात्र कर्मचारियों का पैनल तैयार किया था। तेजा सिंह का नाम इस सूची में 27वें स्थान पर था। निर्धारित मानक पूरा नहीं होने के कारण उन्हें प्रमोशन नहीं मिला। इसकी वजह उनकी एसीआर में दर्ज औसत श्रेणी थी।