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युवा उम्मीदों की कद्र करे बजट

कर्म सिंह ठाकुर लेखक, सुंदरनगर, मंडी से हैं प्रदेश में नौ लाख के करीब बेरोजगार हैं सबको सरकारी नौकरी नहीं दी जा सकती, जो कि शाश्वत सत्य है। क्यों न इन युवाओं को ईमानदारी से यह एहसास करवाया जाया कि प्रदेश में भौगोलिक दृष्टि से समृद्धता के…

मणिशंकर को भारत की जनता दे जवाब

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं इधर, जब सीमा पर पाकिस्तान के साथ घमासान मचा हुआ है और सेना के शिविरों पर हमले हो रहे हैं, भारतीय सैनिक और पुलिस बल देश की रक्षा के लिए अपना ख़ून बहा रहे हैं , ठीक उसी समय सीमा के दूसरी ओर…

अब सेना को मन की बात करने दी जाए

प्रताप सिंह पटियाल लेखक, घुमारवीं, बिलासपुर से हैं घाटी में शायद कोई ऐसा दिन गुजरता है, जब सेना को आतंकियों से न जूझना पड़े। जैसे समय बीत रहा है, कश्मीर घाटी में पांव पसार चुके पाकिस्तानी तत्त्वों की ताकत बढ़ रही है। सरकारों की तरफ से कोई…

भारतीय लोकतंत्र के अप्रिय पहलू

प्रो. एनके सिंह लेखक, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन हैं लोकतंत्र का मतलब केवल यह नहीं है कि नियमों को लिख भर दिया जाए। इसकी अपनी एक आत्मा होती है जो सहभागिता के आधार पर काम करती है तथा जिसमें एक-दूसरे के प्रति सम्मान की भावना…

पदक विजेताओं को मिले वजीफे का सहारा

भूपिंदर सिंह लेखक, राष्ट्रीय एथलेटिक प्रशिक्षक हैं सरकार आगामी बजट में गैर सरकारी प्रयासों से पदक विजेता खिलाडि़यों, जो किसी खेल छात्रावास में नहीं रहे हैं, उनके लिए उचित वजीफे का प्रबंध करे। साथ ही साथ सरकार खेल तथा शिक्षा विभाग के माध्यम…

न किसान की जय, न जवान की

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं नीतियां ऐसी बना दी गई हैं कि खेती एक अलाभप्रद व्यवसाय बन गया है। यह नीतियों की असफलता है, किसानों की नहीं। यहां भी सरकार के पास कोई योजना अथवा दूरदृष्टि नहीं है। यह स्थिति ऐसी है कि न…

नई सुबह के इंतजार में सूचना-प्रौद्योगिकी क्षेत्र

राजेश शर्मा लेखक, रोहड़ू, शिमला से हैं आज देश के कई राज्यों ने सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में काफी तरक्की कर ली है, जिससे वहां सुशासन की सीढि़यां आसान हुई हैं। हालांकि हिमाचल प्रदेश सरकार के अधीन सूचना प्रौद्योगिकी का एक अलग विभाग है, जो इस…

संविधान के हास्यास्पद ‘नियंत्रण और संतुलन’

भानु धमीजा सीएमडी, ‘दिव्य हिमाचल’ लेखक, चर्चित किताब ‘व्हाई इंडिया नीड्ज दि प्रेजिडेंशियल सिस्टम’ के रचनाकार हैं किसी देश के संविधान का प्राथमिक उद्देश्य एक उत्तरदायी सरकार की स्थापना है। ऐसा अकसर शासन की स्वतंत्र संस्थाओं की स्थापना कर,…

पर्यटन क्षेत्र को संवारे बजट

कंचन शर्मा लेखिका, शिमला से हैं बजट की कमी के चलते आज तक प्राकृतिक सौंदर्य को सहेजने के लिए कुछ खास नहीं किया गया, जबकि असम, गुजरात, राजस्थान जैसे राज्य पर्यटन को विकसित करने में करोड़ों रुपए खर्च कर रहे हैं। हिमाचल में युवा वर्ग केवल…

किसान की संतान को शहर लाइए

डा. भरत झुनझुनवाला लेखक, आर्थिक विश्लेषक एवं टिप्पणीकार हैं संपूर्ण विश्व ने समझ लिया है कि कृषि कांप रही है और किसानों को वहां से निकाल लिया है। हम अनायास ही किसान को उसी दलदल मे धकेल रहे हैं। हमें कृषि में श्रम की गिरती जरूरत को देखते हुए…

शून्य लागत खेती को खाद-पानी दे बजट

डा. राजेश्वर सिंह चंदेल लेखक, नौणी विश्वविद्यालय में संयुक्त निदेशक (अनुसंधान) हैं प्रदेश में कृषि कार्यों में हर वर्ष लगभग 515 मीट्रिक टन रसायनों का प्रयोग सरकारी आंकड़ों के अनुसार हो रहा है, लेकिन निश्चित रूप से यह आंकड़ा 700-750 मीट्रिक…

आतंकी लपटों में झुलसता जम्मू-कश्मीर

कुलदीप नैयर लेखक, वरिष्ठ पत्रकार हैं हिंसा से थक चुके आम लोग केवल विकास चाहते हैं। अगर वहां विकास हुआ होता तो कुछ युवा आतंकवाद की ओर आकर्षित न हुए होते। कश्मीरी चाहते हैं कि घाटी में फिर खूब सैलानी आएं, तभी वहां विकास आ पाएगा। आम कश्मीरी…

नए फलों के परीक्षण को चाहिए विशेष विभाग

डा. चिरंजीत परमार लेखक, वरिष्ठ फल वैज्ञानिक हैं हमें ठीक तरीके से नए फलों और नई किस्मों का चुनाव करना चाहिए, जिसकी आज बहुत आवश्यकता है।  इसके लिए प्रदेश में तीन-चार अलग ही अनुसंधान केंद्र स्थापित करने पड़ेंगे, तभी यह काम वैज्ञानिक तरीके से…

थरूर की दृष्टि में रोजगार का अर्थ

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं शशि थरूर के मित्र और कांग्रेस के अर्थशास्त्री पी चिदंबरम तो उनसे भी दो कदम आगे जाते हैं। उनका कहना है कि यदि अपनी रेहड़ी पर पकौड़े तल कर बेचना भी रोजगार की श्रेणी में आता है, तब तो भिक्षा…

गोवंश का सहारा बनें मंदिर ट्रस्ट

रणजीत सिंह राणा लेखक, सामाजिक कार्यकर्ता हैं वेदों में गोमाता को विश्वरूपा एवं विश्ववंदया बताया गया है। यह हमारे जीवन की सर्वस्व निधि हैं। भारतीय पुरातन परंपरा, संस्कृति, सभ्यता, मर्यादा एवं धर्म की प्रतीक स्वरूप हैं। अनादि वैदिक सनातन धर्म…
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