71 साल से चले आ रहे नीरस रिश्ते

कुलदीप नैयर लेखक, वरिष्ठ पत्रकार हैं मैं आशा करता हूं कि सीमा पर नरमी होगी तथा स्थिति शांत हो जाएगी ताकि दोनों देशों के बीच शत्रुता को खत्म किया जा सके। मैं उस बस में था, जिसे अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में लाहौर के लिए चलाया गया…

सरकारी प्रश्रय की आस में फोटो गैलरी

सुरेंद्र शर्मा लेखक, सुंदरनगर से हैं यह फोटो गैलरी पिछले दो दशकों से सरकारी प्रश्रय मांग रही है, परंतु भागीरथी प्रयास को दुलार की एक लोरी भी नसीब नहीं हुई। मुख्यमंत्री, राज्यपाल के अलावा कई नामचीन हस्तियां फोटो गैलरी को निहार चुकी हैं,…

कश्मीर समस्या की जड़ की खोज

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं लद्दाख का रिंचन कश्मीर का राजा बन गया था, यहां तक तो ठीक है, लेकिन रिंचन मुसलमान बन गया और उसके पीछे-पीछे सारे कश्मीरी भेड़ों की तरह मुसलमान हो गए, इसको कश्मीर में भी दंत कथा से…

चुनावों की भट्ठी में दहकता देश

सुरेश कुमार लेखक, योल से  हैं यही तो राजनीति है कि चार तक जनता से घुटने टिकाओ और पांचवें साल खुद घुटने टेक दो, तो सत्ता फिर आपकी। ऐसे देश कैसे आगे बढ़ेगा। राजनीति अगर लोकतंत्र के लिए होती, तो ठीक था, पर अब यह भीड़तंत्र बन चुकी है...…

दुविधाओं के जाल में फंसी कांग्रेस

प्रो. एनके सिंह लेखक, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन हैं हर किसी को यह समझना चाहिए कि मोदी विकासात्मक लक्ष्यों के प्रति लोगों को प्रेरित करने के लिए एक कुशल रणनीति का अनुसरण कर रहे हैं। इसका परिणाम यह है कि कई विरोधियों की…

खेल परिषद की बैठक से उपजी संभावनाएं

भूपिंदर सिंह लेखक, राष्ट्रीय एथलेटिक प्रशिक्षक हैं सरकार को भी चाहिए कि वह खेलों के लिए विश्वविद्यालय को अलग से अनुदान जारी करे, क्योंकि प्रदेश के लगभग 95 प्रतिशत युवा खिलाड़ी महाविद्यालय तथा विश्वविद्यालय से ही होते हैं। इस वर्ष साहसिक…

जातीय समीकरण में पिछड़ गया विकास

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं भाजपा जानबूझ कर मुस्लिम व ईसाई समाज से दूर रहना चाहती है, क्योंकि इससे हिंदुओं को संतोष रहता है कि भाजपा उनकी अपनी पार्टी है। यदि हिंदुओं में से दलित छिटक जाएं और मुस्लिम समाज के…

हिमाचल को नशे से बचाने की कवायद आरंभ

अजय पाराशर लेखक, धर्मशाला से हैं आईएचबीटी, पालमपुर के एक शोध के अनुसार जंगली गेंदे का पौधा भांग, लैंटाना और कांग्रेस घास के मुकाबले हिमाचली परिवेश में अधिक फलता-फूलता है और इसे दवाइयों में उपयोग किया जा सकता है। अगर भांग, लैंटाना  की…

जल परिवहन बढ़ने का नया परिदृश्य

डा. जयंतीलाल भंडारी लेखक ख्यात अर्थशास्त्री, इंदौर से हैं केंद्र सरकार आंतरिक जल माल ढुलाई को तेजी से प्रोत्साहन देकर भारी दबाव से जूझ रहे सड़क और रेल परिवहन तंत्र को काफी राहत देने की रणनीति पर आगे बढ़ते हुए दिखाई दे रही है। गौरतलब है…

राशन डिपो व्यवस्था में सुधार की जरूरत

एसके भटनागर लेखक, पपरोला से हैं पहला सुझाव है कि वर्तमान डिपुओं की संख्या बढ़ाई जाए। साथ लगते गांवों-पंचायतों इत्यादि में लोगों की सुविधानुसार अलग डिपो खोलने चाहिएं, ताकि उपभोक्ताओं को राशन लेने के लिए अधिक भीड़ में अधिक दूर जाने और…

आर्थिक विकास से सहज ही जनहित नहीं

डा. भरत झुनझुनवाला लेखक, आर्थिक विश्लेषक एवं टिप्पणीकार हैं बाजार में श्रमिक के सच्चे वेतन में वृद्धि हासिल करने के लिए विशेष कदमों की जरूरत है। आर्थिक विकास से सहज ही सच्चे वेतन में वृद्धि नहीं होती है। आर्थिक विकास और श्रमिक के वेतन…

गिरि-पार क्षेत्र की हाटी लोक संस्कृति का संरक्षण

प्रकाश शर्मा लेखक, सिरमौर से हैं इस सांस्कृतिक अवनति का कारण सामुदायिक चेतना में आई कमी के साथ-साथ हमारी वर्तमान शिक्षा व्यवस्था भी है, जो लोक कलाओं के संरक्षण का सामयिक प्रशिक्षण दे पाने में असमर्थ रही है। वास्तव में शिक्षा क्षेत्र में…

अलवर में मॉब लिंचिंग के सबक

कुलदीप नैयर लेखक, वरिष्ठ पत्रकार हैं इस तरह की घटनाएं जब भी होती हैं, लिंचिंग और लोगों पर हमले सहित, निर्विवाद रूप से मुसलमान व दलित तथाकथित गौ रक्षा के नाम पर हिंसा के शिकार हुए हैं। अपने समाज को बहुलतावादी बनाने की दिशा में हमारे…

जनता व सरकार के मध्य सेतु बना जनमंच

किशन चंद चौधरी लेखक, कांगड़ा से हैं प्रदेश सरकार के अनुसार जनमंच ने आम जनता की समस्याओं एवं अन्य मामलों को प्रशासन व सरकार के समक्ष उठाने के लिए ऐसा बेहतर मंच प्रदान किया है, जिसमें आम जनता को घर-द्वार पर ही समस्याओं का शीघ्र निपटारा…

असम में एनसीआर से उठे प्रश्न

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं ममता बनर्जी तो दहाड़ रही हैं कि यदि इन अवैध बांग्लादेशियों को बाहर निकाला, तो देश में गृहयुद्ध छिड़ जाएगा। खून की नदियां बह जाएंगी। कांग्रेस नरेश राहुल गांधी कह रहे हैं कि भाजपा…