अपनी फिल्मों का भाग्य खुद लिखने वाली अभिनेत्री

विद्या बालन

Utsavबेहतरीन और सहज अदाकारी से बालीवुड में अपनी एक खास जगह बनाने वाली विद्या बालन इंडस्ट्री की उन कुछ अभिनेत्रियों में से हैं, जो अपने दम पर फिल्में हिट कराने का दम रखती हैं। उन्होंने इस बात को साबित किया है कि अगर काम का जुनून और कड़ी मेहनत करना आता हो , तो आप अपनी किस्मत खुद लिख सकते हैं…

कैसे आईं फिल्मों में?

जनवरी को एक तमिल परिवार में जन्मीं विद्या माधुरी दीक्षित और शबाना आजमी को देखकर बड़ी हुई हैं और बचपन में उन्हें देखते हुए ही आगे चलकर सिनेमा जगत से जुड़ने का मन बना लिया। 16 साल की उम्र में उन्होंने एकता कपूर के टेलीविजन शो ‘हम पांच’ में काम किया, लेकिन वह फिल्मों में करियर बनाना चाहती थीं। उनके माता-पिता ने उनके इस फैसले का समर्थन किया, लेकिन साथ ही पढ़ाई पूरी करने की शर्त भी रखी।

किस फिल्म से पहचान मिली?

विद्या ने सेंट जेवियर्स कालेज से समाजशास्त्र में स्नातक डिग्री और इसके बाद मुंबई विश्वविद्यालय से मास्टर की डिग्री हासिल की। विद्या के लिए फिल्मों में करियर बनाने की राह आसान नहीं थी। मलयालम और तमिल फिल्म जगत में कई प्रयासों के बाद भी वह असफल रहीं। विद्या को बांग्ला फिल्म ‘भालो थेको’ से पहचान मिली। इस फिल्म में निभाए आनंदी के किरदार के लिए उन्होंने सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का आनंदलोक पुरस्कार भी जीता। बालीवुड में उन्होंने ‘परिणीता’ फिल्म से कदम रखा। इस फिल्म में अपने अभिनय के दम पर उन्होंने सर्वश्रेष्ठ नवोदित अभिनेत्री का पुरस्कार जीता। इसके बाद उन्होंने ‘लगे रहो मुन्ना भाई, गुरु, और सलाम-ए-इश्क’ जैसी कई फिल्में की, लेकिन लोगों ने उन्हें कुछ खास पसंद नहीं किया। साल 2007 में आई प्रियदर्शन की फिल्म ‘भूल-भुलैया’ उनके करियर के लिए नया मोड़ साबित हुई। इसमें निभाए गए ‘अवनी’ के किरदार की आलोचकों ने भी प्रशंसा की। इसके बाद 2009 में आई ‘पा’ और विशाल भारद्वाज की ‘इश्किया’ ने उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का फिल्मफेयर पुरस्कार दिलाया। यहां से विद्या के लिए सफलता के रास्ते खुल गए। इसके बाद उन्हें 2011 में आई फिल्म ‘द डर्टी पिक्चर’ के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री मिला।

किरदार को निभाना कितना मुश्किल?

करियर को लेकर दिए एक साक्षात्कार में विद्या ने कहा कि हर फिल्म में एक नए किरदार को निभाना ही अपने आप में सबसे मुश्किल काम होता है, क्योंकि यह एक अलग व्यक्तित्व की बात होती है, लेकिन ‘डर्टी पिक्चर’ में निभाए सिल्क स्मिता के किरदार में ढल पाना मेरे लिए थोड़ा मुश्किल था। हम दोनों का व्यक्तित्व एक-दूसरे से बिलकुल अलग था, लेकिन सिल्क के किरदार ने मुझे मेरे अंदर के एक नए पहलू से मिलावाया। इसे निभाने के दौरान मैं अपने अंदर की हिचकिचाहट और डर से निकल पाई।

अपने किस किरदार से प्रभावित हुईं?

विद्या के लिए उनका सबसे पसंदीदा किरदार ‘इश्किया’ फिल्म में निभाया कृष्णा वर्मा नामक महिला का है। वह कहती हैं कि कृष्णा का किरदार निभाना चुनौती भरा था क्योंकि इसमें एक रहस्यमयी महिला का किरदार निभाना था। सुजॉय घोष की 2012 में आई फिल्म ‘कहानी’ में विद्या द्वारा निभाया गया विद्या बागची नामक गर्भवती महिला के किरदार को भी लोगों ने काफी पसंद किया। हालांकि वजन को लेकर अकसर उनकी आलोचना हुई, लेकिन विद्या ऐसी बातों पर ध्यान नहीं देतीं। हाल ही में रिलीज हुई फिल्म ‘कहानी-2’ में विद्या ने दुर्गा रानी सिंह का किरदार निभाया था, जो उनके लिए अब तक का सबसे चुनौतीपूर्ण किरदार रहा है। विद्या का कहना है ‘दुर्गा का किरदार बेहद मुश्किल था। इस फिल्म में मुझे जो किरदार मिला, वह एक ऐसी महिला का था, जो बाल यौन शोषण का शिकार रही। वह इस डर से बाहर नहीं आई और इसलिए अकेले रहना पसंद करती है। वहीं, दूसरी ओर जब वह किसी दूसरी बच्ची को इसका शिकार होते देखती है, तो उसे बचाने के लिए एकदम दुर्गा का रूप ले लेती हूं।

 

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